मुख्यपृष्ठधर्म विशेषविधि से करें बृहस्पति देव की पूजा ... चमक जाएगी किस्मत!

विधि से करें बृहस्पति देव की पूजा … चमक जाएगी किस्मत!

भाद्रपद मास की मासिक शिवरा​त्रि आज २५ अगस्त दिन गुरुवार को है। इस दिन रात्रि के समय में भगवान शिव शंकर की पूजा का शुभ समय है। आप भगवान शिव को प्रसन्न करके अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति कर सकते हैं। महाकाल शिव आसानी से प्रसन्न होने वाले और भक्तों की झोली भरने वाले देव हैं। ये मन के विकार, दुख, दरिद्रता, अकाल मृत्यु भय, ग्रह दोष को दूर करने वाले और पुत्र, धन, संपत्ति, सुख, समृद्धि आदि प्रदान करने वाले हैं।

बृहस्पति देव दूर करते हैं संकट
हिंदू धर्म में सप्ताह का हर दिन को किसी न किसी देवी-देवता को समर्पित किया गया है। गुरुवार का दिन बृहस्पतिदेव का दिन माना जाता है। बृहस्पतिदेव की पूजा अगर सही विधि से की जाती है और वे प्रसन्न हो जाते हैं तो इससे रूठी किस्मत फिर से चमक उठती है। बृहस्पति देव को सभी देवताओं का गुरु माना जाता है, इसलिए इस दिन को गुरुवार भी कहा जाता है। इन्हें नवग्रहों में सर्वश्रेष्ठ माना गया है।

देवताओं के गुरु हैं बृहस्पति
बृहस्पति को देवताओं का गुरु माना जाता है यही वजह है कि इस दिन को गुरुवार कहा जाता है। सनातन संस्कृति में जिस तरह हर देव के पूजा की एक खास विधि तय है उसी तरह सप्ताह के सात दिन भी किसी न किसी देवी-देवताओं को समर्पित किए गए हैं। धार्मिक मान्यता है कि दिन विशेष के अनुसार देवताओं की पूजा करने से उस पूजा का विशेष लाभ प्राप्त होता है। दिन के कारक देवता निश्चित दिन पर पूजा करने से जल्द प्रसन्न होते हैं और पूजा करने वाले व्यक्ति के जीवन से सारे कष्ट दूर कर उसका जीवन सुख, शांति एवं समृद्धि से भर देते हैं।

बृहस्पति देव की पूजा विधि
गुरुवार के दिन सबसे पहले ब्रह्म मुहूर्त में उठकर नहाने वाले पानी में एक चुटकी हल्दी डालकर उस पानी से नहाना चाहिए। इसके बाद माथे पर केसर या हल्दी का तिलक लगाना चाहिए। बृहस्पति देव की मूर्ति या तस्वीर को पीले रंग के कपड़े पर विराजित करना चाहिए। पूजा में पीले फूल, केसरिया चंदन, प्रसाद के तौर पर गुड़ और चने की दाल का भोग अवश्य लगाना चाहिए। इसके अलावा केले के वृक्ष में जल अर्पित करने के साथ ही उसकी धूप-दीप से पूजा करना चाहिए।

इस तरह करें बृहस्पति को प्रसन्न
• गुरुवार को विष्णु भगवान का विधि-विधान से पूजन करने से बृहस्पति देव प्रसन्न होते हैं।
• इस दिन ब्राह्मणों का आदर-सत्कार कर उनका आशीर्वाद प्राप्त करना चाहिए।
• गुरुवार को केसर और चने की दाल का मंदिर में दान करें।
• योग्य व्यक्तियों को गुरुवार के दिन ज्ञानवर्धक पुस्तकों का दान करना चाहिए।

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