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इस्लामी देश में कठिन हुई जिंदगानी; भूख से मर रहे ९९ % अफगानी!

  • तालिबान ने किया दाने-दाने को मुहाल संयुक्त राष्ट्र ने की दुनिया से मदद की अपील

सामना संवाददाता / नई दिल्ली
इस्लामी देश अफगानिस्तान में जिंदगी कठिन हो गई है। यहां ९९ फीसदी अफगानी ऐसे हैं, जो भूख से मर रहे हैं, जिन्हें तालिबान ने दाने-दाने के लिए मुहाल कर दिया है। यहां के हालात श्रीलंका से भी बदतर हो गए हैं। ऐसे में यदि हालात में जल्द सुधार नहीं हुआ तो यह और ज्यादा भी बिगड़ सकते हैं। वहीं संयुक्त राष्ट्र ने दुनिया से मानवीय मदद की अपील की है। बताया गया है कि ३.९० करोड़ लोगों को तुरंत रोटी चाहिए।
तालिबान की अफगानिस्तान सरकार में एंट्री के बाद से ही दुनियाभर के कई देशों की ओर से अफगानिस्तान को मिलनेवाली आर्थिक मदद पर रोक लगी हुई है, जिसका असर अफगानिस्तान पर बड़े स्तर पर देखने को भी मिल रहा है। करीब ६० लाख अफगान लोग भुखमरी की कगार पर हैं, जबकि करीब ३.९० करोड़ लोगों को मानवीय (रोटी) मदद की दरकार है। इसके साथ ही बड़ी संख्या में बच्चे कुपोषण के शिकार हैं, जिनकी मदद न मिलने पर मौत हो सकती है। संयुक्त राष्ट्र की मानवीय मामलों की एजेंसी के प्रमुख मार्टिन ग्रिफिथ्स ने संयुक्त राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद में सभी दाताओं से आग्रह करते हुए कहा कि अफगानिस्तान के विकास को लेकर रोकी गई फंडिंग को फिर शुरू कर दिया जाए।
चारों ओर संकट ही संकट
मार्टिन ग्रिफिथ्स ने बताया कि अफगानिस्तान कई तरह के संकटों से जूझ रहा है, जिसमें मानवीय, आर्थिक, क्लाइमेट, भूख और वित्तीय संकट शामिल हैं। उन्होंने आगे कहा कि आनेवाले सर्दी के मौसम को देखते हुए अफगानिस्तान की तुरंत ७७० मिलियन डॉलर की मदद की जानी चाहिए। विवाद, गरीबी, क्लाइमेट और खाने का संकट काफी समय से अफगानिस्तान की दुखद सच्चाई रही है। लेकिन वर्तमान में अफगानिस्तान की विकास सहायता के रुक जाने से और ज्यादा संकट बढ़ गया है। गरीबी का संकट और ज्यादा गहराता जा रहा है और जनसंख्या में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। उन्होंने कहा कि हालात को देखते हुए हमे कुछ डेवलेपमेंट सपोर्ट देना फिर शुरू कर देना चाहिए।
तत्काल चाहिए ६१४ मिलियन डॉलर
मार्टिन ने आगे कहा कि सर्दियों के आने से पहले ही अफगानिस्तान के लिए ६१४ मिलियन डॉलर की तत्काल जरूरत है। इस फंड से अफगानिस्तान में लोगों के शेल्टरों को रिपेयर और अपग्रेड किया जाना है। साथ ही जरूरतमंद लोगों को गर्म कपड़े और कंबल भी दिए जाने हैं। इसके साथ ही सर्दी शुरू होने से पहले ही कई इलाकों में खाने और अन्य चीजों की सप्लाई के लिए १५४ मिलियन डॉलर की अलग जरूरत है। मार्टिन ने कहा कि अफगानिस्तान में ७० फीसदी से ज्यादा लोग ग्रामीण क्षेत्रों में रहते हैं। उन्होंने चेताते हुए कहा कि अगर खेती और पशुधन उत्पादन को सुरक्षित नहीं किया गया तो लाखों जिंदगियां खतरे में आ जाएंगी।

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