मुख्यपृष्ठनमस्ते सामनासंपादक के नाम पत्र: भुखमरी के कगार पर बूट पॉलिश वाले

संपादक के नाम पत्र: भुखमरी के कगार पर बूट पॉलिश वाले

किसी हट्टे-कट्टे व्यक्ति को अगर कोई भी इंसान भीख मांगता हुआ देख ले तो उसके मन में तुरंत ये खयाल आता है कि कोई काम-धंधा करने की बजाय ये आदमी भीख क्यों मांग रहा है। लेकिन रेलवे स्टेशनों पर कड़ी मेहनत यानी लोगों का बूट पॉलिश कर अपने परिवार का पेट भरनेवाले सैकड़ों बूट पॉलिश करनेवालों को रेलवे स्टेशनों से भगा दिया गया है, जिसकी वजह से कठिन मेहनत कर अपने परिवार का पेट पालनेवाले ये बूट पॉलिश वाले भुखमरी के कगार पर पहुंच गए हैं। मौजूदा स्थिति यह है कि मशक्कत कर अपने परिवार का पेट पालने वाले ये बूट पॉलिश वाले दर-दर भटक रहे हैं। कहीं रेलवे सुरक्षा बल तो कहीं स्थानीय निकाय का पथ निर्मूलन विभाग उन्हें खदेड़ रहा है। उनसे बचने के लिए बूट पॉलिश वाले पॉलिश का डिब्बा लेकर इधर-उधर भाग रहे हैं। ठाणे से कर्जत, कसारा मार्ग पर उपनगरीय रेलवे स्टेशनों पर बूट पॉलिश कर अपने परिवार को पालने वाले बूट पॉलिश वालों पर इन दिनों भूखों मरने की नौबत आ गई है। इसकी वजह है कि १ फरवरी से कानूनी अड़चनों को लेकर रेलवे ने स्टेशन के अंदर इनके बैठने पर बंदिश लगा दी है। एक तरफ सरकार लोगों को नौकरी दिला पाने में फेल हो रही है तो वहीं दूसरी तरफ इस तरह कड़ी मेहनत कर अपने परिवार का पेट पालनेवालों को वो बेरोजगार बनाने में लगी है। ठाणे के आगे के स्टेशनों पर दुर्घटनाग्रस्त घायलों अथवा मृतकों को अस्पताल पहुंचाने का काम भी ये बूट पॉलिश वाले करते थे। आज बूट पॉलिश वालों को स्टेशनों से हटाए जाने से लौहमार्ग पुलिस सहित बूट पॉलिश वालों से अपना बूट पॉलिश करवाने वाले उपनगरीय रेलवे के यात्री परेशान हैं। रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों को चाहिए कि वे बूट पॉलिश वालों को जल्द से जल्द न्याय दिलवाएं।
– सुरेश जाधव, अंबरनाथ

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