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दिल्ली से चल रहा है महाराष्ट्र का कामकाज, थानों में आते हैं दिल्ली से फोन, मंत्री- मुख्यमंत्री को नहीं होता है पता, संजय राऊत का जोरदार हमला।

सामना संवाददाता / मुंबई
महाराष्ट्र का कामकाज इस समय यहां (मुंबई) से नहीं बल्कि दिल्ली से चल रहा है। वह चाहे राजनीतिक पैâसला हो अथवा कोई भी अन्य पैâसला हो…। इतना ही नहीं पुलिस थानों में भी दिल्ली से फोन आते हैं और मंत्री, मुख्यमंत्री को पता ही नहीं होता है कि किस पर कार्रवाई करनी है, किस पर नहीं, किसे छोड़ना है, किसे फंसाना है, किसके पीछे जांच की फौज लगानी है ये सब दिल्ली से तय होता है। इसलिए मुख्यमंत्री और दो उपमुख्यमंत्री हमेशा के लिए दिल्ली में जाकर रहें तो भी महाराष्ट्र को खासा फर्क नहीं पड़ेगा। इस तरह का जोरदार हमला शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) नेता व सांसद संजय राऊत ने ‘घाती’ सरकार पर किया।
पिछले हफ्ते केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के पास समय की कमी के कारण मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री का दौरा रद्द हो गया था। इसलिए ़क्या इस सप्ताह दिल्ली दौरे हो सकते हैं? इस सवाल के बारे में पूछे जाने पर संजय राऊत जवाब दे रहे थे। अंतरवाली सराटी में पुलिसवालों के लाठी चार्ज को लेकर गृहमंत्री देवेंद्र फडणवीस का रुख लगातार बदल रहा है। इसे लेकर पूछे जाने पर संजय राऊत ने कहा कि फडणवीस को विपश्यना करने की जरूरत है। महाराष्ट्र में डेढ़ सालों से जो राजनीति चल रही है, एक जिम्मेदार नेता को उसके दो जूनियर के अधीन काम करना पड़ रहा है, इसीलिए यह बेचैनी है। धीरे-धीरे कई बातों का स्मरण हो रहा है। संजय राऊत ने कहा कि गृहविभाग वे चला रहे हैं, ऐसा मुझे नहीं लगता है। गृह विभाग और अन्य विभागों को लेकर दिल्ली से कामकाज चलाया जाता है। महाराष्ट्र दिल्ली का गुलाम हो गया है। महाराष्ट्र दिल्ली के रास्ते का पायदान हो गया है। यह मैं कहता हूं इसीलिए। इस तरह का जोरदार हमला संजय राऊत ने किया।
महाराष्ट्र में इस समय आरक्षण के मुद्दे पर मनोज-जरांगे पाटील और छगन भुजबल के बीच शाब्दिक युद्ध शुरू है। भुजबल ने शराब पीने से जरांगे पाटील की किडनियां खराब होने जैसी भाषा का इस्तेमाल जरांगे के लिए किया। इस पर संजय राऊत ने कहा कि इस तरह की भाषा का इस्तेमाल करने से सभी को बचना चाहिए। राज्य की सामाजिक स्थिति मौजूदा समय में स्थिर है। इस तरह कीचड़ फेंक कर किस समाज का भला होगा।

फैसले करने के लिए साहस की जरूरत
इस बीच विधायक अयोग्यता मामले पर आज से अगले तीन दिनों तक अंतिम सुनवाई होगी। इस सुनवाई के बाद पैâसला आ सकता है क्या अथवा और विलंब होगा? यह पूछे जाने पर राऊत ने कहा कि विलंब होगा। क्योंकि इस तरह के फैसले करने के लिए साहस की जरूरत होती है। संविधान पर श्रद्धा रखनी पड़ती है और दल-बदल को लेकर मन में साहस होना चाहिए। लेकिन इस तरह का कोई भी साहस, आक्रोश विधानसभा अध्यक्ष के पास नहीं दिखाई दे रहा है, जिन्हें हम ट्रिब्यूनल कहते हैं।

मुंबई की रक्षा के लिए बालासाहेब ने शिवसेना की स्थापना की ये है ऐतिहासिक सत्य
धारावी बचाने के लिए लाखों लोग मोर्चा में शामिल हुए। वे केवल धारावीकर नहीं थे, बल्कि पूरे मुंबई से लोग उतरे थे। ये केवल कार्यकर्ताओं का मोर्चा था, अभी जनता का सड़क पर उतरना बाकी है। संजय राऊत ने कहा कि मुंबई का सौदा शुरू है। यह सौदा शिवसेना नहीं होने देगी। मुंबई समेत महाराष्ट्र निर्माण करने के लिए संयुक्त महाराष्ट्र समिति की स्थापना हुई है और उन्होंने यह लड़ाई शुरू की है। लेकिन संयुक्त महाराष्ट्र के बाद भले ही मुंबई आई लेकिन यह एक ऐतिहासिक सत्य है कि बालासाहेब ठाकरे ने मुंबई की रक्षा के लिए शिवसेना की स्थापना की थी। इसीलिए शिवसेना को हमसे छीनने और लूटने की कोशिश कर रहे हो तो शिवसेना महाराष्ट्र धर्म के तौर पर सड़क पर उतरेगी ही, ऐसी फटकार राऊत ने ‘घाती’ सरकार को लगाई।

पुलिस ने कबूल की चूक!
संजय राऊत के खिलाफ दर्ज देशद्रोह का मामला लिया वापस

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर टिप्पणी करने पर शिवसेना नेता व सांसद संजय राऊत के खिलाफ यवतमाल के उमरखेड में दर्ज किया गया देशद्रोह का मामला सोमवार को पुलिस ने वापस ले लिया। पुलिस ने कोर्ट में लिखित जवाब पेश करते हुए अपनी चूक को कबूल किया और एफआईआर से देशद्रोह की धारा १२४ (अ) को अलग करने की जानकारी दी। दैनिक सामना में रोखठोक कॉलम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर व्यंग्यात्मक लेख प्रकाशित करने के मामले में भाजपा पदाधिकारी ने शिकायत की। उस शिकायत पर उमरखेड पुलिस थाने में शिवसेना नेता व सांसद संजय राऊत के खिलाफ भा.दं.सं. की धारा १२४ (अ) के तहत देशद्रोह का मामला दर्ज किया गया। सुप्रीम कोर्ट द्वारा इस धारा को स्थगिति किए जाने के बावजूद पुलिस ने अवैध तरीके से देशद्रोह की धारा का इस्तेमाल किया। इस तरह की आपत्ति दर्ज करते हुए सांसद राऊत की ओर से एड. पैâजान मिर्जा, एड. ताज मालनस और एड. सलीम मेमन ने पुसद स्थित अतिरिक्त जिला व सत्र न्यायालय में जमानत याचिका दायर की। उस पर न्यायालय ने पुलिस को लिखित जबाव पेश करने का आदेश दिया था। सोमवार व्ाâो पुलिस ने कोर्ट में अपनी गलती को कबूल किया।

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