मुख्यपृष्ठसमाचारकान खोलकर सुन लो जनाब... गोरे होने की जिद करवा देगी किडनी...

कान खोलकर सुन लो जनाब… गोरे होने की जिद करवा देगी किडनी खराब!

धीरेंद्र उपाध्याय / मुंबई

अधिकांश लोग सुंदर दिखने और गोरा होने के लिए कई तरह के हथकंडे अपनाते हैं। इसके लिए वे किसी भी हद तक जा सकते हैं। इसी चक्कर में बाजार में उपलब्ध कई तरह के फेयरनेस क्रीम का भी बेधड़क इस्तेमाल करते हैं, जिनमें कई तरह के विषैले तत्व होते हैं। ऐसे में कभी-कभी फेयरनेश क्रीम लगाने की आदत खतरनाक साबित हो जाती है। कई मामलों में तो किडनियां तक खराब हो जाती हैं। इसी तरह के दो मामले मुंबई में सामने आए हैं, जिसमें उनकी किडनियां खराब हो गर्इं। हालांकि, चिकित्सकों के प्रयासों के बाद वे फिर से स्वस्थ्य हो सके हैं। इसलिए चिकित्सकों ने सलाह दी है कि इस तरह के प्रोडक्ट को खरीदने से पहले विशेषज्ञों की राय जरूर लें।
बता दें कि कई लोग गोरा दिखने के लिए फेयरनेस क्रीम का उपयोग करते हैं। इसका इस्तेमाल करते समय इन उत्पादों के हानिकारक प्रभावों को अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है। इसी तरह फेयरनेश क्रीम के इस्तेमाल ने दो लोगों की किडनियों को खराब कर दिया, जिससे उन्हें कई बीमारियों ने घेर लिया। जानकारी के अनुसार २४ वर्षीय नमिता शिंदे (बदला हुआ नाम) आठ महीने से अधिक समय से स्थानीय डॉक्टरों द्वारा बताई गई हर्बल फेयरनेस क्रीम का उपयोग कर रही थीं। इसी तरह ५६ वर्षीय रमेश मोरे (बदला हुआ नाम) भी पिछले ३-४ महीने से हर्बल फेयरनेस क्रीम का उपयोग कर रहे थे, लेकिन कुछ समय बाद उनके शरीर पर सूजन आ गई। मरीज की बिगड़ती सेहत को देखकर परिवारवालों ने उन्हें नई मुंबई के मेडिकवर अस्पताल में भर्ती कराया। नेप्रâोलॉजी और किडनी प्रत्यारोपण विभाग के प्रमुख डॉ. अमित लंगोटे ने कहा कि शुरुआत में मरीजों के शरीर में सूजन और मूत्र में बड़ी मात्रा में प्रोटीन पाया गया। त्वचा को गोरा करनेवाली क्रीमों में पाए जाने वाले जहरीले पदार्थ के कारण उनकी किडनी की बायोप्सी में झिल्लीदार नेप्रâोपैथी का पता चला, जो एनईएल-१ एंटीजन (वैंâसर या भारी धातुओं से जुड़े) के लिए सकारात्मक थे।
क्रीम में पारे का होता है उच्च स्तर
डॉ. लंगोटे ने कहा कि महिला मरीज का एनईएल-१ एंटीजन टेस्ट पॉजिटिव आया और उसने बताया कि वह अपने स्थानीय डॉक्टर द्वारा बताई गई विदेशी फेयरनेस क्रीम का इस्तेमाल कर रही थी। इससे उसके खून में पारा बढ़ गया। फिलहाल, मरीज का इलाज चल रहा है। इन मरीजों का समय रहते इलाज होने के कारण उनकी सेहत सुधर रही है। बहुत से लोग ऐसी फेयरनेस क्रीम का उपयोग करते हैं जो एफडीए द्वारा मंजूर हैं। क्रीम में पारा का उच्च स्तर होता है, जो त्वचा में मेलानोसाइट्स को प्रभावित करता हैं। फेयरनेस उत्पादों का उपयोग करना सेहत के लिए हानिकारक है।
कॉस्मेटिक उत्पादों पर सख्त नियमों की जरूरत
दोनों मरीजों में जल्दी बीमारी का पता चलने और समय पर इलाज शुरू होने से भविष्य की जटिलताओं को रोका गया। डॉ. अमित लंगोटे ने कहा कि मरीजों की इस स्थिति को देखते हुए कॉस्मेटिक उत्पादों पर सख्त नियमों को लागू करने की आवश्यकता है।

अन्य समाचार