" /> बीती ना बिताई रैना…!

बीती ना बिताई रैना…!

फिल्म इंडस्ट्री में एक ही लीक पर चलने की बीमारी काफी पुरानी है। एक कलाकार को दर्शक जिस रोल में पसंद कर लेते हैं, तो उसकी दूसरी फिल्म का प्रोड्यूसर भी यही चाहता है कि वो कलाकार उसी तरह का रोल उसकी फिल्म में भी निभाए, ताकि उसकी फिल्म हिट हो सके। लिहाजा, कलाकार एक ही तरह की भूमिका निभाते हुए उसमें बंधकर रह जाता है और टाइप कास्ट हो जाता है। फिल्म इंडस्ट्री के एक ऐसे ही कलाकार की होम-प्रोडक्शन फिल्म जब सुपरहिट हो गई तो उसी तर्ज पर उन्होंने दूसरी फिल्म बनाने की सोची। लेकिन उनके दोस्त कलाकार ने एक सच्चे दोस्त की तरह उन्हें लीक पर चलने की बजाय लीक से हटकर फिल्में बनाने की सलाह दी, ताकि एक इमेज में वैâद होकर उनका करियर न खत्म हो जाए। खैर, उस कलाकार ने अपने दोस्त की बात मानी और लीक से हटकर अपनी उस फिल्म का निर्माण किया।
जितेंद्र और संजीव कुमार की दोस्ती फिल्म ‘धरती कहे पुकार के’ और ‘जीने की राह’ के जमाने से थी। इसी दोस्ती के चलते संजीव कुमार ने जितेंद्र की होम-प्रोडक्शन फिल्म ‘प्यासा सावन’ में गेस्ट रोल करना स्वीकार कर लिया, वो भी बिना किसी पैसे के। जितेंद्र की होम-प्रोडक्शन फिल्म ‘हमजोली’ के सुपरहिट हो जाने के बाद जितेंद्र के भाई प्रसन्न कपूर ने अपनी अगली होम-प्रोडक्शन फिल्म के लिए दोबारा डायरेक्टर रामन्ना को साइन कर लिया और जितेंद्र की स्टाइल वाली स्क्रिप्ट भी उन्होंने फाइनल कर दी। जब ये बात संजीव कुमार को पता चली तो उन्होंने जितेंद्र को समझाया कि आप दोबारा इस तरह की फिल्म बनाकर बहुत बड़ी गलती कर रहे हो। इससे आप एक ही इमेज में बंधकर रह जाओगे और फिर एक वक्त ऐसा भी आएगा जब लोग आपको एक ही तरह के रोल में बार-बार देखकर ऊब जाएंगे। नतीजा, आपका करियर थोड़े ही समय में खत्म हो जाएगा। अगर आपको लंबी रेस का घोड़ा बनना है, तो आपको अपनी इमेज से हटकर कुछ अलग करना होगा। आपकी इमेज और डिमांड के अनुसार निर्माता आपको लेकर फिल्में जरूर बनाएंगे लेकिन आप अपने होम-प्रोडक्शन में तो कुछ नया और अलग कर ही सकते हो। संजीव कुमार की ये बात जितेंद्र की समझ में आ गई। संजीव कुमार ने गुलजार से जितेंद्र की मुलाकात करवाई और जितेंद्र ने अपने होम-प्रोडक्शन में फिल्म ‘परिचय’ की शुरुआत कर दी। लेकिन फिल्म इंडस्ट्री में बहकाने वाले लोगों की कमी नहीं है। कइयों का कहना था कि संजीव कुमार की बात मानकर जितेंद्र बहुत बड़ी गलती कर रहे हैं। किसी ने उनको यहां तक सलाह दे डाली कि फिल्म में एक ड्रीम सीक्वेंस वाला ऐसा गीत डालो, जो जितेंद्र की स्टाइल का हो और जिसे फिल्म की हीरोइन अपने सपने में देखती है। लेकिन गुलजार का शुमार उन डायरेक्टरों में किया जाता है, जो किसी की भी दखलंदाजी अपने काम में पसंद नहीं करते थे और जितेंद्र की हिम्मत नहीं हो रही थी कि वो गुलजार साहब को कुछ इस तरह की सलाह दें। इस बीच गुलजार ने लता मंगेशकर और भूपेंद्र की आवाज में एक क्लासिकल गीत ‘बीती ना बिताई रैना…’ अपने पसंदीदा संगीतकार आर.डी. बर्मन के संगीत निर्देशन में रिकॉर्ड भी करवा लिया। जितेंद्र ने इस गाने को एक बार नहीं, बल्कि कई बार सुना। जितेंद्र के चाहनेवालों ने उन्हें बहकाते हुए कहा कि वेस्टर्न म्यूजिक के जमाने में इस क्लासिकल गाने को कौन सुनना पसंद करेगा। लोगों के कहने पर जितेंद्र सोच में पड़ गए और उन्होंने महसूस किया कि गुलजार के साथ फिल्म शुरू करके उन्होंने बहुत बड़ी गलती कर दी है। लिहाजा, वो संजीव कुमार के पास गए और वो गाना सुनाते हुए उनसे रिक्वेस्ट की कि मैं तो गुलजार साहब से कुछ नहीं कह सकता। आप ही उनसे रिक्वेस्ट करो कि वे इस गाने को ड्रॉप कर दें। इस गाने को लोग पसंद नहीं करेंगे और ये गाना फिल्म के फ्लॉप होने की एक वजह बनेगा। जितेंद्र की बात सुन संजीव कुमार ने कहा, ‘गुलजार हमसे कहीं ज्यादा एक्सपीरियंस रखते हैं। उनकी नजर में स्क्रिप्ट हीरो है, हीरो और हीरोइन नहीं। संजीव कुमार से बात न बनती देख जितेंद्र गुलजार के एक खास व्यक्ति के पास पहुंच गए और उनसे भी वही बात कही। जितेंद्र की बात सुनकर उसने भी उन्हें चुप रहने की सलाह दी। खैर, फिल्म ‘परिचय’ रिलीज हुई। इस फिल्म ने भले ही बॉक्स ऑफिस पर ‘हमजोली’ जैसा करिश्मा भले ही न दिखाया हो लेकिन ये फिल्म घाटे का सौदा भी नहीं रही। मजे की बात तो ये थी कि जिस गीत ‘बीती ना बिताई रैना…’ पर जितेंद्र को एतराज था। उस गाने के लिए लता मंगेशकर को ‘नेशनल अवार्ड’ मिला और आगे चलकर गुलजार के साथ जितेंद को दो हिट फिल्में ‘खुशबू’ और ‘किनारा’ मिलीं, जो उनकी इमेज से एकदम विपरीत थीं।