मुख्यपृष्ठधर्म विशेषभगवान भोलेनाथ की बरसेगी कृपा: जीवन में शिव ही शिव होगा!

भगवान भोलेनाथ की बरसेगी कृपा: जीवन में शिव ही शिव होगा!

हिंदू कैलेंडर  के अनुसार आषाढ़ महीने में कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि मासिक शिवरात्रि होती है। इस साल आषाढ़ माह की मासिक शिवरात्रि आज मनाई जाएगी। भगवान भोलेनाथ को समर्पित ये तिथि शिव भक्तों के लिए विशेष महत्व रखती है। माना जाता है कि प्रत्येक शिवरात्रि पर विधिपूर्वक व्रत और पूजन करने से भगवान शिव अपने भक्तों के सभी कष्टों को दूर करते हैं और सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं। जो मासिक शिवरात्रि का व्रत विधि-विधान से रखता है, उस पर भगवान शिव की कृपा बरसती है और जीवन में शिव ही शिव होता है। जीवन में सुख-शांति, समृद्धि, संतान प्राप्ति के लिए भी मासिक शिवरात्रि का व्रत रखा जाता है। इंसानी जीवन में रोगों से मुक्ति के लिए भी मासिक शिवरात्रि का व्रत रखा जाता है।
पूजा विधि
मासिक शिवरात्रि के दिन भगवान शिव और मां पार्वती की विधिवत पूजा करें। इस दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर सभी कामों से निवृत्त होकर स्नान आदि करके साफ-सुथरे कपड़े पहन लें। इसके बाद अगर आप व्रत रख रहे हैं तो शिव जी का मनन करते हुए व्रत का संकल्प लें। दिनभर भगवान शिव के मंत्र ‘ॐ नम: शिवाय:’ का जाप करते रहें। अब घर में ही भगवान शिव की विधिवत पूजा करें। भगवान शिव को फूल, माला, सफेद, चंदन, अक्षत आदि चढ़ाने के साथ कुछ मीठे का भोग लगा लें। घी का दीपक और धूप जलाकर शिव चालीसा, शिव मंत्रों का जाप करके आरती कर लें। आप चाहे तो इस दिन मंदिर जाकर शिवलिंग का दूध अभिषेक या फिर जलाभिषेक कर सकते हैं। शिवलिंग का गंगाजल, दूध, शक्कर, दही, शहद आदि से अभिषेक करें। इसके बाद बेलपत्र, धतूरा, आक का फूल  आदि चढ़ा दें। अब शिवलिंग पर चंदन, अक्षत आदि चढ़ाएं। अंत में भोग लगाने के साथ धूप-दीपक करके भगवान शिव का आशीर्वाद लें।
पूजा मुहूर्त
मासिक शिवरात्रि के दिन सुबह और शाम में पूजा की जा सकती है। हालांकि, रात्रि प्रहर की पूजा के लिए खास मुहूर्त देखना अनिवार्य होता है। रात्रि प्रहर की पूजा का शुभ मुहूर्त देर रात १२ बजकर ४ मिनट से १२ बजकर ४४ मिनट तक है। रात्रि प्रहर में भगवान शिव की उपासना के लिए ४० मिनट का समय शुभ है।

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