मुख्यपृष्ठस्तंभमैथिली व्यंग्य: जीवन के असली आनंद

मैथिली व्यंग्य: जीवन के असली आनंद

डॉ. ममता शशि झा मुंबई

निशा विवाह के बाद शहर स गाम एलि त अपन सखि रुनझुन के माय लग चिरौरि केलखिन जे थोड़े दिन हमरा लग रहय दियउ।
निशा कहलखिन चार दिन के बाद अपना सबके किटि पार्टी में जेबाक अछि।
‘ई कोन पार्टी छई, कांग्रेस आ बीजेपी त बुझल अइ।’
निशा मुस्कियाइत बजलि ‘इ सब स्त्रिगन मास में एक बेर भेट करइ छथि, सबके भेंट-घाँट होइ छैन, गप्प-पिहानि के क डिस्ट्रेस याने तनावमुक्त होइ जाइ जाय छथि।’
रुनझुन के आश्चर्य लगलइ जे गप्प-सरक्का कर लेल थिम के कोन जरूरत छइ, गाम में त अहिना बतिया क हंसी मजाक के क प्रसन्न भ जाइ छइ।
पार्टी के थिम छलइ ‘रेट्रो’ जाहि के हिसाब स कोनो पुरान अभिनेत्री के पोशाक, केश सज्जा और फिल्म के गीत पर नाच वा ओकर गीत नाद गाबय के छलैन। निशा राती भरी जागी क सबटा सोची क ओकर तैयारी में लागि गेलि, तय केला के बाद ओकर अनुसार केश सज्जा, मेकअप, ओहि जकां नुआ पहिर के दुनू गोटे तैयार भेलि, रुनझुन के त तैयारि काल में मोन अकक्ष भ गेल छलन्हि, ऊपर से निशा के बहुत सारा निर्देश निक जकाँ चलब, कांटा-चम्मच से खायब, मूंह में कौर देला के बाद मूंह बंद के क चिबाब के, रुनझुन के ई सब सोचिय क तनाव भ रहल छलनि, तनावमुक्त होअ लेल यतेक तनाव!!
अस्तु तैयार भ क दूनू गोटे किटि पार्टी में पहुंचलि, ओतय पुâचुक्का देखि क मोन ललचेलनि मुदा निशा के निर्देश मोन पड़ी गेलनि, मूंह बेसी खोली क नहीं खायब, बेचारी मोन मसोसि क रही गेलि। नाच आ गान प्रस्तुति पर झूठे के वाह-वाहि, सून्न हंसी। सब अपना आप के दोसर स बेहतर देखाब के तनाव में छल। क्यो आनंद नही ल रहल छल, रुनझुन चुपचाप ई तनावयुक्त भ क तनावमुक्त होए के नजारा देखइत छलि। सब अपन डाइट के बड़ाइ करइ में लागल छली आ चिट डे के नाम पर सबके घुसुर-घुसुर खाइत देखि क हंसि लगइ छलैन, निशा के एक बेर ‘खाउ ने’ कहि क अपन दोस्त सब में मिझर भ गेली। रुनझुन घर येलि, दालि-भात अलू सन्ना बनेलि, पलथि मारी क भरि पेट भोजन केलैन। हुनकर चेहरा पर संतुष्टि के फलस्वरूप उपजल आनंद देखि क निशा सोचलनि ‘एकरा कह इ छइ असलि डिस्ट्रेस भेनाइ।’
रुनझुन के भोजन कर के आवाज से हुनका चेहरा पर मुस्कि आबि गेलन!!
दुनू सखि के चेहरा तनाव मुक्त छलैन!!

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