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आइए देखते हैं उकाई जल काग के जरिए मछलियों को पकड़ते हैं जापानी मछुआरे

मनमोहन सिंह

रात के ८ बज रहे हैं… जापान की नागरा नदी पर नौकाएं तैर रही हैं। नौकाएं पर्यटकों से भरी हैं। नौकाओं के पास मशालें जल रही हैं। अंधेरे वातावरण में जलती हुई मशाल की परछाई से नदी के शांत वातावरण में हलचल सी मच जाती है। यह मछलियां हैं जो रोशनी से आकर्षित होकर जमा हो रही हैं। नौकाओं में रस्सी से जल काग बंधे हुए हैं। दर्जनों जल काग तेजी से उड़ते हैं और पानी में डाइव करते हैं। कुछ समय के बाद उन्हें खींच लिया जाता है। सारे के सारे जल काग नौका के बीच बने डेक पर खड़े हैं। उनकी चोंच में मछलियां हैं और मछुआरे उनकी चोंच से मछलियां निकालकर जमा कर रहे हैं। जल काग द्वारा मछलियों को पकड़ना ‘उकाई’ कहलाता है, जो जापान की एक प्राचीन परंपरा है और उकाई देखने को यहां पर पर्यटकों की भीड़ जमी है।

एक जमाने में मछुआरे इस परंपरागत तरीके से मछलियां पकड़ते थे, लेकिन समय के साथ-साथ यह परंपरा लुप्त होती जा रही है। पर्यावरण में होनेवाले बदलाव का असर नदियों पर भी पड़ा है। पानी अपेक्षाकृत गर्म होने लगा है, जिसकी वजह से मछलियां कम होती जा रही है। अब उकाई परंपरा सिर्फ कुछ लोगों तक ही सीमित है और इसका उपयोग पर्यटन का मनोरंजन करने के लिए किया जा रहा है। इस शो को देखने के लिए १,८०० यान चुकाने पड़ सकते हैं।

लगभग १,३०० वर्षों से जापान में जल काग के जरिए मछलियां पकड़ी जाती रही हैं। यह मछली पकड़ने का एक पारंपरिक तरीका है, जो चीन से आता है। वास्तव में, मछुआरे जल काग को पालते और प्रशिक्षित करते हैं, ताकि वे उनके लिए मछलियां पकड़ सकें। मछुआरे जल काग के गले में इतनी कसकर रस्सी बांधते हैं कि पक्षी बड़ी मछली को नहीं, बल्कि छोटी मछली को निगल सके। यह परंपरा जापान में चीन से आई है। जल काग मछली पकड़ने का काम अंधेरे में किया जाता है। मछुआरे को नाव के सामने आग जलानी पड़ती है, जिससे मछलियां प्रकाश की ओर आकर्षित होती हैं और फिर पक्षी मछली को अपने गले में पकड़ लेता है। जब मछली जल काग के खांचे में होती है, तो मछुआरा अपने पक्षी को रस्सी से बांधकर नाव पर लाता है और पक्षी मछली उगल देता है।

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