मुख्यपृष्ठटॉप समाचारराजकोट की तरह मुंबई में भी मॉल बन सकते हैं काल!

राजकोट की तरह मुंबई में भी मॉल बन सकते हैं काल!

-‘हादसे के वक्त कैसे बाहर निकलें’ पब्लिक को पता नहीं

सामना संवाददाता / मुंबई

राजकोट के गेमिंग जोन में हुए हादसे ने मुंबई के मॉल्स की ओर भी लोगों का ध्यान आकृष्ट किया है। सवाल है कि क्या यहां सुरक्षा के व्यापक प्रबंध किए गए हैं। इस संबंध में जब दोपहर का सामना ने कल शहर के कुछ मॉल्स का जायजा लिया तो आम लोगों की यही राय थी कि राजकोट की तरह मुंबई में भी मॉल बन सकते हैं काल। अगर वैसा हादसा हुआ तो कई लोगों की जानें जा सकती हैं। दरअसल, यहां पब्लिक को पता ही नहीं है कि हादसे के वक्त उन्हें वैâसे बाहर निकलना है। न ही मॉल्स में इस तरह की कोई सूचना लोगों को दी जाती है।
बता दें कि गुजरात के मॉल में आग की घटना के बाद अब मुंबई सहित आस पास के परिसरों के मॉल के गेमिंग जोन की सुरक्षा को लेकर सवाल उठने लगे हैं। बता दें कि मुंबई के ड्रीम्स मॉल में दो साल पहले २५ मार्च २०२२ को आग लग गई थी। तब इस मॉल की तीसरी मंजिल पर बने सनराइज अस्पताल के कोविड वार्ड में आग लगी थी, जिसमें ११ लोगों की मौत हो गई थी। उस घटना के बाद से ही इस मॉल को बंद कर दिया गया था। उक्त मॉल में कई अवैध निर्माण किए गए थे। इसी तरह दिसंबर २०२३ में मालाड के एक शॉपिंग सेंटर में आग लगी थी। उस समय आग में ४० लोग फंस गए थे, जिन्हें काफी मशक्कत के बाद अग्निशमन दल बाहर निकालने में सफल हुआ था।
मॉल के फायर फाइटिंग सिस्टम को करो दुरुस्त!…मुंबई के २९ मॉल्स को फायर ब्रिगेड ने दी थी नोटिस

