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चौड़ागढ़ में महादेव को रक्षासूत्र बांधने उमड़ा भक्तों का जनसैलाब! …कोई मानता है बहनोई तो कोई कहता है दामाद

इमरान खान / छिंदवाड़ा

मध्यप्रदेश के पंचमढ़ी के चौरागढ़ पर्वत पर चौरागढ़ महादेव मंदिर जो कि मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। यहां रक्षाबंधन के त्योहार पर अलग ही नजारा देखने को मिला। महाशिवरात्रि पर जहां भक्त लोहे के विशालकाय त्रिशूल लाकर यहां अर्पित करते हैं तो राखी पर महादेव से बहनोई का रिश्ता निभाते हुए रक्षासूत्र बांधने की परंपरा निभाई जाती है।

कोविड में थम सा गया ये सिलसिला ढाई साल बाद फिर शुरू हुआ। रक्षाबंधन पर इस साल फिर एमपी और महाराष्ट्र से चौरागढ़ महादेव को रक्षासूत्र बांधने भक्तों का सैलाब उमड़ा। रक्षाबंधन पर श्रद्धालु रक्षा सूत्र अर्पित कर दुखों के निवारण एवं सुख समृद्धि के लिए प्रार्थना करते हैं। आस्था रखनेवाले परिवार पीेढ़ी दर पीढ़ी इस परंपरा को निभा रहे हैं।

महाराष्ट्र से आनेवाले श्रद्धालु छिंदवाड़ा होते हुए चौरागढ़ महादेव पंचमढ़ी पहुंचते हैं। इस मंदिर से जुड़ी साल में तीन यात्राएं होती हैं। पहली महाशिवरात्रि पर दूसरी कार्तिक माह की और तीसरी श्रावण मास में रक्षाबंधन पर। श्रद्धालुओं का कहना है कि मनोकामना पूर्ण होने पर लोग यहां दुर्गम पहाड़ियों से होते हुए पैदल पहुंचते हैं।

गौरतलब है कि यहां आनेवाले भक्त माता पर्वती को बेटी व बहन मानते हैं। यही वजह है कि भगवान शिव से बहनोई व दामाद का रिश्ता निभाया जाता है। एक अन्य मान्यता के अनुसार बरसों पहले महाराष्ट्र की एक महिला की सूनी गोद भरने की मनोकामना यहां पूरी हुई थी उसने ही महादेव को राखी के त्योहार पर रक्षा सूत्र चढ़ाने की परंपरा शुरू की थी।

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