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सूंघने की क्षमता खोना, बड़े खतरे की आहट! गंभीर बीमारी का है संकेत, अध्ययन में हुआ खुलासा

सामना संवाददाता / मुंबई
लोगों में सूंघने की क्षमता खोने का मतलब यह है की वे गंभीर बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। ऐसे में इस समस्या से जूझनेवालों को सतर्क होने की जरूरत है। हाल ही में हुए एक अध्ययन में यह पाया गया है कि यदि किसी व्यक्ति की सूंघने की क्षमता प्रभावित हो रही है तो उसे अल्जाइमर और डिमेंशिया की बीमारी हो सकती है। सूंघने की वैâपेसिटी खोना डिप्रेशन का भी एक संकेत हो सकता है। अमेरिका में जॉन हॉपकिंस मेडिसिन के साइंटिस्ट द्वारा किए गए एक अध्ययन में पाया गया है कि व्यक्ति की सूंघने की क्षमता जितनी ज्यादा खराब होती है, उसका मानसिक स्वास्थ्य भी उतना ही खराब होता है। हालांकि ऐसा नहीं है कि सूंघने की क्षमता कमजोर पड़ने से डिप्रेशन का खतरा रहता है। लेकिन इतना जरूर है कि ये किसी के डिप्रेशन में होने का संकेत हो सकता है।
असामान्य लक्षण हो तो डॉक्टर की लें मदद
प्रोफेसर कामथ के मुताबिक, सूंघने की क्षमता का खोना अल्जाइमर और पार्किंसन जैसी न्यूरोडीजेनेरेटिव डिजीज की शुरुआत होने का वार्निंग हो सकता है। पीड़ित लोग जितनी जल्दी डॉक्टर से मदद लेंगे, उतनी ही जल्दी उन्हें ठीक होने में मदद मिलेगी। ऐसे बहुत से लोग हैं जो डिप्रेशन से जूझ रहे होते हैं लेकिन डॉक्टर से मदद नहीं लेते। डॉक्टर के पास जाने में देरी करने पर आपकी जान खतरे में पड़ सकती है।
बुजुर्गों पर हुआ अध्ययन
शोध में शामिल प्रोफेसर विद्या कामथ के मुताबिक, सूंघने की शक्ति खोना हमारे स्वास्थ्य को कई मायनों में प्रभावित करता है। अगर आप कभी भी इस लक्षण को महसूस करते हैं, तो नजरअंदाज बिल्कुल न करें। इस स्थिति में बिना देर किए तुरंत डॉक्टर से अपनी जांच कराएं। अध्ययन ने इस संकेत को सूजन से भी जोड़ा है। आठ साल तक चले इस अध्ययन में २००० से ज्यादा बुजुर्गों ने हिस्सा लिया था।

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