मुख्यपृष्ठस्तंभमैथिली व्यंग्य: डॉ. ममता शशि झा

मैथिली व्यंग्य: डॉ. ममता शशि झा

सुजाता ऑफिस के लेल तैयार होइत काल पति अनिल के तमसा क कहलखिन’ हमर नाश्ता तैयार अछि कि नइ? लंच तैयार भ गेल? समय के कोनो ज्ञान नइ अछी अहा के। अनिल हबड़-हबड़ सुजाता के चाय-जलखइ देलखिन आ लंच बॉक्स हाथ क द देलखिन, सुजाता बिना कृतज्ञता के भाव के खा क, दुपहरिया के खेनाई ल क अपन मां-बाबूजी के बाय कहि ऑफिस लेल बिदा भ गेली। अनिल हबड़ – हबड़ ऑफिस जाय के तैयारि कर लगला, जल्दी स अपन लंच बॉक्स पैक केलैन, जलखइ कर के बेर नइ छलैन, मौजा आ टाई बैग में रखलथि, सुजाता के मां-बाबूजी के लेल दुपहरिया के भोजन बना क राखि, हुनका सबके जलखइ द बिदा भेलि। सांझ में दुनु गोटे घर अयला, सुजाता सोफा पर बैसल अपन मां-बाबूजी स गप्प करइ छलि, अनिल चाय के पानि चढ़ा क सुजाता के कहलखिन, चाय छानि लिय, दुनु गोटे संगहि ऑफिस स अयलहु, हमहु थाकल छि, कनी अहूं घरक काज में हाथ बटाऊ।
ताहि पर हुनकर ससुर बजला, अहीं टा नौकरी करइ छि कि सब पुरुख करइ छैथ, सब अपन घर सभांरैत नौकरी करइ छइ, अहा कोन बड़का तिर मारि रहल छि, नौकरि के संगे घर सम्हांरी क।
सुनील बेचारा चाय छानि क आनि लेलैथ। सुजाता के माथ पर हाथ पेâरैत हुनकर मां कहलखिन लिए बिस्कुट खाउ, थाकि क आयल होयब, ई दृश्य देखी क सुनिल के आंखि में नोर आबी गेलैन। ओ बिना किछु बजने चाय ल क बेडरूम में चलि गेला। सुजाता सोफा पर बैसि क टी वी देख लगला आ रातुक भोजन के बारे में सोच लगला। टी वी पर समाचार के शोर, आ टॉक शो के जोर जोर चिचियेनाइ के आवाज कान में पड़ि रहल छलैन। सुजाता सोफा पर टी वी देखइत काल मां के कोरा में पड़ि रहलि हुनकर मां कहलखिन जाउ मूंह हाथ धो लिए एना में निंद पड़ी जायब, बिना खेने सुतब त एक बगुड़ा के माउस घटि जायत, सुजाता बाथरूम में जा क आंखी पर छिंटा मारऽ लगलि, पानि पड़िते निंद उड़ि गेलैन, भोर भ गेल छल, पति देव हाथ के अखबार ल क चाय बनाब लेल हिनका आंखिं पर पानि के छिंटा मारि क उठा रहल छलखिन, सुजाता घड़ि दिस देखइत भानसाघर दिस बिदा भेलि, सुखद स्वप्न के मिठास, मोन में एकटा टिस भरि देलवैâन!

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