मुंबई के कई मॉल्स में अवैध निर्माण किए गए हैं। ऐसे में वहां भी हादसे हो सकते हैं। कल जब यह संवाददाता मुंबई के कुछ मॉल्स में गया तो पता चला कि वहां गेमिंग जोन में इमरजेंसी मार्ग की सूचना का बोर्ड नहीं लगाया गया है। इस कारण राजकोट जैसी घटना होने पर यहां भी वैसे हादसे हो सकते हैं। पता चला है कि गत वर्ष मुंबई के ७५ मॉल्स की जांच के बाद २९ मॉल को ‘जे फॉर्म नोटिस’ दिया गया था, जिसके बाद उन्हें फायर सिस्टम दुरुस्त करने की चेतावनी दी गई थी।
बता दें कि हर बार आग लगने की घटना के बाद प्रशासन नींद से जागकर कार्रवाई शुरू करता है, लेकिन कुछ समय बाद वापस वही होता है। मुंबई के एक मशहूर मॉल में परिवार के साथ आए दीपक दुबे ने बताया कि मॉल में आपातकालीन मार्ग की जानकारी हर जगह होनी चाहिए। यहां गेमिंग जोन में आपातकालीन मार्ग की जानकारी नहीं है। उसमें सुधार किया जाना चाहिए। आम आदमी पार्टी के राज्य समन्वयक अभिषेक पांडेय ने सवाल किया कि फायर ब्रिगेड के अधिकारी किसके इशारे पर मॉल्स को एनओसी दे रहे हैं? इस दौरान यदि मॉल्स में कोई दुर्घटना होती है, तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? इसलिए राज्यभर के  मॉल्स  की जांच कर जहां सुरक्षा व्यवस्था की अनदेखी की गई हो, उसे तत्काल बंद किया जाए। उन्होंने कहा कि मुंबई के अधिकांश मॉल्स में अवैध निर्माण किया गया है। आग बुझाने के लिए मॉल्स में पर्याप्त व्यवस्था नहीं है, फिर भी उन्हें समय दिया जा रहा है। इन मॉल्स के खिलाफ तुरंत कार्रवाई करते हुए सील कर देना चाहिए। फायर सेफ्टी सिस्टम दुरुस्त करने के बाद ही उन्हें खुलने की अनुमति मिलनी चाहिए। फायर ब्रिगेड के अधिकारी मॉल मालिकों को बचाने का काम कर रहे हैं। ऐसे फायर ब्रिगेड अधिकारियों के खिलाफ भी मामला दर्ज होना चाहिए। मुंबई के नागपाड़ा में पिछले साल आग लगने से करोड़ों रुपए की संपत्ति जलकर खाक हो गई। बाद में जांच करने पर पता चला कि यहां अवैध निर्माण हुआ था, फायर सेफ्टी सिस्टम ही नहीं था। यदि फायर ब्रिगेड ने पहले ही जांच कर अग्निसुरक्षा से जुड़े मानकों का पालन करवाया होता, तो ऐसी दुर्घटनाओं से बचा जा सकता था। मनपा को इस संबंध में कोई ठोस नीति बनानी चाहिए, जिससे आग की दुर्घटना के बाद जांच में फॉल्ट पाए जाने के बाद फायर ब्रिगेड को भी दोषी ठहराया जा सके। अग्निशमन दल के अधिकारी पुरुषोत्तम जाधव ने बताया कि शहर के मॉल्स की हर छह महीने में जांच की जाती है। उनसे बी फॉर्म लिया जाता है जिसमें सुरक्षा से जुड़ी सभी जानकारियां ली जाती हैं। इसके साथ ही मॉल का ऑडिट किया जाता है। लापरवाही बरतने वाले मॉल को नोटिस देकर सुधार करने के लिए कहा जाता है। उसके बाद भी सुधार नहीं होने पर उनपर कार्रवाई की जाती है।
१० वर्षों में ५३,४५० स्थानों पर लगी आग
मुंबई में गगनचुंबी इमारतों का जाल है। मुंबई फायर ब्रिगेड ने आरटीआई कार्यकर्ता शकील अहमद शेख को सूचित किया है कि पिछले १० वर्षों में मुंबई में ५३,४५० आग लगने की घटनाएं हुई हैं। ये आकंड़ा २०१३ से २०२३ तक का है।  इसमें १,५६८ गगनचुंबी इमारतों का समावेश है।
-शहर के मॉल्स की हर छह महीने में जांच की जाती है। उनसे ‘बी’ फॉर्म लिया जाता है जिसमें सुरक्षा से जुड़ी सभी जानकारियां ली जाती हैं। इसके साथ ही मॉल का ऑडिट किया जाता है। लापरवाही बरतने वाले मॉल को नोटिस देकर सुधार करने के लिए कहा जाता है। उसके बाद भी सुधार नहीं होने पर उनपर कार्रवाई की जाती है। -पुरुषोत्तम जाधव, अग्निशमन दल
मुंबई के अधिकांश मॉल्स में अवैध निर्माण किया गया है। आग बुझाने के लिए कई मॉल्स में पर्याप्त व्यवस्था नहीं है, फिर भी उन्हें समय दिया जा रहा है। इन मॉल्स के खिलाफ तुरंत कार्रवाई करते हुए सील कर देना चाहिए। फायर सेफ्टी सिस्टम दुरुस्त करने के बाद ही उन्हें खुलने की अनुमति मिलनी चाहिए।

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