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मोदी‘राज’ में आम आदमी का जीना मुहाल… बैंक लॉकर हुआ महंगा, ग्राहकों ने कर ली तौबा!

३६ फीसदी यूजर्स ने किया गुडबॉय
लोग बैंक में पैसे इसलिए जमा करते हैं, ताकि वह सुरक्षित रहे। इसके साथ ही बैंक ने लोगों के आभूषणों और जरूरी कागजातों के लिए लॉकर्स की व्यवस्था कर रखी है। इन लॉकर्स को किराए पर लेकर लोग उनमें अपना कीमती सामान आदि रखते हैं। इसके लिए बैंक ग्राहकों से किराया वसूलते हैं। मगर अब यहां भी संकट उत्पन्न हो गया है। बैकों के ये लॉकर्स महंगे हो गए हैं। इसका परिणाम यह हुआ है कि काफी लोग अब बैंक लॉकर्स से तौबा कर रहे हैं।
दरअसल, बैंक में सुरक्षित लॉकर के लिए नए नियम एक जनवरी २०२४ से लागू हो रहे हैं। इससे पहले बैंक ग्राहकों को कागजी कार्रवाई के लिए जरूरी केवाईसी डॉक्‍यूमेंट के साथ ब्रांच बुला रहे हैं। एक सर्वे के अनुसार, काफी लॉकर होल्डर्स बढ़ी हुई परेशानियों और चार्ज बढ़ने के कारण इसे बंद करने के बारे में सोच रहे हैं। ‘लोकल सर्कल्स’ के सर्वे के मुताबिक, काफी लोग लॉकर बंद करने का पैâसला भी कर चुके हैं। कुछ ग्राहक ऐसे भी हैं, जो लॉकर का साइज कम करने की योजना भी बना रहे हैं। आरबीआई के अनुसार, ग्राहकों को ३१ दिसंबर तक लॉकर के लिए अपने बैंक के साथ नए एग्रीमेंट पर साइन करने होंगे। लॉकर फीस में इजाफा होने के कारण पिछले तीन सालों में सर्वे में शामिल ५६ फीसदी लॉकर होल्‍डर्स ने या तो इसे छोड़ दिया है या जल्द बंद करने की सोच रहे हैं। कुछ बैंक ग्राहक या छोटे आकार के लॉकर में स्थानांतरित होने की योजना बना रहे हैं। सर्वे के मुताबिक, जब लोगों से यह पूछा गया कि वे ऐसा क्यों कर रहे हैं? तो ज्यादातर का जवाब था कि बैंक केवाईसी के बहुत सारे डॉक्यूमेंट्स मांग रहे हैं और लगातार लॉकर में रखने के लिए रेंट बढ़ाते जा रहे हैं। लोकल सर्किल का यह सर्वे देश के २१८ जिलों में किया गया था। इसमें २३,००० लोग शामिल हुए थे। इस सर्वे में पता चला कि पिछले दिनों ३६ फीसदी यूजर्स ने बैंक लॉकर बंद कर दिए, जबकि १६ फीसदी यूजर्स ज्यादा रेट के साथ पेमेंट कर रहे हैं। १६ फीसदी यूजर्स छोटे साइज के लॉकर में ट्रांसफर हो जाएंगे। नए एग्रीमेंट के तहत कंटेंट और सेफ सामान रखने के लिए बैंकों की जिम्मेदारी को फिर से समझाया गया है। बैंक अब पट्टेदार के रूप में काम करते हैं और ग्राहक उसे लीज पर लेता है। इसके लिए एक कॉन्ट्रैक्ट होता है, जिसमें अधिकार, ड्यूटी, लॉकर रेंट और अन्य आवश्यक चीजों के बारे में बताया जाता है। लापरवाही के कारण होने वाले नुकसान के लिए बैंक की देनदारी सालाना लॉकर रेंट से १०० गुना तक हो सकती है।

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