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महाराष्ट्र में हाहाकार, बारिश की है दरकार … प्रदेश में १२३ साल पुराना रिकॉर्ड टूटा

धीरेंद्र उपाध्याय / मुंबई
महाराष्ट्र समेत पूरा देश सूखे के कगार पर है। महाराष्ट्र में बारिश न होने से तो हाहाकार मचा हुआ है। किसान मानसून की वापसी की प्रतीक्षा कर रहे हैं। हालांकि, उनकी यह दरकार पूरी होती हुई नहीं दिखाई दे रही है। पुणे मौसम विभाग के प्रमुख के. एस. होसालिकर ने इस बारे में बेहद अहम जानकारी दी है। उन्होंने कहा है कि अगस्त महीने में मराठवाड़ा और मध्य महाराष्ट्र के साथ ही राज्य में ५९.४२ फीसदी, जबकि देश में ३६ फीसदी कम बारिश हुई है। राज्य में बारिश औसत से ११ फीसदी कम है। इस साल अगस्त महीने में हुई बारिश ने १२३ साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ दिया है।
उल्लेखनीय है कि केवल महाराष्ट्र ही नहीं, बल्कि देश के कई राज्य सूखे के संकट से जूझ रहे हैं। १२३ साल बाद इस साल अगस्त सबसे शुष्क महीने के तौर पर दर्ज किया गया है। इससे पहले साल १९०१ में अगस्त महीने में सबसे कम बारिश हुई थी, जिसके बाद इस साल भी ऐसा ही होने की संभावना है। महाराष्ट्र के कई राज्य सूखे की मार झेल रहे हैं। महाराष्ट्र के साथ-साथ झारखंड, बिहार, पश्चिम बंगाल, पूर्वी उत्तर प्रदेश, मणिपुर, अरुणाचल, असम, लद्दाख, हिमाचल और कर्नाटक के कुछ हिस्सों में अधिक गंभीर सूखा पड़ सकता है।
महाराष्ट्र के इन जिलों में भयावह स्थिति!
इस साल देश के एक बड़े हिस्से के सूखे से पीड़ित होने का अनुमान है। महाराष्ट्र को लिया जाए तो अगस्त महीने में औसत से ७१ फीसदी कम बारिश हुई है। ३२९ राजस्व मंडलों में पिछले महीने भर से बारिश की एक बूंद भी नहीं पड़ी है। आगामी दिनों में यदि यह तस्वीर नहीं बदली तो भविष्य में सूखे का सामना करना पड़ सकता है। महाराष्ट्र पर नजर डालें तो कोकण के अलावा नासिक, धुले, नगर, सोलापुर, जलगांव, नंदुरबार, सांगली, सातारा, कोल्हापुर, अकोला, अमरावती, बुलढाना, बीड, जालना, लातूर, परभणी, हिंगोली और संभाजीनगर में सूखे की स्थिति बनने की संभावना है।
जलाशयों के जलस्तर में आई गिरावट
बारिश के विराम लेने से जलाशयों का जलस्तर भी कम हो रहा है। उदाहरण के तौर पर उजणी जलाशय पिछले साल अगस्त माह में १०१ प्रतिशत भरा था। वहीं इस समय इस जलाशय में केवल ७.४२ टीएमसी उपयोग योग्य पानी बचा है। अगर अगले २० से २५ दिनों में बारिश नहीं हुई तो उजणी जलाशय में २ से ३ टीएमसी पानी ही बचे रहने के संकेत हैं।
इस महीने बारिश की वापसी का अनुमान
बारिश का इंतजार कर रहे किसानों समेत सभी लोगों के लिए पुणे वेधशाला ने एक राहत भरी खबर दी है। कहा गया है कि भले ही मानसून का अगस्त महीना सूखा रहा हो, लेकिन वरुणराजा ४ सितंबर से राज्य में कम प्रमाण में लेकिन निश्चित वापसी करेंगे। सितंबर माह के दौरान देश में औसत वर्षा होने की उम्मीद है। बंगाल की खाड़ी में कम दबाव का क्षेत्र बनने से दक्षिणी विदर्भ में हल्की और मध्यम बारिश जरूर शुरू होगी। मराठवाड़ा और कोकणपट्टी के कुछ हिस्सों में और सितंबर के दूसरे भाग में भी अच्छी बारिश होगी।
जानवरों के चारों और पेयजल पर संकट
पूरे अगस्त महीने में अच्छी बारिश न होने के चलते इस मौसम में गर्मी जैसे हालात बन गए हैं। खरीफ सीजन की फसल सूखने लगी है, तो वहीं रबी की फसलों को लेकर किसान चिंतित हैं। लंबे समय तक बारिश न होने के कारण अब पशुओं के चारे पर भी असर पड़ने लगा है। इतना ही नहीं पीने के पानी पर भी संकट के बादल मंडराने लगे हैं। हालांकि, अब किसानों को उम्मीद है कि सितंबर में खूब बारिश होगी। दूसरी तरफ `अल नीनो’ के प्रभाव के कारण देश में कम बारिश की भविष्यवाणी सच हो गई है।

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