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राजस्व का हो रहा नुकसान … जीएसटी बना जी का जंजाल!

पीएम के आर्थिक सलाहकार परिषद के चेयरमैन बिबेक देबरॉय की टिप्पणी

सामना संवाददाता / नई दिल्ली
हिंदुस्थान की जनता केंद्र सरकार की जीएसटी वसूली से परेशान है। जीएसटी के कारण आम आदमी से लेकर बड़े-बड़े व्यापारी की जेब ढीली हो रही है। ये जीएसटी सिर्फ नागरिकों का ही नुकसान नहीं कर रही है, बल्कि राजस्व का भी नुकसान हो रहा है। ऐसी टिप्पणी बिबेक देवरॉय ने की है।
प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (ईएसी-पीएम) के चेयरमैन बिबेक देबरॉय का कहना है कि सरकार को माल एवं सेवा कर (जीएसटी) के कारण राजस्व का नुकसान हो रहा है। इसे एक दर के साथ राजस्व तटस्थ होना चाहिए। एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा, हालांकि, जीएसटी से चीजें काफी आसान भी हुई हैं। देबरॉय ने कहा कि आदर्श जीएसटी वह है, जिसमें एक ही दर हो और इसका उद्देश्य राजस्व तटस्थ होना था। जीएसटी पहली बार लागू किया गया था तो औसत दर कम से कम १७ प्रतिशत होनी चाहिए थी, लेकिन मौजूदा दर ११.४ प्रतिशत है। ऐसे में जीएसटी से सरकार को राजस्व का नुकसान हो रहा है। उन्होंने कहा कि लोगों के साथ-साथ जीएसटी परिषद के सदस्य भी चाहते हैं कि २८ प्रतिशत कर की दर कम हो, लेकिन कोई भी नहीं चाहता कि शून्य और ३ प्रतिशत कर की दरें बढ़ें। ऐसे में हमारे पास कभी भी सरलीकृत जीएसटी नहीं होगा।
जीएसटी बिल अपलोड करने पर इनाम
मोबाइल ऐप पर जीएसटी बिल अपलोड कर एक करोड़ रुपए तक का पुरस्कार जीतने की योजना `मेरा बिल मेरा अधिकार’ ऐप एक सितंबर से शुरू होगी। यह ऐप आईओएस और एंड्रॉइड प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होगा। इसे पहले गुजरात, हरियाणा, असम, पुदुचेरी, दमन एवं दीव और दादरा नागर हवेली में शुरू किया जाएगा। केंद्रीय सीमा शुल्क एवं प्रत्यक्ष बोर्ड (सीबीआईसी) ने बताया, इसके तहत १० हजार से एक करोड़ रुपए तक का पुरस्कार मिलेगा। इससे ग्राहकों को खरीद पर जीएसटी बिल लेने के लिए प्रोत्साहित करना है। कम से कम खरीदी २०० रुपए होनी चाहिए। एक व्यक्ति महीने में अधिकतम २५ बिल अपलोड कर सकता है। बिल में विक्रेता का जीएसटीआईएन सहित अन्य जानकारी होनी चाहिए।

क्या है जीएसटी टैक्स
जीएसटी एक सामान्य परिकर या कर है, जो भारत सरकार द्वारा लागू किया गया है। यह कर भारत में बिक्री, वितरण और सेवाओं पर लागू किया जाता है और पूरे देश में एक ही अद्यतन किए गए कर प्रणाली को प्राथमिकता देता है। जीएसटी का मुख्य उद्देश्य भारत में अलग-अलग स्तरों पर लागू होने वाले करों को एक ही सामान्य कर सिस्टम में एकीकृत करना है। इससे कई प्रकार के करों के समापन से कारोबार परियोजना में आसानी हो जाती है और देशीय विकास को बढ़ावा मिलता है।

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