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मामा के राज में हथेली पर जान! …पढ़ाई के लिए रोज पार करते हैं उफनती नदी

हरदा। भाजपा शासित राज्य मध्य प्रदेश में नेताओं की मनमानी व हिलाहवाली के चलते कई बच्चों की जान पर बन आई है। हरदा जिले के वनांचल में स्कूल जाने वाले बच्चों की कष्ट भरी हकीकत सामने आई है। जिले के आदिवासी क्षेत्र राजाबरारी में कई गांव के स्कूली बच्चे रोज खतरों से खेलते हुए उफनती गंजाल नदी को पार कर स्कूल जाने को मजबूर  हैं।

इस इलाके के मारपाडोह, महगांव, सालय, साहबनगर, टेमरूबहार, मोगराढाना जैसे करीब 12 गांव के 70 से ज्यादा स्कूली बच्चे बोरी गांव के सरकारी हायर सेकंड्री स्कूल में पढ़ने जाते हैं। बीच में पहाड़ी गंजाल नदी का रपटा पड़ता है, जो पूरी बारिश में डूबा रहता है। क्षेत्र के ग्रामीण और बच्चे रोज इसी तरह नदी पार करते हैं। इस जगह बड़े पुल की मांग वर्षों से की जा रही है।

हरदा जिले के आदिवासी अंचल में बारिश किसी मुसीबत से कम नहीं होती है। अंचल के गांवों में रहनेवाले ग्रामीण और स्कूली बच्चे अपनी दैनिक जरूरतों को पूरा करने के लिए रोज खतरों का सामना करते हैं। वो बारिश के मौसम में अपनी जान जोखिम में डालकर उफनती नदी पार करते हैं। एक तरफ ये मजबूरी है तो दूसरी तरफ आगे बढ़ने का जज्बा जो स्कूली बच्चों को रोज स्कूल जाने के लिए प्रेरित करता है। राजबरारी इलाके के कई गांव के बच्चे पढ़ाई के लिए रोज इस तरह जान की बाजी लगाते हैं।

नदी पार स्कूल
बोरी में हायर सेकेंड्री स्कूल है। इसलिए 10 किमी के क्षेत्र में बसे गांवों के बच्चे इसी स्कूल में पढ़ने आते हैं। शासन ने क्षेत्र में दो जगह 12वीं तक के स्कूल खोले हैं। पहला बोरी में दूसरा कायदा गांव में, लेकिन मुसीबत दोनों जगह है। बच्चों को और ग्रामीणों को दोनों जगह ही इसी तरह नदी पार जाना पड़ता है। स्कूल में पढ़नेवाली छात्राएं कहती हैं पानी कम होने पर किसी के सहारे पार होते हैं। ज्यादा होने पर तैरकर जाना होता है। इस स्थान पर बड़ा पुल बनना चाहिए।

नहीं सुन रहे नेता
राजाबरारी क्षेत्र की दूरी जिला मुख्यालय से लगभग 70 किमी है। वन क्षेत्र में कई ऐसे रपटे हैं, जो बारिश में पूरे समय डूबे रहते हैं। इलाके के ग्रामीण भी लंबे समय से गंजाल नदी के डोलाडोह रपटे पर पुल बनाने की मांग कर रहे हैं। पर नतीजा कुछ नहीं हुआ।

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