मुख्यपृष्ठटॉप समाचारसुप्रीम कोर्ट में शिवसेना की जोरदार दलील ... महाराष्ट्र सरकार गैरकानूनी!

सुप्रीम कोर्ट में शिवसेना की जोरदार दलील … महाराष्ट्र सरकार गैरकानूनी!

• शिंदे गुट का हर निर्णय कानून का उल्लंघन

• आज सुबह १०.३० बजे सुनवाई

सामना संवाददाता / नई दिल्ली बागियों ने खुद ही मूल पार्टी को छोड़ा है। इसलिए मूल पार्टी शिवसेना हमारी है, ऐसा दावा बागी नहीं कर सकते। पार्टी की बैठक में जाने की बजाय बागी विधायक सूरत, गुवाहाटी गए। पार्टी में फूट यह संविधान के अनुच्छेद- १० का उल्लंघन है। ऐसे में शिंदे गुट के विधायक अयोग्य साबित होते हैं। अब तक का हर काम, नए मुख्यमंत्री की नियुक्ति से लेकर उनकी शपथ विधि, शिंदे सरकार द्वारा लिए गए हर पैâसले कानून के खिलाफ हैं, ऐसा बेजोड़ तर्क कल शिवसेना की ओर से सर्वोच्च न्यायालय में दिया गया। इस बीच इस मामले पर आज फिर न्यायालय में सुनवाई होगी। दो तिहाई विधायक होंगे, तब भी बागियों के सामने दो ही विकल्प हैं। दूसरे दल में विलीन हो जाओ अथवा नया दल बनाओ, ऐसा कपिल सिब्बल ने कहा। इस पर ‘आपके अनुसार भाजपा में विलीन हों या नई पार्टी स्थापित करें?’ ऐसा न्यायालय ने पूछा। इस पर ‘बागियों के सामने केवल यही विकल्प है’, ऐसा जवाब सिब्बल ने दिया। कल सुप्रीम कोर्ट में शिवसेना के बागी विधायकों के मामले पर सुनवाई के दौरान यह नजारा देखने को मिला। इस दौरान शिवसेना की ओर से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने बागी विधायकों के खिलाफ माननीय न्यायाधीशों के सामने जोरदार दलील पेश कीं। शिंदे गुट के विधायकों को अयोग्य साबित करना, शिंदे सरकार की वैधता और विधानसभा अध्यक्ष की वैधता को चुनौती देनेवाली याचिका समेत चुनाव आयोग द्वारा शिवसेना किसकी है, इसे लेकर ८ अगस्त तक सबूत पेश करने की दी गई अवधि को चुनौती देनेवाली याचिका, इन सभी याचिकाओं पर एक साथ कल मुख्य न्यायाधीश एन. वी. रमन्ना के नेतृत्व में न्यायमूर्ति कृष्ण मुरारी और न्यायमूर्ति हिमा कोहली की त्रिसदस्यीय खंडपीठ के सामने सुनवाई हुई। शिवसेना की तरफ से वरिष्ठ कानूनविद कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंघवी ने जोरदार बहस करते हुए शिंदे गुट ही अवैध है, ऐसा स्पष्ट कहा। शिंदे गुट की ओर से वरिष्ठ वकील हरीश सालवे ने उनका पक्ष रखा। अभिषेक मनु सिंघवी ने क्या कहा? – शिंदे गुट केवल महाराष्ट्र में ही अवैध सरकार नहीं चला रही, बल्कि चुनाव आयोग के समक्ष जाकर टाल-मटोल कर रही है। सरकार को वैधता दिलाने के लिए शिंदे गुट की ओर से प्रयास किए जा रहे हैं। – किसी गुट के पास केवल बहुमत है, सिर्फ इसीलिए वह वैधता का पात्र नहीं हो जाता। – न्यायालय में याचिका दायर रहने के दौरान शिंदे गुट का चुनाव आयोग के पास जाना पूरी तरह से गलत है। हरीश साल्वे ने क्या कहा? – शिंदे गुट के विधायक अभी भी शिवसेना में ही हैं। ये विधायक विरोधी विचार के होंगे तो भी वे अभी भी पार्टी में हैं। पार्टी में लोकतंत्र होना चाहिए। – नेता अर्थात राजनीतिक दल, ऐसी गलतफहमी हमारे देश में है। – पार्टी की बैठक में अनुपस्थित होना मतलब पार्टी छोड़ दी, ऐसा नहीं है। ऐसे में दल-बदल कानून यहां लागू नहीं होता। – विधायकों की अयोग्यता का मुद्दा और चुनाव आयोग के पास मौजूद मामले इन दोनों का एक-दूसरे से कोई संबंध नहीं। – मुंबई मनपा का चुनाव करीब है। ऐसे में धनुष-बाण का चिह्न किसे मिलेगा, यह महत्वपूर्ण है इसलिए हम चुनाव आयोग के पास गए हैं। कपिल सिब्बल ने क्या कहा? • जिस दल के टिकट पर, चिह्न पर चुनकर आए, उस पार्टी के आदेश का पालन विधायकों को करना ही चाहिए। • बागी विधायक गुवाहाटी में थे और उनका दावा था कि असल में पार्टी हमारी ही है, लेकिन ये पूरी तरह दल-बदल कानून का उल्लंघन है। • दो तिहाई बागी विधायक मूल पार्टी पर दावा नहीं कर सकते। • दल-बदल को प्रोत्साहन देने के लिए संविधान के अनुच्छेद-१० का उपयोग किया जा रहा है। यह ऐसे ही चलता रहा तो देश में दलबदलुओं को प्रोत्साहन देने जैसा होगा, किसी भी राज्य की सरकार गिराने के लिए इसका इस्तेमाल होगा। अनुच्छेद-१०का ऐसा इस्तेमाल रोकना चाहिए। • अयोग्य और अवैध तरीके से गुट चुनाव आयोग के समक्ष नहीं जा सकता। • बागी विधायकों के अयोग्य साबित होने से सभी पैâसले और काम अवैध साबित होते हैं। एकनाथ शिंदे द्वारा मुख्यमंत्री के तौर पर ली गई शपथ, उनके द्वारा लिया गया हर पैâसला कानून का उल्लंघन ही है। उद्धव ठाकरे को ही अभी तक अध्यक्ष मानते हैं बागी विधायक गुवाहाटी जाकर ‘हम ही मूल पार्टी हैं’, ऐसा दावा नहीं कर सकते। चुनाव आयोग राजनीतिक दलों का पैâसला करता है इसलिए यह गुट गुवाहाटी में बैठकर घोषणा नहीं कर सकता। कोई भी फूट अनुच्छेद-१० का उल्लंघन है। आज भी उद्धव ठाकरे को ही शिवसेना पार्टी का अध्यक्ष माना जाता है। याचिका में भी ऐसा उल्लेख है, इस पर भी कपिल सिब्बल ने ध्यान आकर्षित किया।

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