मुख्यपृष्ठधर्म विशेषजीवन-दर्पण : गायत्री मंत्र का जाप बढ़ाता है आत्मबल!

जीवन-दर्पण : गायत्री मंत्र का जाप बढ़ाता है आत्मबल!

  • डॉ. बालकृष्ण मिश्र

शिक्षा में परिश्रम बहुत समय से कर रहा हूं लेकिन सफलता नहीं मिल रही है, क्या कारण है? 
-प्रभाकर पांडेय
(जन्मतिथि- १० नवंबर १९८८, समय- रात्रि ९.५५ बजे, स्थान- जौनपुर, यूपी)
प्रभाकर जी, आपका जन्म  कर्क  लग्न एवं वृश्चिक राशि में हुआ है। आपकी कुंडली  का सूक्ष्म अवलोकन किया गया तो यह समझ में आ रहा है कि लग्नेश चंद्रमा नीच राशि का है। अत: समय-समय पर आपका आत्मबल भी कम हो जाता होगा। आपकी कुंडली  में पंचमेश एवं कर्मेश मंगल भाग्य भाव में बैठकर आपको भाग्यशाली तो बनाया ही है तथा कर्मेश मंगल भाग्य भाव में बैठकर पराक्रम भाव एवं सुख भाव को पूर्ण दृष्टि से देख रहा है। कहीं-न-कहीं प्रशासनिक सेवा का अवसर तो प्राप्त कराएगा लेकिन द्वितीय भाव में बैठा केतु कभी-कभी आपको भ्रम की स्थिति में भी डाल देता है। राहु एवं केतु देखने से यह समझ में आ रहा है कि आपकी कुंडली  में कालसर्प योग भी बना रहा है। इस योग के कारण आपको धन के लिए संघर्ष करना पड़ता होगा, परेशानियां, खर्च की बाहुल्यता, स्वास्थ्य भी नरम-गरम रहता होगा। धन की प्राप्ति के लिए किए गए प्रयासों में सफलता नहीं मिलती होगी। शिक्षा का भी पूर्ण फल प्राप्त नहीं हो पा रहा है। आप एक कुलीन एवं धर्म में विश्वास बनाए रखनेवाले हैं। शनि के द्वारा शुभ फल प्राप्त करने के लिए प्रतिदिन हनुमान जी का दर्शन एवं हनुमान चालीसा का ३ पाठ जरूर करें। आपकी कुंडली  में चंद्र भी नीच राशि का है चंद्रमा से शुभ फल प्राप्त करने के लिए मोती धारण करना आवश्यक है क्योंकि चंद्रमा लग्नेश नीच राशि का होता है, तो आत्मबल में कमी भी लाता है। आपकी कुंडली में सूर्य नीच राशि का है। सूर्य से शुभ फल प्राप्त करने के लिए सूर्य को प्रतिदिन जल देना चाहिए और प्रतिदिन गायत्री मंत्र का जाप करें। ऐसा करने से आपकी स्मरणशक्ति में वृद्धि होगी और आपके आत्मबल में भी तेजी आएगी। जीवन के एवं शिक्षा के पूर्ण फल को प्राप्त करने के लिए मूंगा एवं पुखराज रत्न भी आपको धारण करना चाहिए तथा किसी योग्य आचार्य के द्वारा कालसर्प योग की पूजा जरूर कराएं तभी हर प्रकार के विकास का मार्ग प्रशस्त होगा।
मेरी राशि क्या है, मेरी कुंडली  में दोष क्या है?
-सूरज सिंह
(जन्मतिथि- १० जुलाई १९९३, समय- रात्रि ९.३० बजे, स्थान- प्रतापगढ़, यूपी)
सूरज जी, आपका जन्म मीन लग्न एवं मीन राशि में हुआ है। आपकी कुंडली  में सप्तम भाव पर मंगल बैठा है। अत: आपकी कुंडली  मांगलिक है। सप्तम भाव में मंगल बैठ करके लग्न को भी पूर्ण दृष्टि से देख रहा है और द्वितीय भाव को भी पूर्ण दृष्टि से देख रहा है। अत: ये आपको क्रोधी के साथ-साथ जिद्दी भी बनाएगा। अपने विवाह से पहले मंगल चंडिका स्तोत्र का पाठ किसी योग्य आचार्य से जरूर कराएं तभी आपका दांपत्य जीवन सुखमय हो पाएगा, नहीं तो आपका किसी-न-किसी प्रकार से नुकसान भी होता रहेगा। आपकी कुंडली  का सूक्ष्म अवलोकन करने पर यह समझ में आ रहा है कि आपकी कुंडली में कालसर्प योग भी बना हुआ है। इस योग के कारण आपको अपने परिश्रम का पूर्ण पारिश्रमिक भी नहीं प्राप्त होता होगा। लग्नेश लग्न में बैठ करके आपके आत्मबल को सफल बनाया है। लेकिन शिक्षा एवं बुद्धि का स्वामी बुध अस्त होकर के छठे भाव में बैठा जो आपके लिए हानिकारक है और विस्तार को गहराई से जाने के लिए संपूर्ण जीवन और उपयुक्त उपाय करके जीवन के मार्ग प्रशस्त करें।
मेरी राशि क्या है और समय कैसा  चल रहा है?
सतीश गुजराल
(जन्मतिथि- ५ मार्च १९७८, समय- दिन में २.०० बजे, स्थान- अंधेरी, मुंबई)
सतीश जी, आपका जन्म मिथुन लग्न और मकर राशि में हुआ है। आपकी कुंडली  में लग्न में मंगल बैठा है। अत: आपकी कुंडली मांगलिक है लेकिन लग्न में ही बृहस्पति ने बैठकर उसके प्रभाव को कम कर दिया। आपकी कुंडली  के सूक्ष्म अवलोकन से लग्नेश बुध अस्त हो करके भाग्य भाव में बैठा है। जो समय-समय पर आपका आत्मबल भी कम कर देता होगा। आपकी कुंडली  में कालसर्प योग भी है। कालसर्प योग के कारण जीवन की पूर्णता विकास को नहीं प्राप्त कर पा रहे हैं। कालसर्प योग की पूजा कराएं एवं पन्ना रत्न धारण करें। जीवन की संपूर्ण गहराई को जानने के लिए संपूर्ण जीवन दर्पण बनवाएं।
मेरी राशि क्या है और विवाह क्यों नहीं हो रहा है उपाय बताएं?
राकेश झा
(जन्मतिथि- १७ जनवरी १९७८, समय- रात्रि १.३०बजे, स्थान- मुंबई)
राकेश जी, आपका जन्म तुला, लग्न एवं मेष राशि विवाह जीवनसाथी का विचार सप्तम भाव से किया जाता है। सप्तम भाव का स्वामी मंगल नीच राशि का होकर सप्तम भाव को कमजोर बना दिया तथा लग्न का स्वामी शुक्र भी अस्त है। आपकी कुंडली  को सूक्ष्मता से देखा गया तो समझ में यह आ रहा है कि आपकी कुंडली में कालसर्प योग भी विद्यमान है। जीवन की संपूर्ण गहराई को जानने के लिए संपूर्ण जीवन दर्पण बनवाएं तथा कालसर्प योग की पूजा कराएं एवं मंगलचंडिका का स्तोत्र पाठ कराएं। इस समय आपकी कुंडली  में मंगल की महादशा चल रही है। अत: आप पन्ना एवं ओपल धारण करें। उपर्युक्त उपाय कराएं विवाह का मार्ग प्रशस्त हो सकता है।

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