मुख्यपृष्ठस्तंभकिस्सों का सबक : लेखक की सफलता

किस्सों का सबक : लेखक की सफलता

डॉ. दीनदयाल मुरारका
मैक्सिम गोर्की के पिता अत्यंत क्रूर स्वभाव के थे। वे घर में वार्तालाप करते समय भी अपनी संतान और पत्नी को पीट दिया करते थे। मैक्सिम गोर्की पढ़ना चाहते थे, पर उनके पिता उन्हें दिन-रात काम में लगाए रखते थे, ताकि वो पढ़ ना सकें।
जब भी वो पढ़ने के लिए कहते उनके पिता उनकी पिटाई करने लग जाते। गोर्की के मन में पढ़ने की उत्कट भावना लहलहा रही थी। पढ़ने की दृष्टि से ही उन्होंने एक कबाड़ी की दुकान पर नौकरी कर ली।
कबाड़ी की दुकान में हजारों पुस्तकें आती थीं और उनका मन पुस्तक पढ़ने के लिए लालायित हो जाता था। खैर, कार्य करते हुए जब भी उन्हें समय मिलता, वो पढ़ते रहते थे। उन्होंने हजारों पुस्तकें पढ़ ली। यद्यपि उन्हें पहले अर्थ समझ में नहीं आता था। परंतु बाद में धीरे-धीरे वो उनका अर्थ समझने लग गए। एक दिन उन्होंने एक कहानी लिखी और समाचार पत्र में छपने के लिए भेज दी। जब कहानी प्रकाशित हुई, तो वहां के मूर्धन्य लेखकों की ओर से उन्हें बधाई पत्र पहुंचा, जिसने उनके मन में उत्साह का संचार कर दिया। अब उन्होंने निरंतर लिखना आरंभ कर दिया। एक बार उन्होंने ‘मां’ शीर्षक से एक पुस्तक लिखी। वह पुस्तक उस देश ही नहीं अपितु विश्व की सर्वश्रेष्ठ पुस्तकों में से एक साबित हुई। पुरुषार्थी मनुष्य जीवन में अवश्य सफल होते हैं। हो सकता है शुरुआत में कुछ कठिनाई आए, किंतु अंतत: सफलता उनके कदम चूमती है।

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