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’नए साल से करें नए संकल्प’, गुढी पाडवा से हटेंगे कोरोना के सभी प्रतिबंध, मास्कमुक्त होगा महाराष्ट्र

७३६ दिन बाद पाबंदियों से आजादी
धूमधाम से निकलेगी शोभायात्रा
सामना संवाददाता / मुंबई। गुढी पाडवा मतलब नव वर्ष का शुभारंभ। पुराने को पीछे छोड़कर नए कार्यों को शुरू करने का यह दिन है। बीते दो वर्षों में हम घातक कोरोना वायरस के खिलाफ सफलतापूर्वक लड़ाई लड़े हैं और आज यह संकट मिटता दिखाई दे रहा है। नए सिरे से शुरुआत करने के लिए, आपदा प्रबंधन अधिनियम के साथ-साथ संक्रामक रोग निवारण अधिनियम के तहत कोरोना काल में लगाए गए प्रतिबंधों को गुढी पाडवा कल (२ अप्रैल) से पूरी तरह से हटाया जा रहा है। ऐसा मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने कल राज्य मंत्रिमंडल की बैठक घोषित किया।
इस मौके पर उन्होंने मंत्रिमंडल की ओर से राज्य की जनता को गुढी पाडवा की शुभकामनाएं दीं। भविष्य में कोरोना के प्रकोप का खतरा न हो, इसके लिए नागरिकों को मास्क पहनने, सुरक्षित दूरी बनाए रखने और कोरोना प्रतिबंधक टीका लगवाना आवश्यक है। स्वास्थ्य के नियमों का पालन करते हुए अपना और दूसरों का खयाल रखने का आह्वान भी मुख्यमंत्री ने किया है। इस संबंध में तत्काल विस्तृत आदेश जारी करने का उन्होंने निर्देश भी दिया। पिछले दो वर्षों से राज्य में डॉक्टरों सहित सभी प्रâंटलाइन स्टाफ और सभी नागरिकों ने कोरोना के खिलाफ लड़ाई में राज्य सरकार को अटूट समर्थन दिया, ऐसा कहते हुए मुख्यमंत्री ने इसके लिए सभी को धन्यवाद दिया। इस अवधि के दौरान राज्य के विभिन्न जाति, धर्मों और संप्रदायों के नागरिकों ने अपने त्योहारों, समारोहों और उत्सवों को सीमित रखा और संयम का पालन किया। कोरोना से लड़ने के लिए पुलिस, मनपा, नगर पालिकाओं, राजस्व, ग्रामीण विभाग की एजेंसियों सहित समग्र प्रशासन ने दिन-रात मुकाबला किया, इस पर समाधान व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री ने उन सभी का आभार व्यक्त किया।
कोरोना की सख्त पाबंदियों एवं मास्क के कारण परेशान राज्य की जनता गुढी पाडवा से मास्कमुक्त तथा कोरोना पाबंदियों से पूरी तरह आजाद हो जाएगी। राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में कल इससे संबंधित महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। उत्सव, त्योहार, रैलियों पर लगी तमाम पाबंदियों को हटा लिए जाने की वजह से महाराष्ट्र में हिंदू नव वर्ष का स्वागत अब जोरदार एवं शान से किया जाएगा। लगभग ७३६ दिन की पाबंदियों के बाद राज्य की जनता खुलकर सांस ले सकेगी। राज्य मंत्रिमंडल की बैठक के बाद प्रसार माध्यमों से स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे ने कहा कि विगत दो वर्षों से राज्य में कोरोना की पाबंदियां लागू थीं। परंतु अब २ अप्रैल को गुढी पाडवा के मौके पर महामारी नियंत्रण कानून व आपाताकालीन व्यवस्थापन कानून वापस लेने का निर्णय राज्य सरकार ने लिया है। इन दो कानूनों के माध्यम से राज्य में कई पाबंदियां लगाई गई थीं परंतु इन दोनों कानूनों को वापस लेने का निर्णय राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में लिया गया है। इसलिए होटल में ५० फीसदी की सीमा, बस में सफर के दौरान यात्रियों की संख्या, मास्क की अनिवार्यता, सफर के लिए टीके के दोनों डोज का प्रमाण पत्र ये सभी पाबंदियां हटा ली गई हैं। लेकिन लोगों को कोरोना के प्रति सतर्क रहना ही चाहिए। अब मास्क अनिवार्य नहीं परंतु ऐच्छिक अवश्य है। इस निर्णय के कारण गुढी पाडवा पर मुंबई में शोभायात्रा शान से निकाली जा सकेगी। १४ अप्रैल को डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर की जयंती पूरे उत्साह के साथ मनाई जाएगी। अन्य दूसरे त्योहार भी पूरे उत्साह के साथ मनाए जाएंगे, ऐसा भी उन्होंने कहा।
सभी से चर्चा करके निर्णय
अमेरिका, चीन, यूरोप के कुछ देश मास्क मुक्त हो गए हैं, परंतु आज हमने मास्क को ऐच्छिक रखा है। मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे व मंत्रिमंडल के सदस्यों ने कोरोना टास्क फोर्स, चिकित्सा विशेषज्ञ, स्वास्थ्य विभाग, केंद्र सरकार से चर्चा करके यह निर्णय लिया है।
पॉजिटीविटी रेट घटी
आज कल राज्य में ७०० से ८०० कोरोना के केस मिलते हैं। प्रति दिन ५० से ६० हजार जांच की जाती है। इन जांच के बाद पॉजिटीविटी रेट ०.४ से भी नीचे पहुंच गई है, ऐसी जानकारी उन्होंने दी। स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे ने कहा कि विवाह समारोह एवं अन्य कार्यक्रमों में उपस्थित लोगों की संख्या का कोई बंधन नहीं है, परंतु लोगों को अपनी फिक्र खुद ही रखनी चाहिए। इसलिए सार्वजनिक व महत्वपूर्ण जगहों पर मास्क का इस्तेमाल करें, भले ही यह ऐच्छिक है।
स्वास्थ्य कर्मचारियों की जांच
स्वास्थ्य विभाग में ४० से ५० वर्ष के बीचवाले २२ लाख कर्मचारियों की दो साल में एक बार ५ हजार रुपए तक की आवश्यक जांच की जाएगी, तो वहीं ५०-६० वर्ष के बीच के लोगों के लिए हर साल जांच अनिवार्य कर दी गई है। इन दोनों पर कुल मिलाकर १०५ करोड़ रुपए खर्च होंगे। सरकारी कर्मचारियों का स्वास्थ्य उत्तम रहे, इस दृष्टिकोण से यह निर्णय लिया गया है, ऐसी जानकारी राजेश टोपे ने दी।

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