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महाराष्ट्र की एकजुटता, स्वाभिमान का विराट दर्शन कराएंगे: चलो आजाद मैदान! ….१७ दिसंबर को महाविकास आघाड़ी का महामोर्चा!!

• ‘खोके’ सरकार के खिलाफ जोरदार यलगार
• सभी शिवप्रेमी और महाराष्ट्रप्रेमियों को महामोर्चा में शामिल होने का आह्वान
• यह महामोर्चा एक शुरुआत है, राज्य सरकार को इशारा देकर देखते हैं, नहीं सुना तो आगे की रणनीति बनाएंगे! – उद्धव ठाकरे
• भाजपा ने राज्यपाल को १७ दिसंबर के पहले हटाया तो भी महामोर्चा निकलेगा ही!

सामना संवाददाता / मुंबई
महाराष्ट्र के आराध्य दैवत छत्रपति शिवाजी महाराज और अन्य आदर्शों का भाजपा नेताओं की तरफ से लगातार हो रहे अपमान, महाराष्ट्र की हो रही अवहेलना, कर्नाटक की तरफ से महाराष्ट्र पर हो रहे हमले, उद्योगों का दूसरों राज्यों में जाना, बढ़ती बेरोजगारी और महंगाई ऐसे विभिन्न विषयों पर महाविकास आघाड़ी ने चलो आजाद मैदान का आह्वान किया है। आगामी १७ दिसंबर को जीजामाता उद्यान से आजाद मैदान तक यह विराट महामोर्चा निकाला जाएगा। महाराष्ट्र की अस्मिता, महाराष्ट्र का स्वाभिमान और महाराष्ट्र की शक्ति क्या है, यह महाराष्ट्र से विद्वेष रखनेवालों को दिखाने के लिए प्रत्येक शिवराय प्रेमी और महाराष्ट्र प्रेमी को इस महामोर्चा में शामिल होना चाहिए, ऐसा आह्वान महाविकास आघाड़ी की तरफ से शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के पक्षप्रमुख उद्धव ठाकरे ने किया है।

महाविकास आघाड़ी में शामिल शिवसेना, राकांपा, कांग्रेस तथा अन्य घटक दलों के नेताओं की बैठक कल सोमवार शाम विपक्ष के नेता अजीत पवार के आवास पर हुई। इस बैठक में शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के पक्षप्रमुख उद्धव ठाकरे, अजीत पवार और कांग्रेस नेता बालासाहेब थोरात के साथ शिवसेना नेता व सांसद संजय राऊत, कांग्रेस नेता अशोक चव्हाण, भाई जगताप, राकांपा नेता छगन भुजबल, सपा के अबू आसिम आजमी, शेकाप के जयंत पाटील, शिवसेना सांसद विनायक राऊत, मिलिंद नार्वेकर के साथ सीपीआई, सीपीएम पार्टी के नेताओं ने इस बैठक के बाद आयोजित एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस महामोर्चा की घोषणा की। प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए उद्धव ठाकरे ने कहा कि महाविकास आघाड़ी की अच्छी चल रही सरकार को गद्दारी और साजिशों से गिराने के बाद बनी इस ‘मिंधे’ सरकार के कार्यकाल में महाराष्ट्र की लगातार अवहेलना और अपमान हो रहा है।
महाराष्ट्र में पहली बार बगावत का बीज बोया जा रहा है। कुछ लोग कह रहे हैं कि हमें कर्नाटक में जाना है। कोई कह रहा है कि हम तेलंगाना जाना चाहते हैं, कोई गुजरात जाना चाहता है। ऐसा पहले कभी नहीं हुआ है। शिव छत्रपति के एकसंघ महाराष्ट्र को जानबूझकर तोड़ने की कोशिश की जा रही है। यह सब कौन कर रहा है, बताने की जरूरत नहीं, कहते हुए उद्धव ठाकरे ने भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कर्नाटक सरकार बहुत आक्रामक तरीके से महाराष्ट्र के गांवों पर दावा कर रही है। वे अक्कलकोट बोलकर सोलापुर तक दावा कर रहे हैं। कल सोलापुर कहेंगे और पंढरपुर का विठोबा भी मांगेंगे। सांगली के जत तालुका के ग्रामीणों का कहना है कि वे कर्नाटक जाना चाहते हैं। इसके कारण हमारे राज्य में सरकार है या नहीं, ऐसा सवाल भी उद्धव ठाकरे ने किया।
कर्नाटक चुनाव के लिए गांवों को तोड़ा जा रहा है क्या?
उद्धव ठाकरे ने इस दौरान राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी की भी खबर ली। उन्होंने कहा कि राज्यपाल बनाकर कहीं से भी किसी को भी भेजा जा रहा है। राज्यपाल होने के नाते मान-सम्मान बनाए रखना होता है। लेकिन यही राज्यपाल छत्रपति का अपमान कर रहे हैं। वे ज्योतिबा फुले, सावित्रीबाई फुले का अपमान कर रहे हैं। महाराष्ट्र में हिंदुओं को बांटा जा रहा है।

