मुख्यपृष्ठधर्म विशेषमां कुष्मांडा भक्तों की पूरी करती हैं मनोकामनाएं

मां कुष्मांडा भक्तों की पूरी करती हैं मनोकामनाएं

शारदीय नवरात्रि की चतुर्थी तिथि पर देवी के कुष्मांडा स्वरूप का दर्शन-पूजन करने का विधान है। शास्त्रों के अनुसार अपनी मंद मुस्कान से पिंड से ब्रह्मांड तक का सृजन देवी ने इसी स्वरूप से किया था। कुष्मांडा स्वरूप के दर्शन-पूजन से न सिर्फ रोग-शोक दूर होता है अपितु यश, बल और धन में भी वृद्धि होती है। काशी में देवी के प्रकट होने की कथा राजा सुबाहु से जुड़ी हुई है। देवी कुष्मांडा का मंदिर दुर्गाकुंड क्षेत्र में स्थित है। इन्हें दुर्गाकुंड वाली दुर्गा के नाम से भी जाना जाता है।
देवी कुष्मांडा मंत्र
या देवी सर्वभू‍तेषु मां कुष्मांडा रूपेण संस्थिता
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।
नवरात्रि के चौथे दिन के शुभ मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त- ०४.३७ सुबह से ०५.२५ बजे तक।
अभिजीत मुहूर्त- ११.४७ से १२:३५ बजे तक।
विजय मुहूर्त-०२.११ शाम से ०२.५८ बजे तक।
सर्वार्थसिद्धि योग- ०५.१३ सुबह से ०६.१३ बजे तक।
पूजा विधि
स्नानादि से निवृत्त होकर पूर्वाभिमुख होकर मां कुष्मांडा का ध्यान करें। धूप, गंध, अक्षत, लाल पुष्प, सपेâद कुम्हड़ा, फल, सूखे मेवे और सौभाग्य का सामान अर्पित करें। मां कुष्मांडा को हलवे और दही का भोग लगाएं। पूजा के अंत में मां की आरती करें।

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