मुख्यपृष्ठधर्म विशेषमां कालरात्रि से भय भी होते हैं भयभीत!

मां कालरात्रि से भय भी होते हैं भयभीत!

कालरात्रि की पूजा शक्ति की उपासना है। नवरात्रि में ब्रह्मांड के सारे ग्रह एकत्रित होकर सक्रिय हो जाते हैं, जिसका दुष्प्रभाव प्राणियों पर पड़ता है। ग्रहों के इसी दुष्प्रभाव से बचने के लिए नवरात्रि में दुर्गा की पूजा की जाती है। दुर्गा दुखों का नाश करने वाली देवी हैं, इसलिए नवरात्रि में जब उनकी पूजा आस्था, श्रद्धा से की जाती है तो उनकी नवों शक्तियां जागृत होकर नवो ग्रहों को नियंत्रित कर देती हैं। फलस्वरूप प्राणियों का कोई अनिष्ट नहीं हो पाता है। दुर्गा की इन नवों शक्तियों को जागृत करने के लिए दुर्गा के `नवार्ण मंत्र’ का जाप किया जाता है। नव का अर्थ नौ तथा अर्ण का अर्थ अक्षर होता है। दुश्मनों से जब आप घिर जाएं, हर ओर विरोधी नजर आएं तो ऐसे में माता कालरात्रि की पूजा करनी चाहिए। ऐसा करने से हर तरह की शत्रुबाधा से मुक्ति मिलेगी। मां कालरात्रि ऐसी देवी हैं, जिनसे भय भी भयभीत हो जाते हैं।
`शुभकुमारी’ करती हैं शुभ
मां दुर्गा का सातवां रूप कालरात्रि का है, जो काफी भयंकर है। विद्युत की तरह चमकनेवाली चमकीले आभूषण पहनी मां कालरात्रि नाम के अनुरूप काली रात की तरह हैं और उनके बाल बिखरे हुए हैं। उनकी तीन उज्ज्वल आंखें हैं, जो ब्रह्मांड के सदृश गोल हैं। इनके नेत्रों से विद्युत के समान चमकीली किरणें निकलती रहती है। जब वो सांस लेती हैं तो हजारों आग की लपटें निकलती हैं। वो मृत शरीर पर सवारी करती हैं। उनके दाहिने हाथ में उस्तरा, तेज तलवार है तथा उनका निचला हाथ आशीर्वाद के लिए है। ऊपरी बाएं हाथ में जलती हुई मशाल है और निचले बाएं हाथ से अपने भक्तों को निडर बनाती हैं। उन्हें `शुभकुमारी’ भी कहा जाता है, जिसका मतलब है जो हमेश अच्छा करती हैं। कहते हैं कि मां कालरात्रि के रूप में मां दुर्गा का सबसे क्रूर और भयंकर रूप ही प्रकृति के प्रकोप का कारण हैं।
उपासना मंत्र-
या देवी सर्वभू‍तेषु मां कालरात्रि रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।
शत्रुबाधा मुक्ति मंत्र
त्रैलोक्यमेतदखिलं रिपुनाशनेन त्रातं समरमुर्धनि तेएपि हत्वा।
नीता दिवं रिपुगणा भयमप्यपास्त मस्माकमुन्मद सुरारिभवम् नमस्ते।।
अपने जीवन में भय से छुटकारा पाने के लिए आज रात के समय एक लोटे में जल भरकर अपने सिरहाने रख लें और उस लोटे को किसी अन्य बर्तन से ढंक दें। अब उस ढके हुए बर्तन में देसी घी का एक दीपक जलाएं तथा उस लोटे के दोनों तरफ दो धूपबत्तियां जलाएं। अब मां कालरात्रि के नाम का जाप करते हुए सो जाएं। अगले दिन सुबह उठकर उस लोटे के जल को किसी पेड़ में डाल दें। ऐसा करने से आपको किसी प्रकार का भय नहीं होगा।
दुष्टों का करती हैं विनाश
मां कालरात्रि दुष्टों का विनाश करनेवाली हैं। दानव, दैत्य, राक्षस, भूत, प्रेत आदि इनके स्मरण मात्र से ही भयभीत होकर भाग जाते हैं। ये ग्रह-बाधाओं को भी दूर करनेवाली हैं। इनके उपासकों को अग्नि-भय, जल-भय, जंतु-भय, शत्रु-भय, रात्रि-भय आदि कभी नहीं होते हैं। मां कालरात्रि की आराधना के समय भक्त को अपने मन को भानु चक्र जो ललाट अर्थात सिर के मध्य होता है, में स्थित करना चाहिए। इस आराधना के फलस्वरूप भानुचक्र की शक्तियां जागृत हो जाती हैं। मां कालरात्रि की भक्ति से हमारे मन का हर प्रकार का भय नष्ट हो जाता है तथा जीवन की हर समस्या को पल भर में हल करने की शक्ति प्राप्त होती है। सप्तमी तिथि के दिन भगवती मां कालरात्रि की पूजा में गुड़ का नैवेद्य अर्पित करके ब्राह्मण को देना चाहिए। ऐसा करने से व्यक्ति शोकमुक्त होता है। मां कालरात्रि‍ का पसंदीदा रंग गुलाबी है। अत: मां दुर्गा के इस स्वरूप के पूजन में गुलाबी रंग का प्रयोग शुभ होता है। अत: इस दिन गुलाबी रंग का वस्त्र धारण करें।

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