मुख्यपृष्ठनए समाचारसुस्त सिस्टम से कुत्ते बने शेर! ...प्रतिदिन १२१ को श्वानदंश

सुस्त सिस्टम से कुत्ते बने शेर! …प्रतिदिन १२१ को श्वानदंश

देश में स्वान दंश यानी कुत्तों द्वारा इंसानों को काटना एक गंभीर समस्या बन गई है। पिछले कुछ महीनों में नोएडा से लेकर आगरा, लखनऊ में कुत्तों के द्वारा बड़ी-बड़ी घटना सामने आई। अब उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गृहक्षेत्र गोरखपुर के लोग इस समस्या से कुछ ज्यादा ही त्रस्त हैं। यहां प्रशासनिक उपेक्षा और सुस्ती के कारण कुत्ते शेर बन गए हैं, जिसका खामियाजा बेकसूर जनता भुगत रही है। हालात की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि यहां प्रतिदिन करीब १२१ लोग श्वान दंश (कुत्ते के काटे जाने) के कारण जिला अस्पताल में इंजेक्शन लगवाने पहुंच रहे हैं। बताया जा रहा है कि गोरखपुर जिले में सिर्फ नवंबर महीने के १७ दिन में करीब २०६५ लोगों को स्ट्रीट डॉग ने अपना शिकार बनाया लेकिन आवारा कुत्तों को पकड़ने के लिए नगर निगम और नगर पंचायत स्तर पर कोई इंतजाम नहीं किया गया है। इतना ही नहीं कई बार जिला अस्पताल में वैक्सीन के खत्म होने के कारण पीड़ितों को प्राइवेट अस्पतालों में ३ हजार रुपए तक खर्च करना पड़ता है। जिला अस्पताल के एसआईसी डॉक्टर राजेंद्र ठाकुर स्वीकार करते हैं कि स्ट्रीट डॉग के मामले पहले के मुकाबले बढ़े हैं और कभी-कभी वैक्सीन की शॉर्टेज भी महसूस होती है। ऐसे में मुख्यालय को जानकारी भेजकर वैक्सीन मंगानी पड़ती है।

संसद से शीर्ष अदालत तक उठा मुद्दा
गौरतलब हो कि यह मुद्दा संसद के सदन से शीर्ष अदालत तक में उठ चुका है। इसी साल २२ जुलाई तक देशभर में पशुओं के काटने की १४,५०,६६६ घटनाओं का आंकड़ा सरकार ने लोकसभा में दिया था। हालांकि २६ जुलाई को देशभर में कुत्तों के काटने की घटनाओं का ब्यौरा जब सदन में पूछा गया तो सरकार ने अपने आंकड़ों में विशेष तौर पर कोई संख्या नहीं बताई। बीते सितंबर महीने में सुप्रीम कोर्ट ने कुत्तों के काटने की घटनाओं पर चिंता जताई थी और इसका उपाय निकालने की बात कही थी। तो अक्टूबर महीने में सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय पशु कल्याण बोर्ड को देशभर में पिछले सात वर्षों में कुत्तों के काटने की घटनाओं, इसकी वजह से हुई मौतों और इसे रोकने के लिए उठाए गए कदमों पर आंकड़े पेश करने का निर्देश दिया था।

 

 

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