मुख्यपृष्ठनमस्ते सामनासंपादक के नाम पत्र : शिंदे सरकार ध्यान किधर है?

संपादक के नाम पत्र : शिंदे सरकार ध्यान किधर है?

मुंबई की महानगरपालिका पूरे देश की सबसे अमीर महानगरपालिका मानी जाती है, जिसका बजट कई राज्यों के बजट से भी ज्यादा है। पता चला है कि मुंबई शहर हिंदुस्थान को सबसे ज्यादा टैक्स देनेवाला शहर माना जाता है। मुंबई शहर में आम जनता को सुविधाएं प्रदान करने और उनकी देखभाल करने के लिए महानगरपालिका और महाराष्ट्र सरकार की जिम्मेदारी बनती है लेकिन जिस हिसाब से मुंबई की जनता मुंबई महानगरपालिका और सरकार को टैक्स देती है, उस हिसाब से मुंबई में व्यवस्थाएं बहुत ही कम हैं। आम जनता को मूलभूत सुविधाएं भी पूरी तरह से नहीं दी जा पा रही है। झोपड़पट्टियों में यह हालात और भी बदतर हैं। प्राय: देखा जाता है कि मुंबई की सड़कों पर और रेलवे के डिब्बों में बुजुर्ग व्यक्ति एवं महिलाएं भिक्षा मांगते दिखाई देते हैं। कुछ बुजुर्ग ऐसे होते हैं, जो चलने फिरने में भी सक्षम होते हैं। अगर उनके परिवार के लोगों ने बुजुर्गों को घर से बाहर निकाल दिया है तो यह सरकार की जिम्मेदारी बनती है कि उनकी व्यवस्था करे। ऐसे लोगों की स्थिति को देखकर मन व्यथित हो जाता है। हर साल सरकार बड़े-बड़े दावे करती है कि बुजुर्ग व्यक्तियों की देखभाल के लिए अमुक बजट का आवंटन किया गया है, लेकिन सरकार की इस कार्यप्रणाली का जमीनी स्तर पर कुछ भी नजर नहीं आता है। महाराष्ट्र सरकार से निवेदन है कि मुंबई की सड़कों पर लावारिस की तरह पड़े वृद्धों और बेसहारा लोगों की मदद करने के लिए कोई एक अच्छी सी योजना बनाए, ताकि उनका बुढ़ापा भी कट सके। देश की आर्थिक राजधानी में बुजुर्गों की ऐसी दशा देखकर वर्तमान समाज और सरकार के ऊपर शर्मिंदगी सी महसूस होती है।
अंजु रस्तोगी, चीराबाजार

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