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जीवन-दर्पण : ‘मंगल चंडिका स्तोत्र’ का पाठ कराएं अनुकूल जीवन साथी पाएं!

  •  डॉ. बालकृष्ण मिश्रा

गुरु जी, कार्यों में अपेक्षित परिणाम नहीं मिल पा रहा है। कुंडली में दोष क्या है, कोई उपाय बताएं? – राहुल तिवारी
(जन्मतिथि- ६ जून १९७३, समय- दोपहर २.१० बजे, स्थान- बस्ती, यूपी)
राहुल जी, आपका जन्म कन्या लग्न एवं कन्या राशि में हुआ है। लग्नेश एवं कर्मेश स्वगृही होकर भाग्येश शुक्र के साथ में कर्म भाव पर बैठकर आपको पुरुषार्थी, कर्मठी और भाग्यशाली तो बनाया है लेकिन सुख भाव में राहु एवं कर्म भाव में केतु बैठकर `शंखपाल नामक कालसर्प योग’ बना दिया है। इसी के कारण जीवन में उतार-चढ़ाव बना रहता है। इस योग के कारण सुख, वाहन, नौकर-चाकर एवं निवास स्थान को लेकर परेशानी बनी रहती है। कभी-कभी जीवन साथी के साथ भी वैचारिक मतभेद होते रहते हैं। व्यवसाय में भी नुकसान की संभावना बनी रहती है। आप जिस पर ज्यादा भरोसा करते हैं, वही आपके साथ विश्वासघात करता है। अपेक्षित परिणाम प्राप्त करने के लिए `शंखपाल कालसर्प योग’ की वैदिक विधान से आपको पूजन कराना आवश्यक है। जीवन की अन्य गहराइयों को विस्तार से जानने के लिए संपूर्ण जीवन दर्पण बनवाएं।

गुरु जी, मेरी शादी कब तक होगी? क्या कुंडली में कोई दोष है, यदि दोष है तो उपाय बताएं? – मोहन यादव
(जन्मतिथि- ६ फरवरी १९९०, समय- रात्रि ४.५५ बजे, स्थान- गुजरात)
मोहन जी, आपका जन्म धनु लग्न एवं मिथुन राशि में हुआ है। आपकी कुंडली का अच्छी प्रकार से अवलोकन किया गया। लग्न में ही शुक्र, बुध, शनि एवं मंगल बैठे हुए हैं। लग्न में ही मंगल के साथ में शनि बैठकर आपको डबल मांगलिक बना दिया है। विवाह का समय तो चल ही रहा है लेकिन लग्न में ही मंगल और शनि बैठने के कारण आप अपने जीवन साथी का चयन नहीं कर पा रहे हैं क्योंकि आपकी राशि पर शनि की ढैया भी चल रही है। अनुकूल जीवन साथी भी प्राप्त नहीं कर पा रहे हैं। अनुकूल जीवन साथी प्राप्त करने के लिए आपको वैदिक विधि से मांगलिक दोष से शुभ फल प्राप्त करने के लिए `मंगल चंडिका स्तोत्र’ का पाठ कराना आवश्यक है। यदि कराएंगे तो अनुकूल जीवन साथी १७ जनवरी, २०२३ के बाद प्राप्त होने का संकेत मिल रहा है। पूजन जरूर कराएं, तभी दांपत्य जीवन में मधुरता आएगी यदि नहीं कराएंगे तो दांपत्य जीवन अनुकूल नहीं चल पाएगा। जीवन की अन्य गहराइयों को जानने के लिए संपूर्ण जीवन दर्पण बनवाएं।

गुरु जी, बच्चे की तबीयत ठीक नहीं रहती है, कोई उपाय बताएं? – आयुष यादव
(जन्मतिथि- १६ सितंबर २०१५, समय- दिन में ५.५५ बजे, स्थान- गुजरात)
आयुष जी, अगर नक्षत्रों के माध्यम से देखा जाए तो आपका जन्म अश्विनी नक्षत्र के तृतीय चरण में हुआ है। २७ नक्षत्रों में अश्विनी नक्षत्र भी मूलसंज्ञक नक्षत्र कहा जाता है। इस नक्षत्र में जन्म लेना दोषपूर्ण माना जाता है। लग्न के आधार पर अगर आपकी कुंडली का विचार किया जाए तो आपका जन्म तुला लग्न एवं मेष राशि में हुआ है। सप्तम भाव पर चंद्रमा बैठकर के `बालारिष्ट योग’ बना दिया है, जो जन्म बाद बार-बार दुष्परिणाम देता रहेगा। आपकी कुंडली में अष्टम भाव पर मंगल बैठकर आपको मांगलिक भी बना दिया है। सर्वप्रथम चांदी का चंद्रमा बनवाकर बच्चे को सोमवार के दिन पहनाएं तथा मां के द्वारा प्रदोष व्रत रखा जाए एवं वैदिक विधि से बालारिष्ट योग की पूजा कराई जाए। जीवन को विस्तार से जानने के लिए संपूर्ण जीवन दर्पण बनवाएं।

गुरु जी, मेरी शादी निश्चित क्यों नहीं हो पा रही है, कोई उपाय बताएं? – सूरज पंचोली
(जन्मतिथि- २१ मई १९८५, समय- दिन में ११.५५ बजे, स्थान- फलोदी, राजस्थान)
सूरज जी, आपका जन्म कर्क लग्न एवं वृष राशि में हुआ है। आपकी कुंडली का गहन अध्ययन किया। यह समझ में आ रहा है कि विवाह का कारक ग्रह बृहस्पति एवं शुक्र होता है। आपकी कुंडली में बृहस्पति सप्तम भाव पर नीच राशि का होकर बैठा है। इस योग के कारण अनुकूल पत्नी का प्राप्त न होना तथा बार-बार किसी-न-किसी कारण असुविधा आती है। ज्योतिष शास्त्र में इस योग को बताया है कि `स्थान हानि करो जीव:’ अर्थात बृहस्पति जिस स्थान पर रहता है उस स्थान को कमजोर बना देता है। शनि संबंध बनाने में अड़चन भी डालता है। गहराई से देखा जाए तो आपकी कुंडली में चंद्र मांगलिक भी है। शनि का उपाय कराएं, विवाह का मार्ग प्रशस्त हो जाएगा। जीवन की अन्य गहराइयों को जानने के लिए संपूर्ण जीवन दर्पण भी बनवाएं।
ग्रह-नक्षत्रों के आधार पर आपको देंगे सलाह। बताएंगे परेशानियों का हल और आसान उपाय। अपने प्रश्नों का ज्योतिषीय उत्तर जानने के लिए आपका अपना नाम, जन्म तारीख, जन्म समय, जन्म स्थान मोबाइल नं. ९२२२०४१००१ पर एसएमएस करें। उत्तर पढ़ें हर रविवार…!

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