मुख्यपृष्ठराशि-भविष्यजीवन-दर्पण : पन्ना रत्न बनाता है बुध ग्रह को मजबूत!

जीवन-दर्पण : पन्ना रत्न बनाता है बुध ग्रह को मजबूत!

 डॉ. बालकृष्ण मिश्र

गुरु जी, मेरा अच्छा दिन कब आएगा और कुंडली में दोष क्या है, उपाय बताएं? – नितिन पटेल
(जन्मतिथि- २० सितंबर १९७२, समय- प्रात: ६.५० बजे, स्थान- बड़ोदरा, गुजरात)
नितिन जी, आपका जन्म कन्या लग्न एवं मकर राशि में हुआ है। मकर राशि पर शनि की साढ़ेसाती चल रही है। आपकी कुंडली का गहराई से अध्ययन किया गया। सुख भाव में राहु के साथ बृहस्पति बैठकर चांडाल योग बना दिया है तथा कर्म भाव पर केतु बैठकर शंखपाल नामक कालसर्प योग बना दिया है। इन योगों के कारण जीवन का सुख प्राप्त करने में अनेक प्रकार की बाधाएं आती हैं। अपने ही आदमी जिस पर आप ज्यादा भरोसा करते हैं, वही आपके साथ विश्वासघात कर बैठता है। दिमागी परेशानी एवं तनाव की स्थिति बनी रहती है। इस समय शनि की महादशा में केतु का अंतर चल रहा है, जो आपके अनुकूल  नहीं है। शंखपाल नामक कालसर्प योग की पूजा वैदिक विधि से कराएं, आपके जीवन में धीरे-धीरे सुधार आ जाएगा। शनि की साढ़ेसाती से शुभ फल प्राप्त करने के लिए प्रत्येक दिन कम-से-कम ३ बार हनुमान चालीसा का पाठ करें। जीवन की अन्य गहराइयों को जानने के लिए संपूर्ण जीवन दर्पण बनवाएं।
मेरी कुंडली में दोष क्या है। मैं कमाता हूं पर पैसा नहीं बचा पा रहा हूं।’

अनुकूल  शादी भी नहीं हो पा रही है। कोई उपाय बताएं? – निशांत यादव
(जन्मतिथि- २६ दिसंबर १९९३, समय- प्रात: ५.१५ बजे, स्थान- इलाहाबाद)
निशांत जी, आपका जन्म वृश्चिक लग्न एवं वृष राशि में हुआ है। लग्न में राहु बैठकर समय-समय पर आपके आत्मबल को कमजोर बना रहा है। आपकी कुंडली में कालसर्प योग बना हुआ है। विकास में बाधा उत्पन्न हो रही है। पूजन कराना आवश्यक है। शुभ फल प्राप्त करने के लिए हनुमान चालीसा का पाठ एवं हनुमान जी का दर्शन करें। जीवन की अन्य गहराइयों को जानने के लिए संपूर्ण जीवन दर्पण बनवाएं।

मेरी कुंडली में दोष क्या है परेशानी कैसे हल होगी कोई उपाय बताएं? – पिंकू  देव
(जन्मतिथि- २९ अप्रैल १९७७, समय- १२.४५ बजे, स्थान- असम)
पिंकू देव जी, आपका जन्म कर्क  लग्न एवं सिंह राशि में हुआ है। लग्नेश चंद्रमा द्वितीय भाव में बैठकर आपके मन को समय-समय पर विचलित कर देता है क्योंकि लग्न में ही सप्तमेश एवं अष्टमेश होकर शनि बैठकर आपको जिद्दी बना दिया है। आपकी कुंडली का अच्छी प्रकार से अवलोकन किया गया। द्वितीयेश सूर्य उच्च राशि का होकर कर्म भाव में बुध के साथ में बैठकर बुधादित्य योग बनाया है। लेकिन राहु की पूर्ण दृष्टि कर्म भाव पर स्थित ग्रहों पर पड़ने के कारण बुधादित्य योग का भी पूर्ण फल नहीं प्राप्त कर पा रहे हैं। आपकी कुंडली में इस समय राहु की महादशा में शनि का अंतर चल रहा है। इस कारण से शुभ फल प्राप्त नहीं हो पा रहा है। ग्रहण योग की पूजा वैदिक विधि से कराएं, धीरे-धीरे विकास का मार्ग प्रशस्त हो जाएगा। जीवन की अन्य गहराइयों को जानने के लिए संपूर्ण जीवन दर्पण बनवाएं।

मेरी पढ़ाई ठीक से नहीं चल रही है, क्या करूं निर्देश करें? – राहुल भोसले
(जन्मतिथि- १६ अप्रैल २००१, समय-दिन में ९.३५ बजे, स्थान- विलेपार्ले, मुंबई)
राहुल जी, आपका जन्म मिथुन लग्न में एवं मकर राशि में हुआ है। आपकी राशि पर इस समय शनि की साढ़ेसाती भी प्रारंभ हो गई है। शनि की साढ़ेसाती व्यक्ति को हानि भी करवाती है तथा व्यक्ति अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करने से कतराते भी हैं। आपकी कुंडली का गहन अध्ययन किया गया। लग्न में बैठे राहु व्यक्ति को दिशाहीन बना देता है तथा लग्नेश बुध भी आपका अस्त होकर पिता के स्थान यानी आपके कर्म स्थान पर नीच राशि का होकर बैठा है। ‘राहु दोषं बुधो हन्यात’ इस नियम के आधार पर वर्तमान में आपको बुध ग्रह को ताकत देने के लिए पन्ना रत्न धारण करना चाहिए। शनि के दुष्प्रभाव को कम करने के लिए पीपल के पेड़ की परिक्रमा, दीपदान एवं हनुमान चालीसा का पाठ करना आवश्यक माना जाता है। परिक्रमा करते समय ‘ओम पिप्पलाश्रय संस्थिताय नम:’ जरूर बोलना है। परिक्रमा कम-से-कम ७ मिनट होनी चाहिए। जीवन के संपूर्ण रहस्य को जानने के लिए संपूर्ण जीवन दर्पण बनवाएं। धीरे-धीरे समय अनुकूल  हो जाएगा।

गुरु जी, मेरे जीवन में किस प्रकार विकास होगा, उपाय बताएं? – विजय जायसवाल
जन्मतिथि- २४ मई १९८२, समय- १७.२५ बजे, मुंबई)
विजय जी, आपका जन्म तुला लग्न एवं वृष राशि में हुआ है। आपकी कुंडली  में पराक्रम भाव पर केतु एवं भाग्य भाव पर राहु बैठकर भाग्य ग्रहण दोष एवं पितृ दोष भी बना रहा है। इन दोषों के कारण आपके हर कार्य में अनेक प्रकार की असुविधाएं भी आती हैं। भाग्येश बुध आपकी कुंडली में अस्त होकर अष्टम स्थान पर बैठा है, जिससे दुर्भाग्य योग भी पैदा कर रहा है। आपको बुध ग्रह को मजबूत करने के लिए पन्ना रत्न धारण करना होगा। जीवन में विकास को अवरोध करनेवाले ग्रहों की पूजा करवाएं, धीरे-धीरे आपका विकास प्रारंभ हो जाएगा।

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