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महामुंबई एसईजेड का मामला : हमारी जमीन वापस दो! …किसानों की मांग

सामना संवाददाता / नई मुंबई
क्षेत्र में महामुंबई स्पेशल इकोनॉमिक जोन (एमएमएसईजेड) के लिए किसानों से खरीदी गई १० हजार हेक्टेयर जमीन अब किसान वापस मांग रहे हैं, क्योंकि १५ साल बीत जाने के बाद भी एमएमएसईजेड प्रोजेक्ट का काम अटका पड़ा है। पिछले ५ महीनों से जमीन वापसी का मामला राजस्व विभाग के पास लंबित है, लेकिन राजस्व मंत्री के पास किसानों के लिए वक्त नहीं है।
२००५ में १० हजार हेक्टेयर क्षेत्र में महामुंबई एसईजेड की स्थापना के लिए मुंबई इंटीग्रेट सेज लिमिटेड कंपनी को जमीन खरीदने की इजाजत दी गई थी। कंपनी ने महामुंबई एसईजेड के लिए उरण, पेन और पनवेल तालुका के ४५ गांवों के सैकड़ों किसानों की जमीनें भी खरीदी, लेकिन जमीन खरीदी के १५ साल बाद भी कंपनी महामुंबई एसईजेड प्रोजेक्ट नहीं कर पाई है।
हालात को देखते हुए एडवोकेट दत्तात्रेय नवाले ने उरण, पेण, पनवेल तालुका के किसानों की ओर से रायगढ़ जिलाधिकारी को एक आवेदन दायर कर कंपनी द्वारा किसानों की खरीदी गई जमीन वापस करने की मांग की। हालांकि, सुनवाई के बाद रायगढ़ जिला कलेक्टर ने महामुंबई एसईजेड के लिए खरीदी गई जमीन किसानों को वापस करने के अंतिम निर्णय के लिए मामले को राजस्व मंत्रालय के पास भेज दिया है। एडवोकेट नवाले ने बताया कि पिछले पांच महीनों में किसानों की राजस्व मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटील के साथ तीन-चार बैठकें हुईं, लेकिन कुछ भी तय नहीं हुआ।
एसईजेड प्रभावित किसान संगठन के अध्यक्ष हेमंत म्हात्रे के अनुसार, राज्य के मानसून सत्र में राज्य सरकार का ध्यान आकर्षित करने के लिए महामुंबई एसईजेड प्रभावित किसानों का मुद्दा भी उठाया गया। हमें लगा कि अब इसका तत्काल हल निकल आएगा, लेकिन मामला जस का तस ही है। पांच महीने बाद भी राजस्व मंत्री द्वारा किसानों के अहम मुद्दे पर कोई फैसला नहीं लिए जाने से किसानों में भारी नाराजगी है। स्थानीय किसान नेताओं का कहना है कि राज्य सरकार की यह अनदेखी सरकार को आनेवाले समय में भारी पड़ सकती है।

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