मुख्यपृष्ठनए समाचार‘मातृभाषा का मंदिर' बनाना सर्वाधिक आनंददायी -मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे

‘मातृभाषा का मंदिर’ बनाना सर्वाधिक आनंददायी -मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे

• चर्नी रोड में मराठी भाषा भवन का भूमिपूजन
सामना संवाददाता / मुंबई । मराठी भाषा भवन के भूमि पूजन के मौके पर मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे भावुक हो गए। उन्होंने कहा कि राज्य में आज मराठी भाषा के भवन निर्माण की शुरुआत करना मेरे जीवन का सबसे बड़ा क्षण है। मातृभाषा का मंदिर बनाना मेरे लिए सर्वाधिक आनंददायी है क्योंकि मुंबई के लिए मेरे दादाजी ने लड़ाई लड़ी और मराठी के लिए मेरे पिता बालासाहेब ठाकरे जी ने लड़ाई लड़ी, इस कार्यक्रम के बाद मेरे नाम का भी शिलालेख यहां लग जाएगा।
मराठी भाषा भवन के कार्यक्रम में मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने कहा कि यह विश्व के सर्वोत्तम भाषा भवनों में से होगा। इसे देखने के लिए विश्व से लोग आएं, ऐसा प्रयास हमारा है। इस मौके पर उन्होंने कहा कि मराठी भाषा की पढ़ाई अनिवार्य होनी चाहिए। मराठी भाषा में बोर्ड, बैनर लगाना अनिवार्य होना चाहिए। स्कूलों में इंग्लिश और घरों में मराठी भाषा का भरपूर उपयोग हो, यह ध्यान रहे। मेरे घर में दोनों बेटे मराठी भाषा में बात करते हैं। सरकारी कामकाज की भाषा मराठी हो, अन्य भाषियों पर हमले भी नहीं होने चाहिए और सीमा क्षेत्रों पर मराठी भाषियों के साथ अत्याचार भी नहीं होना चाहिए। ऐसे कृत्य को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि कुछ जवाबदारियों को पूरा करने पर जीवन में आनंद मिलता है। ऐसी ही जवाबदारी मेरे द्वारा सार्थक होने पर आनंद का अनुभव आज मुझे हो रहा है। मराठी माणुस का मतलब संघर्ष होता है। भाषा के अनुसार महाराष्ट्र प्रांत की रचना हुई लेकिन मुंबई रक्त बहाकर, लड़ाई लड़कर मिली है, यह हमारा इतिहास है। जो इतिहास भूलता है उसका कोई भविष्य नहीं रहता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मराठी में बोलने की बात कहने पर लोग मुझ पर टीका-टिप्पणी भी करते हैं लेकिन मैं उनकी टिप्पणी की कोई परवाह नहीं करता हूं। मुझे टिप्पणी की कीमत पता है। स्पष्ट बोलते हुए उन्होंने कहा कि नए युग में अंग्रेजी भाषा का ज्ञान होना ही चाहिए। मैं अन्य भाषाओं से द्वेष नहीं रखता हूं लेकिन मराठी का अपमान मुझसे सहन नहीं होगा।

अन्य समाचार