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विदेशी पर प्यार, स्वदेशी को मार!

– घरेलू ‘ईवी’ पर सब्सिडी खत्म कर ब्रिटिश कारों पर टैक्स घटाने की कवायद में मोदी सरकार

सरकार ने पहले कार और फिर ईवी बाइक्स से सब्सिडी खत्म करनी शुरू कर दी। ऐसे में स्वदेशी ईवी उद्योग संकट में आ गए। दूसरी तरफ अब खबर आ रही है कि सरकार आयातित ब्रिटिश ईवी कारों पर टैक्स घटाने की कवायद कर रही है।’
वायु में प्रदूषण बढ़ रहा है। बढ़ नहीं रहा बल्कि बहुत ज्यादा बढ़ चुका है। इससे हवा में सांस लेने में दिक्कत होने लगी है। और जो वरिष्ठ व बुजुर्ग हैं, उनके लिए तो यह काफी घातक होता जा रहा है। वायु में प्रदूषण बढ़ने का मुख्य कारण सड़कों पर बढ़ते बेतहाशा वाहन हैं। सिर्फ मुंबई में ही औसतन एक हजार नए वाहन रोजाना सड़कों पर उतर रहे हैं। कमोबेश दिल्ली, कोलकाता, चेन्नई समेत सभी प्रमुख शहरों का यही हाल है। इसलिए प्रदूषण की रोकथाम के लिए इलेक्ट्रिक वाहन यानी ईवी सबसे बढ़िया विकल्प के तौर पर उभरे हैं। हालांकि मोदी सरकार ने शुरू में तो इसे बढ़ावा देने के लिए खूब घोषणाएं की थीं पर अब वह पैर पीछे खींच रही है।
दलअसल, मोदी सरकार ने देश में ईवी (इलेक्ट्रिक वेहिकल) को बढ़ावा देने के लिए कई सहूलियतें देने की घोषणा की थी। इसमें सबसे प्रमुख थी सब्सिडी। इससे स्वदेशी ईवी खूब बिक रहे थे। तमाम तरह की कारों और बाइक्स से सड़कें पटने लगी थीं। मगर सरकार ने पहले कार और फिर ईवी बाइक्स से सब्सिडी खत्म करनी शुरू कर दी। ऐसे में स्वदेशी ईवी उद्योग संकट में आ गए। दूसरी तरफ अब खबर आ रही है कि सरकार आयातित ब्रिटिश ईवी कारों पर टैक्स घटाने की कवायद कर रही है। फिलहाल, ऐसी कारों पर ७० से १०० फीसदी टैक्स है, जिसे घटाकर २५ फीसदी कर दिया जाएगा। सरकार का यह फैसला नि:संदेह घरेलू उद्योगों के लिए ताबूत की आखरी कील साबित हो सकता है।
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, मुक्‍त व्‍यापार समझौते के तहत हिंदुस्थान सरकार इस साल के अंत तक कुछ ब्रिटिश ईवी पर इंपोर्ट टैक्‍स कम करने पर विचार कर रही है। केंद्र सरकार ब्रिटेन से सालाना ८०,००० डॉलर से अधिक कीमत वाले आयातित ईवी पर रियायती टैरिफ पर विचार कर रही है। रिपोर्ट के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके ब्रिटिश समकक्ष ऋषि सुनक ने पिछले महीने के अंत तक प्रâी ट्रेड डील को अंतिम रूप देने की उम्मीद की थी, अब जल्द ही इसकी घोषणा हो सकती है। इस संबंध में केंद्रीय वाणिज्‍य मंत्रालय ने कोई जवाब नहीं दिया, जबकि ब्रिटिश व्यापार विभाग के एक प्रवक्ता ने इस पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। उसका बहाना था कि बातचीत अभी चल ही रही है।
गौरतलब है कि हिंदुस्थान दुनिया का सबसे अधिक आबादी वाला देश बन गया है। यहां मिडिल और अपर क्लास के खरीदारों के बीच ईवी की मांग खूब बढ़ रही है। हालांकि, कारों की ऊंची कीमत, कम ऑप्‍शंस और चार्जिंग स्टेशनों की कमी के चलते देश में ईवी के बाजार में कमी आई है। ईवी सेगमेंट को लचीला करने से देश में स्‍वच्‍छ परिवहन में तेजी आ सकती है और वायु प्रदूषण पर भी नियंत्रण पाया जा सकता है। पिछले साल देश में ईवी की बिक्री ४९,८०० रही, जो कुल बिके ३८ लाख यात्री वाहन का महज १.३ फीसदी है।
टाटा मोटर्स टॉप पर
देसी बाजार में देश की सबसे ज्यादा बिकने वाली ईवी टाटा मोटर्स की ‘नेक्सॉन’ है, जिसकी कीमत १५ लाख रुपए से कम है। जर्मन लग्‍जरी ऑटोमेकर बीएमक्यू, मर्सिडीज-बेंज ग्रुप और वोक्सवैगन की ऑडी हिंदुस्थान में ८०,००० डॉलर, यानी ६६ लाख रुपए से ऊपर की ईवी बेचती हैं।

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