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संपादक के नाम पत्र : खस्ता हाल चीता कैंप, कहीं टूटी हैं टाइल्स तो कहीं पड़े हैं गड्ढे

ट्रॉम्बे चीता कैंप की गलियों की हालत बहुत खराब हो गई है। कई बार शिकायत करने के बावजूद कोई बदलाव नहीं आ रहा है। इसीलिए `दोपहर का सामना’ में इस पत्र के माध्यम से मैं प्रशासन का ध्यान इस ओर आकर्षित करना चाहता हूं। कई बार हमने शिकायत की है कि चीता कैंप की सभी गलियों की हालत खराब है। किसी गली में टाइल्स टूटे हुए हैं,  तो कहीं गड्ढे पड़ गए हैं। कहीं पानी की समस्या है तो कहीं कई जगहों पर कीचड़ और गंदगी का अंबार है। ऐसा ही कीचड़ और गंदा पानी यहां के डी सेक्टर में देखने को मिल रहा है। यहां पर आप लोगों की परेशानी दिखाई देगी। कीचड़ और गंदगी की वजह से यहां पर चलना -फिरना मुश्किल हो गया है। इसकी शिकायत के बाद भी यहां कोई पूछने तक नहीं आता है और न ही कोई यहां किसी की सुध लेने आता है। मनपा एम-पूर्व वॉर्ड के अधिकारी यहां किसी का कोई बांधकाम शुरू है तो तुरंत पहुंच जाते हैं, लेकिन गलियां खराब है। पानी बह रहा है या कोई और दिक्कत है तो कोई देखने तक नहीं आता है। लोगों को कहना है कि अगर हम पत्र भी दें तो कोई सुनवाई होती नहीं होती। पत्र सिर्फ डिस्पैच में पड़ा रह जाता है। न कोई पूछने आता है और न कोई हमसे बात करने आता है। डी सेक्टर की इन गलियों में कई लोग फिसलकर गिर चुके हैं। छोटे-छोटे बच्चे, महिलाएं यहां से आती-जाती हैं, ऐसे में कभी भी को बड़ा हादसा हो सकता है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों से भी शिकायत की जा चुकी है, लेकिन कोई आगे नहीं आ रहा है। मेरी प्रशासन से विनती है कि इस पर ध्यान दें और हमारी समस्या को हल करें, ताकि यहां बच्चे निश्ंिचत होकर खेल सकें और बड़े-बूढ़े यहां से आवागमन कर सकें।
-सोहेल शेख, चीता कैंप  

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