मुख्यपृष्ठग्लैमर‘प्यार बहुत जरूरी है!’ : आकांक्षा सिंह

‘प्यार बहुत जरूरी है!’ : आकांक्षा सिंह

फिल्म ‘बद्रीनाथ की दुल्हनियां’ से हिंदी फिल्मों में आगाज करनेवाली राजस्थान में जन्मी आकांक्षा सिंह साउथ की फिल्मों में काफी लोकप्रियता बटोर चुकी हैं। उनका टीवी शो ‘ना बोले तुम ना मैंने कुछ कहा’ काफी चर्चित रहा। अजय देवगन के साथ फिल्म ‘रन वे-३४’ में काम कर चुकी आकांक्षा वेब शो ‘रंगबाज-३’ से काफी सुर्खियां बटोर रही हैं। पेश है, आकांक्षा सिंह से पूजा सामंत की हुई बातचीत के प्रमुख अंश-

  • ‘रंगबाज-३’ को स्वीकारने की क्या वजह रही?
    ये शो बेहद पॉपुलर वेब शो बन चुका है। रोमांचक ढंग से लिखी गई इस कहानी में किरदारों को जिस तरह उभारा गया है, उससे मैं बेहद प्रभावित हुई। अक्सर अच्छे ढंग से किरदार शुरू तो हो जाते हैं लेकिन जैसे ही आगे बढ़ते हैं, किरदार का ट्रैक बिगड़ जाता है। खैर, मेरा किरदार एक साहसी लड़की का है, जिसके पिता वकील हैं।
  • क्या है किरदार?
    जैसा मैंने कहा, लड़की बहुत साहसी है। हर हालात में किसी से डरती नहीं। पिता के वकील होने के नाते उसने अपने परिवार से साहस और धैर्य सीखा। लड़की के जीवन में कई चुनौतियां आती हैं और वैâसे वो उनका सामना करती है यही कहानी की खास और अलग बात है।
  • को-एक्टरों के साथ आपकी वैâसी मेमरीज जुड़ी हैं?
    सिद्धार्थ मिश्रा द्वारा लिखित ‘रंगबाज-३’ को सचिन पाठक ने निर्देशित किया है। इस शो में अभिनेता विनीत कुमार मध्यवर्ती किरदार निभा रहे हैं। शूटिंग शुरू होने के पहले ही दिन वे सभी से घुल-मिल गए। मैं जब भी अकेली होती हूं, उस वक्त मुझे गुनगुनाने की आदत है। मेरे बगल की कुर्सी पर बैठते ही मजाक में विनीत कहते ‘आपने गाने का वॉल्यूम बढ़ाइए, ताकि सेट पर मौजूद कलाकारों के साथ ही टेक्नीशियन भी आपके गाने का आनंद उठा सकें। खैर, हम सबने परिवार की तरह काम किया।
  • आपने टीवी, ओटीटी और फिल्म के लिए भी काम किया है। आपकी पहली पसंद क्या है?
    टीवी पर मैंने अपने करियर की शुरुआत की। ओटीटी प्लेटफॉर्म को भी मैं बहुत पसंद करती हूं। सच कहूं तो हर माध्यम का अपना चार्म है। आप ओटीटी के जरिए दुनियाभर के घरों में एक मिनट में पहुंच पाते हैं। मैं इस बात को नहीं भूल सकती कि कोरोना के दौरान जब पूरी दुनिया घरों में बंद थी, उस समय ओटीटी प्लेटफार्म ने लोगों का मनोरंजन किया। मुझे ओटीटी, फिल्म और टीवी सब कुछ उतना ही पसंद है।
  • ‘रनवे-३४’ में आपके काम को देख अमिताभ बच्चन ने आपको फूल और अभिनंदन पत्र भेजा था?
    महानायक अमिताभ बच्चन जितने बड़े एक्टर हैं, उतने ही भले इंसान हैं। अपने साथी कलाकारों का उत्साह वे इस तरह बढ़ा देते हैं, जिससे अच्छा काम करने की प्रेरणा मिलती है। अमित सर का लेटर मिलना किसी बड़े पुरस्कार से कम नहीं। ‘रनवे-३४’ में काम करना एक बेहद खास अनुभव है और खूबसूरत यादों का पिटारा। अजय देवगन और अमिताभ बच्चन सदी के दो महान कलाकार। और क्या चाहिए? इन दोनों का साथ ही काफी है। अक्सर सपने साकार नहीं होते लेकिन मेरा यह सपना बहुत जल्द साकार हुआ।
  • आपको हिंदी और साउथ की फिल्मों में क्या फर्क नजर आया?
    पिछले ४-५ वर्षों से हिंदी और साउथ की फिल्मों का भेद काफी हद तक मिटता नजर आ रहा है। तापसी पन्नू हों या विद्या बालन सभी ने साउथ की फिल्मों में अपना बेहतर किरदार निभाया है। मुझे यह बताते हुए खुशी हो रही है कि मेरे करियर की पहली टायटल रोल वाली फिल्म साउथ की थी। मुझे साउथ में बहुत प्यार मिला। अच्छे रोल और दर्शकों का प्यार बहुत जरूरी है एक कलाकार को जिंदा रखने के लिए।

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