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महाराष्ट्र सरकार की योजना लाएगी नई बहार!

•  बेरोजगारों और महिलाओं को मिलेगा आधार
•  शेल्टर होम के बच्चों दिया जाएगा नया आयाम

सामना संवाददाता / मुंबई । बेरोजगार युवाओं, विधवा महिलाओं को राज्य सरकार ने आधार देने का पैâसला किया है। साथ ही शेल्टर होम के बच्चों के भविष्य को नया आयाम दिया जाएगा। महाराष्ट्र सरकार ने कौशल विकास की महत्वाकांक्षी योजना के माध्यम से उनके जीवन में नई बहार लाने की तैयारी की है। इसके लिए विश्व बैंक का भी सहयोग लिया जाएगा और कौशल विकास की परियोजनाओं पर अमल किया जाएगा।

राज्य में कौशल वृद्धि के लिए जरूरी मूलभूत सुविधाओं का विकास करने के साथ ही राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की नामचीन संस्थाओं के सहयोग से ज्ञान के आदान-प्रदान को बल दिया जाएगा। कौशल विकास व उद्यमिता मंत्री राजेश टोपे के अनुसार इस योजना की प्राथमिक रिपोर्ट को हाल ही में मंजूरी दी गई है। कौशल विकास का विस्तृत प्लान विश्व बैंक के सामने रखा जाएगा। परियोजना पर सफलतम अमल के बाद राज्य में कौशल पूर्ण रोजगार निर्माण और स्वरोजगार में वृद्धि होगी। ‌इसके लिए विभाग के प्रधान सचिव मनीषा वर्मा और अधिकारियों के साथ विश्व बैंक के प्रतिनिधियों के साथ बैठक हो चुकी है। ‌विश्व बैंक के सहयोग से जल्द इस परियोजना पर काम शुरू हो सकेगा।
मिलेगा सीएसआर का साथ
मंत्री राजेश टोपे के अनुसार विभिन्न कॉर्पोरेट कंपनियों, उद्योगों और राज्य सरकार की सहभागिता में युवाओं, महिलाओं, दिव्यांगों, विधवा आदि के लिए विविध कौशल विकास उपक्रम चलाए जाएंगे। इसके लिए राज्यस्तरीय कौशल विकास सामाजिक दायित्व कोष (सीएसआर फंड) की भी मदद ली जाएगी।‌ सीएसआर फंड और स्वेच्छा दान समिति गठित की जा रही है। इस कार्यक्रम में राज्य सरकार भी योगदान देगी।
राज्य सरकार भी देगी योगदान
मंत्री टोपे ने बताया कि कॉर्पोरेट संगठनों, उद्योगों द्वारा कौशल विकास के लिए यदि सीएसआर या स्वैच्छिक कोष से २ करोड़ से ५ करोड़ रुपए की राशि खर्च की जाती है तो राज्य सरकार २० प्रतिशत तक का योगदान देगी। इसके अलावा राज्य सरकार ५ से १० करोड़ रुपए सीएसआर व स्वैच्छिक निधि के लिए ४० प्रतिशत तक प्रदान करेगी। यदि सीएसआर व स्वैच्छिक निधि से १० करोड़ से अधिक राशि खर्च की जाती है तो राज्य सरकार उस कार्यक्रम के लिए ६० प्रतिशत तक का योगदान देगी।

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