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मरने के बाद दे गई ७ लोगों को जिंदगी! अंगदान कर गई ‘ब्रेन डेड’ बहादुर महिला

  •  मौत से पहले की थी अंगदान की ख्वाहिश

धीरेंद्र उपाध्याय / मुंबई
मुंबई के नानावटी अस्पताल में भर्ती एक ५७ वर्षीय इंजीनियर महिला को चिकित्सकों ने ब्रेन डेड घोषित कर दिया। ये महिला मरने के बाद भी सात लोगों को नई जिंदगी दी है। हालांकि महिला ने १८ साल पहले ही मौत के बाद अंगदान करने की ख्वाहिश की थी। इसके लिए उन्होंने बाकायदा पंजीयन भी कराया था। फिलहाल इस इच्छा का सम्मान करते हुए परिजनों ने महिला के दिल, किडनी, लीवर, अग्नाशय, कॉर्निया और बोन्स को दान किया।
पालघर जिले के विरार में रहने वाली ५७ वर्षीय महिला को २२ अगस्त को बड़े पैमाने पर इंट्राक्रैनिल रक्तस्राव का सामना करना पड़ा। ऐसे में उन्हें मुंबई के नानावटी मैक्स सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इस बीच तेजी से रक्तस्राव के चलते महिला को अपरिवर्तनीय मस्तिष्क क्षति का सामना करना पड़ा। काफी प्रयासों के बावजूद चिकित्सक महिला को नहीं बचा सके और ब्रेन डेड घोषित कर दिया।
अंगदान के लिए परिवार से किया गया संपर्क
महिला के ब्रेन डेड घोषित किए जाने के बाद अस्पताल के प्रत्यारोपण समन्वयक ने परिवार से संपर्क किया। महिला ने ब्रेन डेड होने की स्थिति में साल २००४ में अपने सभी अंगों को दान करने का संकल्प लिया था। उनकी इच्छा का सम्मान रखते हुए परिवार ने सभी अंगों को दान करने की सहमति दी।
इन अस्पतालों में हुआ अंगदान
नानावटी अस्पताल की तरफ से बताया गया कि ऑर्गन फेलियर के लास्ट स्टेज से गुजर रहे दो मरीजों में लीवर और किडनी ट्रांसप्लांट हुआ। जिस ४३ वर्षीय मरीज में किडनी ट्रांसप्लांट हुआ है, वह मरीज पिछले छह साल से डायलिसिस पर था। इसी तरह एक ६८ वर्षीय लीवर की बीमारी गैर-अल्कोहल स्टीटोहेपेटाइटिस से पीड़ित था। साथ ही यह बीते दो सालों से अधिक समय से प्रतीक्षा सूची में शामिल था। इसके अलावा ज्यूपिटर अस्पताल में हार्ट ट्रांसप्लांट किया गया। दूसरी किडनी और अग्नाशय को परेल स्थित ग्लोबल अस्पताल में भर्ती एक मरीज में प्रत्यारोपित किया गया। नोवो टिश्यू बैंक एंड रिसर्च सेंटर ने अस्थि दान स्वीकार किया, जबकि बच्चूअली चैरिटेबल ऑप्थेलमिक और ईएनटी अस्पताल को कॉर्निया दिया गया।

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