मुख्यपृष्ठनए समाचारकहीं देर न हो जाए... स्वास्थ्य योजना में आचार संहिता का अड़ंगा!

कहीं देर न हो जाए… स्वास्थ्य योजना में आचार संहिता का अड़ंगा!

मनपा अस्पतालों में जीरो प्रिस्क्रिप्शन पॉलिसी में होगी देरी
आदर्श आचार संहिता में लागू नहीं हो सकती नई योजनाएं
सामना संवाददाता / मुंबई
मुंबई मनपा के सभी अस्पतालों में एक अप्रैल से जीरो प्रिस्किप्शन पॉलिसी लागू होनेवाली थी, लेकिन इसका क्रियान्वयन आचार संहिता का हवाला देकर नहीं किया गया है, जबकि योजना को पहले ही मंजूरी मिल गई है। मनपा का कहना है कि इस समय पूरे देश में लोकसभा चुनाव के चलते आदर्श आचार संहिता लागू है, जिस कारण कोई भी नई योजनाओं का क्रियान्वयन नहीं किया जा सकता है। ऐसे में इस योजना के लागू होने में देरी होगी। प्रशासन के मुताबिक, योजना को लागू करने के लिए विशेष अनुमति मांगने की तैयारी की जा रही है। इसके लिए चुनाव आयोग को पत्र लिखने का फैसला किया गया है।
उल्लेखनीय है कि मनपा अपने अस्पतालों में जीरो प्रिस्क्रिप्शन पॉलिसी लागू करते हुए मरीजों को सभी आवश्यक दवाएं नि:शुल्क मुहैया कराने जा रही है। इसके लिए १,५०० करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। साथ ही इसके तहत अस्पतालों में मुफ्त, कैशलेस, पेपरलेस इलाज उपलब्ध कराया जाएगा। जीरो प्रिस्क्रिप्शन पॉलिसी एक अप्रैल से शुरू होनी थी, लेकिन इस बीच मार्च में लोकसभा चुनाव के कार्यक्रमों की घोषणा कर दी गई। इससे पूरे देश में आचार संहिता लागू हो गई है। मनपा का कहना है कि इस वजह से किसी भी तरह की नई योजनाओं का क्रियान्वयन नहीं किया जा सकता है। इसलिए हाल-फिलहाल योजना में आचार संहिता का अड़ंगा लग गया है। बता दें कि योजना को लेकर करोड़ों रुपयों की आवश्यक दवा खरीद के टेंडर को पहले ही मंजूरी दी जा चुकी है।
मनपा की हो रही आलोचना
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने मनपा की आलोचना करते हुए कहा है कि आचार संहिता के दौरान कोई भी नई परियोजनाएं लागू नहीं की जा सकतीं। उन्होंने बताया कि योजना को पहले ही मंजूरी दी गई है और मनपा के बजट में इसके लिए १,५०० करोड़ रुपए मंजूर किए गए थे। एक वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि मनपा अस्पताल पहले से ही दवाओं की १०-१२ फीसदी कमी से जूझ रहे हैं। जरूतमंद रोगियों के लिए वरदान साबित होनेवाली इस योजना को लागू करने में अब आम चुनाव बाधा बन गया है। योजना को लागू करने के लिए सभी आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी कर ली गर्इं। दवाओं की खरीद के लिए चुनाव आयोग से मंजूरी मिलने की संभावना कम है।
दवा खरीद के लिए जनवरी में जारी हुआ था टेंडर
जनवरी में दवा खरीद के लिए २,३०० करोड़ रुपए का टेंडर जारी किया गया था। हालांकि, ३,००० आवश्यक दवाएं ऐसी हैं, जिन्हें अनुसूची में शामिल किया जाना है। २० करोड़ रुपए की दवाओं की खरीद के लिए निविदा प्रक्रियाएं आमंत्रित की गई हैं। इसमें सर्जरी के लिए आवश्यक चिकित्सा सामग्री भी शामिल है। एक अधिकारी ने कहा कि दवा की किल्लत को दूर करने के लिए एक और प्रयास में अधिकारियों के माध्यम से दवाओं की खरीदारी के लिए प्रतिदिन ४०,००० रुपए की सीमा निर्धारित की गई है। हालांकि, डॉक्टरों का कहना है कि मरीजों की अधिक संख्या वाले अस्पतालों के लिए यह रकम पर्याप्त नहीं है।
गेम-चेंजर योजना को लागू करना नहीं है आसान
मनपा के अतिरिक्त आयुक्त डॉ. सुधाकर शिंदे ने कहा कि गेम-चेंजर योजना को लागू करना इतना आसान नहीं है, क्योंकि नियमित रूप से लगभग ५,००० दवाओं और अन्य वस्तुओं की आवश्यकता होती है। हम जल्द से जल्द योजना को लागू करना चाहते हैं। इसलिए हम चुनाव आयोग को इस संबंध पत्र लिखेंगे।

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