प्रेस कॉन्फ्रेंस शुरू होने से पहले शिवसेना नेता सांसद संजय राऊत ने बैठक में क्या चर्चा हुई, इसकी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र के स्वाभिमान और अस्मिता को ठेस पहुंचाने वाली घटनाएं पिछले कुछ दिनों से लगातार राज्य में हो रही हैं। राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने महात्मा फुले, सावित्रीबाई फुले और छत्रपति शिवाजी महाराज के बारे में अपमानजनक टिप्पणी की। उसके बाद भाजपा नेताओं ने की। कर्नाटक के मुख्यमंत्री ने महाराष्ट्र पर हमला बोलना शुरू किया है। महाराष्ट्र के उद्योगों को गुजरात जैसे राज्य में ले जा रहे हैं। इन मुद्दों पर विस्तृत चर्चा के बाद विपक्षी दल के रूप में क्या भूमिका निभानी है, इस पर एक्शन प्लान तैयार किए जाने की जानकारी संजय राऊत ने दी।

इतना लाचार महाराष्ट्र आज तक किसी ने नहीं देखा
‘मिंधे’ सरकार के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे पर टीका करते हुए उद्धव ठाकरे ने सवाल किया कि महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री हैं, यह कब पता चलेगा? सीमा क्षेत्र के रहिवासियों से चर्चा करने के लिए हमारे मंत्री आज कर्नाटक जानेवाले थे। लेकिन कर्नाटक के मुख्यमंत्री की चेतावनी के बाद उनका दौरा रद्द हो गया। महाराष्ट्र को इतना लाचार आज तक किसी ने नहीं देखा था, ऐसा जोरदार हमला उद्धव ठाकरे ने किया। इस लाचार सरकार का मतलब महाराष्ट्र नहीं है। यह बताने का वक्त अब आ गया है, ऐसी चेतावनी उन्होंने दी।

कर्नाटक में जाने के लिए हिम्मत चाहिए
अजीत पवार ने कहा कि चंद्रकांत पाटील और शंभुराज देसाई ये दो मंत्री कर्नाटक में जाएंगे, ऐसा वैâबिनेट में कहा गया था और अब कदम पीछे ले लिया है? वहां के मुख्यमंत्री का बयान आने के बाद आप ने उन्हें ‘अरे को क्या रे’ जवाब दिया? ऐसा तीखा सवाल अजीत पवार ने किया। इससे पहले छगन भुजबल वेश बदलकर कर्नाटक गए थे। जिसे जाना है वो वैâसे भी जा सकता है। इसके लिए हिम्मत चाहिए। राजनीतिक इच्छाशक्ति चाहिए, ऐसे खड़े बोल अजीत पवार ने इस दौरान कहे।

प्रकाश आंबेडकर से चर्चा सकारात्मक
वंचित बहुजन आघाड़ी के अध्यक्ष एडवोकेट प्रकाड आंबेडकर के साथ हुई चर्चा के संदर्भ में उद्धव ठाकरे से पत्रकारों ने प्रश्न पूछा, जिस पर उन्होंने कहा कि आंबेडकर से चर्चा सकारात्मक रही है। आगे जाकर कोई अड़चन न आए इसलिए कुछ बारीक विषयों पर विचार जारी है। यह काम जल्द-से-जल्द पूरा होगा। महाविकास आघाड़ी की स्थापना करते समय भी हमारे बीच कई बैठकें हुई थीं। लेकिन प्रकाश आंबेडकर इस आघाड़ी में आना चाहते हैं, ऐसा उद्धव ठाकरे ने कहा।

मोर्चा से जनता का असंतोष व्यक्त होगा
विधान मंडल में कांग्रेस के गटनेता बालासाहेब थोरात ने कहा कि राज्य में शिंदे सरकार आने के बाद से लगातार महाराष्ट्र की अवहेलना हो रही है। यह अवहेलना सामान्य आदमी बर्दाश्त नहीं करेगा। लोगों में प्रचंड असंतोष व्याप्त है। यह असंतोष मोर्चा में व्यक्त होनेवाला है। महाराष्ट्र को नुकसान पहुंचानेवाला वक्तव्य कर्नाटक के मुख्यमंत्री देते हैं और हमारे मुख्यमंत्री उन्हें जवाब तक नहीं दे पाते। यह सरकार महाराष्ट्र की अस्मिता को नहीं बचा सकती है तो इसे सत्ता छोड़ देनी चाहिए। मोर्चा के माध्यम से ऐसी चेतावनी दी जाएगी।

यह मोर्चा किसलिए है?
• राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी और भाजपा नेताओं ने छत्रपति शिवाजी महाराज,
• महात्मा फुले व सावित्रीबाई फुले का अपमान किया
• महाराष्ट्र में आनेवाले उद्योगों को गुजरात में स्थानांतरित किया
• विभाजन का बीज बोकर महाराष्ट्र के गांवों को उजाड़ने की भाजपा ने रची साजिश
• कर्नाटक के मुख्यमंत्री को जवाब नहीं देते मुख्यमंत्री ‘मिंधे’
• आम लोगों की कमर तोड़ रही है महंगाई
• बेरोजगारी से परेशान युवा भूमिपुत्र

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