मुख्यपृष्ठनए समाचारमैथिली व्यंग्य: जीवन के मुस्कुराईत पल

मैथिली व्यंग्य: जीवन के मुस्कुराईत पल

डॉ. ममता शशि झा मुंबई

आई हमर नातिन टिन्नी यानी तनुश्री के विवाह छनी, हम बेटी ओत जाय लेल बिदा भेलहुं त हुनकर नान्ही टा सलक एखन धरि के एक-एक टा गप्प मोन पड़ लागल। आब ओ शासकीय क्षेत्र में उच्च पद पर आसीन छली, मुदा बच्चा में बहुत शरारती छली। छुट्टी में जहन नानी गाम अबई छली त भरी घर में हड़होड़ी मचेने रहई छली। हम किछु करईत रहितऊ त अनेरो पाछा से चटचटा क चली जाय छली, जा धरि हम ठेंगा ल क हुड़की नहीं दितियनी ई सिलसिला चलती रहनी छलनी, लड़ाई क, के अपने जोर-जोर से कान लगथी एकदम मासूम चेहरा बना क, जाहि स हिनकर गलती रहला परो दोसरे के मारी लगी छलई, आ ई मुस्कुराईत मारी खेनहार दिस तकथिंन, जाहि स ओ घुड़की क मार लेल छूटनी त, ई अपना आप के बेकसूर साबित कर में सफल भ जाई छली।

मामा के सुतल रहला पर हुनकर मूंह के लिपिस्टिक से रंगी दई छलखिन्ह, ओ जहन उठी क अपना घर स बाहर अबई छला त घर में ठहक्का बजरी जाई छल। ओ तमसा क टिन्नी के पीट लेल ओकरा पाछा पड़ाई छला, त टिन्नी नानी के पाछा नुका जाई छली, आ ककर हिम्मत छलई ओहि लक्ष्मण रेखा से हुनका पकड़ी क बाहर ल अबीते। मामा के टिन्नी के पीट के मनोकामना अधूरे रही जाई छलनी, ओ दांत किचती, चली जाय छला, आ टिन्नी अलपी जकां नोर बहाब लगाई छली, सब हुनकर गलती के बिसरी हुनके बहुंस में लागी जाई छल। ईहे सब सोचती हम अपन बेटी ओत पहुंच गेलहूं, टिन्नी पढ़ाई के कारण बहुत साल बाहर रहली, आबीते बियाह ठीक भ गेल छलनी, ताहि स भेट कर के मौका नहीं भेल छल, टिन्नी के देख लेल बहुत उत्साहित छलहुं। हमरा आ मामा के देखीते गोर लगलथी, आशीर्वाद दईत हुनकर आंखी दिस देखालियानी, मोन में भेल जे काश टिन्नी फेर हमारा थपडबितथी। टिन्नी हमरा कुशल छेम पुछई छली, ओहि काल हुनकर मेकअप आर्टिस्ट आबी क कहलकनी जे चलू आब फाइनल टच द दई छी। ‘हम त तैयार छी सिर्फ लिपस्टिक लगेबाक अछी, ई कहिते हमारा तीनू गोटे के चेहरा पर मुस्कुराहट आबी गेल, मामा कहलखीन ससुर के सुतल में लिपस्टिक से रंगी नहीं देबनी। फेर ओहि दिन जाकां ठहक्का पसरी गेल। ‘मामा’ टिन्नी ठोर पर हंसी आ आंखी में भरल नोर नेने बजली। अजुका हंसी में टिन्नी से दूर होब के सिसकी सेहो छल, सबहक आंखी में नोर आ ठोर पर हंसी छल!!

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