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शिवसैनिकों की निष्ठा भारी…भाड़े की भीड़ हारी!

सामना संवाददाता / मुंबई
बुधवार को मुंबई में दो-दो रैलियों के चलते खूब गहमा-गहमी थी। एक तरफ असली शिवसेना की दादर के शिवाजी पार्क में दशहरा रैली थी तो दूसरी तरफ नकली और ‘मिंधे’ गुट के गद्दारों की रैली बीकेसी में आयोजित थी। निष्ठावान शिवसैनिकों को बरगलाने का ‘मिंधे’ गुट ने पूरा प्लान बनाया था लेकिन शिवसैनिकों की निष्ठा उन्हें दादर के शिवाजी पार्क मैदान में ही लेकर आई। देश के कोने-कोने से निष्ठावान शिवसैनिक दादर में जमा हो रहे थे, जबकि गद्दारों के ‘मिंधे’ गुट की रैली से निष्ठावान शिवसैनिक बिल्कुल गायब थे। अपनी इज्जत बचाने के लिए ‘मिंधे’ गुट ने राज्य के बाहर गुजरात के सूरत, वलसाड से भी भाड़े पर लोगों को जमा किया। नागपुर सहित राज्य के अन्य शहरों से अलग-अलग क्षेत्र के लेबरों को भाड़े पर लाया गया। इसका जीता-जागता प्रमाण भी देखने को मिला। कई चैनलों पर रिपोर्टर ने जब लोगों से पूछा तो लोगों को खुद पता नहीं था कि वह कहां जा रहे हैं। बस मुंबई में कहीं मेला है। ‘मिंधे’ गुट ने अपनी रैली में आनेवालों के लिए खाने की उत्तम व्यवस्था की थी। फिर भी वहां लोग बहुत कम थे जबकि शिवसेना की रैली में आनेवाले लोग भाकरी और चटनी लेकर मुंबई पहुंचे थे। यहां शिवसैनिकों की निष्ठा ‘मिंधे’ गुट के भाड़े की भीड़ पर भारी साबित हुई।
‘मिंधे’ गुट की रैली में भीड़ कम
बीकेसी में ‘मिंधे’ गुट की रैली में भीड़ बहुत कम थी। किराए पर लाए गए लोग ही उस मैदान में दिख रहे थे। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि वहां आनेवालों के लिए खानपान की जबरदस्त व्यवस्था की गई थी। लगभग ढाई लाख फूड पैकेट बनाए गए थे लेकिन मात्र १० से १५,००० पैकेट खत्म हो पाए थे। बड़ी संख्या में लोग पहुंचे ही नहीं। फूड पैकेट खराब न हो इसलिए उसे उन लोगों में दो बार बांट दिया गया। कई समाचार चैनलों ने इस संबंध में खबर भी चलाई।
रूखी-सूखी रोटी लेकर पहुंचे निष्ठावान शिवसैनिक
निष्ठावान शिवसैनिक महाराष्ट्र ही नहीं, देश के कोने-कोने से दादर स्थित शिवाजी पार्क में शिवसेनापक्षप्रमुख उद्धव ठाकरे के विचारों का सोना लूटने के लिए जमा हुए थे। शिवसैनिक अपने खाने का सामान अपने साथ लेकर आए थे। एक तरफ ‘मिंधे’ गुट में फाइव स्टार होटल के खाने की व्यवस्था थी तो यहां शिवतीर्थ पर रैली में शिवसैनिक रूखी-सूखी रोटी और चटनी कपड़े में बांधकर मुंबई पहुंच रहे थे। एक महिला ने तो काफी सराहनीय काम किया। महिला रास्ते में पड़ाव पर अपनी टीम के लिए रोटी बनाते और उन्हें खिलाते आई। जहां-जहां उनका पड़ाव हुआ महिला ने रोटी बनाई। तीन पड़ाव के बाद वे मुंबई पहुंचे थे। इस संबंध में भी समाचार चैनलों ने उस महिला की पुâटेज दिखाई और उसकी निष्ठा की सराहना की।
शिवसैनिकों से भरी बसों को गुमराह करता रहा प्रशासन
मुंबई में शिवसेना की दशहरा रैली दादर के शिवाजी पार्क में होती है। हर वर्ष दशहरा के दिन होने वाली इस परंपरा में शामिल होने लाखों की संख्या में शिवसैनिक यहां जमा होते हैं। लेकिन शिवसेना से अलग हुए ‘मिंधे’ गुट ने भी खुद को शिवसेना बताने के लिए दशहरा के दिन ही बीकेसी में रैली का आयोजन किया। यहां दादर में शिवसेना की सभा में आनेवाले निष्ठावंत शिवसैनिकों की बसों को अधिकारी और पुलिस प्रशासन के कुछ लोग गुमराह कर रहे थे। ऐसा आरोप एक शिवसैनिक ने लगाया है। जब कई बस वाले दादर का रास्ता पूछते तो ड्यूटी पर तैनात कुछ अधिकारी उन्हें बीकेसी का रास्ता बता दे रहे थे। प्रशासन भी ‘मिंधे’ गुट की सरकार के साथ मिला हुआ था। प्रशासन के कुछ लोग दादर में शिवसैनिकों की भीड़ को कम करने के लिए शिवसैनिकों को गुमराह कर बीकेसी की ओर भेजने का काम कर रहे थे।
अमेरिका से आए शिवसैनिक अक्षय
इस साल शिवसेना की दशहरा रैली में विदेशों से भी लोग आए। शिवतीर्थ पर निष्ठा का सागर उमड़ा। इतना ही नहीं, सात समंदर पार अमेरिका से आए कट्टर शिवसैनिक अक्षय राणे ने भी रैली में शिवसेनापक्षप्रमुख उद्धव ठाकरे का भाषण सुना। अक्षय ने उनके भाषण को सोशल मीडिया पर लाइव कर वहां अमेरिका में बैठे उनके दोस्तों को भी दिखाया। उनकी इस निष्ठा की काफी सराहना की जा रही है। बता दें कि होटल मैनेजमेंट की नौकरी के लिए अमेरिका गए मीरा रोड के अक्षय राणे एक निष्ठावान शिवसैनिक हैं। हिंदूहृदयसम्राट शिवसेनाप्रमुख बालासाहेब ठाकरे को वे भगवान मानते हैं। उन्हें शिवसेनापक्षप्रमुख उद्धव ठाकरे पर बहुत भरोसा है। ‘मातोश्री’ निवासस्थान तो उनके लिए किसी मंदिर से कम नहीं है। शिवसेना से प्रेम करनेवाले अक्षय ने अपनी नौकरी के लिए दुबई, फ्रांस , रूस, इटली की यात्रा की और अब वे फ्लोरिडा में काम कर रहे हैं। सात समंदर पार होने के बावजूद शिवसेना और ठाकरे परिवार से उनका लगाव एक अंश भी कम नहीं हुआ है। इसीलिए तो शिवसेना के एकनाथ शिंदे समेत ४० विधायकों के विश्वासघात के बाद अक्षय बेहद खफा थे और महाराष्ट्र के घटनाक्रम पर नजर रखे हुए थे। ‘शिवसेना के साथ रहो, उद्धव साहेब का साथ मत छोड़ो’ ऐसा वो यहां के कई दोस्तों को फोन कर कह चुके हैं।

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