मुख्यपृष्ठग्लैमर‘मैं बहुत रोमांटिक हूं!’ -राजपाल यादव

‘मैं बहुत रोमांटिक हूं!’ -राजपाल यादव

दो दशक से भी ज्यादा समय सिनेमा को देनेवाले और फिल्मों में नकारात्मक, हास्य और कभी-कभी गंभीर भूमिका निभानेवाले राजपाल यादव के जीवन की प्राथमिकता अभिनय और फिल्में रही हैं। अगर उनके मनमुताबिक किरदार न मिले तो पैसा उन्हें प्रभावित नहीं करता। पेश है, राजपाल यादव से हिमांशु राज की हुई बातचीत के प्रमुख अंश-

पिछले कुछ समय से आप गंभीर फिल्में कर रहे हैं, जबकि आपकी छवि हास्य कलाकार की है?
हाल में आई फिल्म ‘अपूर्वा’ या ‘अर्ध’ को देखकर आप ऐसी बात कर रहे हैं, जबकि शुरुआती दौर में मुझे पहचान फिल्म ‘जंगल’ में सिप्पा के गंभीर किरदार से मिली थी। इसके अलावा ‘भोपाल ए प्रेयर ऑफ रेन’, ‘अंडर ट्रायल’, ‘मैं मेरी पत्नी और वो’, ‘चांदनी बार’, ‘मैं माधुरी दीक्षित बनना चाहती हूं’ जैसी कई फिल्मों में गंभीर रोल करने का अवसर मुझे मिला। मेरे करियर को देखेंगे तो आपको गंभीर व हास्य किरदारों का समावेश मिलेगा।

उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर से मायानगरी मुंबई तक का संघर्ष कैसा रहा?
संघर्ष तो अभी भी जारी है और मैं रोज संघर्ष करता हूं। बतौर अभिनेता मैं अभी भी अभिनय सीख रहा हूं। लखनऊ यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन करने के बाद दिल्ली के एनएसडी में एडमिशन लिया। इसके बाद मुंबई और फिल्में। हर दिन एक नई चुनौती और एक नया संघर्ष।

एनएसडी के स्टूडेंट को आप आज भी कहीं जीते हैं। जेल में वर्क शॉप करवाने की कहानी क्या थी?
बुरा दौर हर आदमी के जीवन में आता है। जेल की चार दीवारी में समय को वैâसे काटा जाए ये चुनौती थी। मेरा अभिनेता होना काफी काम आया। जेल में वर्कशॉप आयोजित करने का उद्देश्य यह था कि लोग कला से जुड़कर सृजनात्मक और कलात्मक हो जाएं। तीन महीने जेल में बिताने के बाद जेल अधीक्षक और स्टाफ ने मुझे एक की बजाय दो सर्टिफिकेट दिए। अधीक्षक ने कहा, ‘हमें आपसे प्रेरणा मिली, तीन महीनों में आपने इन दीवारों में जान डाल दी।’ उस समय मुझे आभास हुआ कि मेरा कलाकार होना सार्थक हुआ।

आपके अभिनय के प्रति रुझान से क्या घरवाले कभी नाराज हुए?
मैं सौभाग्यशाली रहा हूं कि मुझे माता-पिता का समर्थन व आशीर्वाद प्राप्त था। एक बार पिताजी के मित्र ने मुझे एक कार्यक्रम में अभिनय करता देख पिता से मेरी शिकायत कर दी। इस पर पिताजी ने जवाब दिया कि राजपाल जो भी करेगा मुझे उस पर गर्व होगा। आप निश्चिंत रहें मुझे अपने पुत्र पर पूरा विश्वास है। पिताजी की नाराजगी में भी उनका प्रेम था।

पिता के रूप में राजपाल यादव कैसे हैं?
आप मुझे एक अच्छा पिता कह सकते हैं। पिता के रूप में जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हुए मुझे अपनी बड़ी पुत्री का कन्यादान करने का सौभाग्य भी प्राप्त हुआ। वैसे यह प्रश्न आपको मेरे बच्चों से करना चाहिए वो इसका सही उत्तर दे सकते हैं।

अपनी सफलता के पीछे आप पत्नी का कितना योगदान मानते हैं?
हर कदम पर उनका योगदान रहा है। पत्नी आपकी सहयोगिनी शक्ति होती है। संघर्ष और जीवन के कठिन पलों में उनका साथ मेरे साथ साए जैसा रहा। मैं भाग्यशाली हूं।

आप धार्मिक व आध्यात्मिक भी हैं। अभिनय में अध्यात्म कितना सहायक रहा…?
अभिनय भी एक तरह की साधना है, अध्यात्म है। अध्यात्म भी समर्पण मांगता है और कला भी। मैं अभिनय को अध्यात्म से अलग नहीं मानता। ललित कला अध्यात्म का ही हिस्सा है।

आप फिल्मों में रोमांटिक किरदार करना चाहते हैं, क्या ये बात सही है?
मैं बहुत रोमांटिक हूं और फिल्मों में मिले अपने हर किरदार से मैं रोमांस करता हूं। अभिनय ही मेरा पहला प्रेम है।

कौन-सा किरदार आपके करीब है और आप किसे अपना आदर्श कलाकार मानते हैं?
मेरे लिए मेरा हर किरदार विशेष है और मेरे हृदय के करीब है। मुझे लगता है मेरा बेस्ट आना अभी बाकी है। आज भी हर फिल्म को मैं अपनी पहली फिल्म समझकर काम करता हूं। कुछ नया और कुछ अलग कर सकूं ये मेरा प्रयास रहता है। हमेशा से चार्ली चैप्लिन मेरे आदर्श कलाकार रहे हैं।

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