जीवन की सीख

दूर जा कर भी मेरे करीब हो
तुम
अजनबी नहीं तुम तो मेरे लिए पहचाना हुआ एक खास एहसास हो तुम
खुली आंखों से देखा ऐसा ख्वाब हो तुम
आज दूरी बहुत हो गई है
पर हम तुम्हें अपने करीब ही पाते हैं
जब भी तुम्हारी यादों के साये में हम खो जाते हैं
एक अलग सा नजरिया एक सम्मान भाव जो तुम्हें
हमारे करीब लाता है
भूल कर भी हम तुम्हें भूल नहीं पाते हैं
कितनी बातें हैं,
कितनी यादें सब वह ख्वाबों में रोज याद आती है
इतना रुला रुला कर हमें जाते हो तुम
पर क्या करें हम तो यूं ही जी रहे हैं
तेरी यादों के साये में,
तनहाई तो जरूर है पर एक एहसास भी कि तू आयेगा और
फिर से खुशियां आएंगी,
देखते हैं कितने दिन और गम का साया रहता है
यह फिर ऐ काले बादल रहते हैं
फिर नया आसमान हो जाएगा
हम तो सब सहते हुए
तेरे लिए जी रहे है पर तू ना जाने कहां खो गया हमें अकेला छोड़कर।
किस्मत का यहां खेल भी बड़ा निराला होता है
सुखों की मस्त जिंदगी में
दुखों का वह पहाड़ भी खड़ा रहता है
इंतजार में कब इंसान इसकी धुंध में आयेगा
पर हम तो वह है जो दुःखी होकर कर भी
लड़ाई जिंदगी से कर लेंगे
दुख के उस पहाड़ पर भी
सुखों की हरियाली से
से वातावरण में
सकारात्मक ऊर्जा भर देंगे
जिंदगी के इस उतार चढ़ाव से सीख लेते हुए
आगे बढ़कर अपना नया जीवन आरम्भ कर देंगे। पर तू हमें याद हर वक्त आयेगा ।।
हरिहर सिंह चौहान,
इंदौर, मध्य प्रदेश

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