मुख्यपृष्ठसमाचारएमपी में भांजी ने लगाई गुहार ...मामा शादी करवाओ हमार!

एमपी में भांजी ने लगाई गुहार …मामा शादी करवाओ हमार!

•  छिंदवाड़ा ​में रद्द किया कन्यादान विवाह प्रोग्राम
• विवाह मंडप लगवाने के बाद ९१ शादियां अटकीं
सामना संवाददाता / छिंदवाड़ा
मुख्यमंत्री कन्यादान विवाह योजना को छिंदवाड़ा जिले में सीईओ ने मजाक बना दिया है। भाजीपानी गांव में आदिवासी समाज के कार्यक्रम में सामूहिक विवाह होना था। गांव के सरपंच को सीईओ मौखिक मंजूरी दे चुके थे। ९१ जोड़ों की शादियां होनी थीं। दूल्हे-दुल्हनें और उनके नाते-रिश्तेदार कार्यक्रम स्थल पर जुट चुके थे। सीईओ ने ऐन वक्त पर आयोजन निरस्त कराने का फरमान दे दिया। भाजीपानी के सरपंच झनकलाल बजोड़िया के मुताबिक सामूहिक विवाह कराने का पैâसला लिया गया था। वह जिला पंचायत सीएल मरावी के पास इसकी स्वीकृति लेने गए थे। पहले सीईओ ने उन्हें ५ से अधिक जोड़े कर सामूहिक विवाह कराने की मंजूरी मौखिक तौर पर दे दी थी। ऐसे में उन्होंने तैयारी शुरू कर दी और ९१ जोड़े राजी हो गए। गांव की ही गायत्री गोशाला में विवाह मंडप लगवाकर खाना बनवाकर सभी तरह से तैयारियां पूरी कर ली थीं। दूल्हे और दुल्हनों के परिवार भी सम्मेलन के १ दिन पहले आ गए थे।
सीईओ बोले- अब बहस करने से फायदा नहीं
जानकारी के अनुसार सरपंच और आयोजक अभिषेक मसकोले सीईओ सीएल मरावी के पास पहुंचे, तो वे भड़क गए। सीईओ ने कहा कि अब इस पर बात करने का कोई फायदा नहीं। हमारे और आपके बीच की बात बाहर चली गई। मैंने आपको कहा था कि पुराने नियम में ५ जोड़े या इससे ज्यादा जोड़ों का विवाह होने पर फायदा मिलेगा। इस साल नियम बदल गए हैं। सरपंच ने जब कहा कि आपने नियम बदलने की जानकारी नहीं दी तो सीईओ बोले- हमने १५ दिन पहले ही बोला था। इसी बीच सरपंच के साथ आए जीएसयू ग्राम अध्यक्ष अभिषेक मसकोले नेसीईओ की बात का विरोध किया, तो वे शब्दों की मर्यादा लांघ गए।
रद्द हुआ आयोजन
जानकारी के अनुसार मुख्यमंत्री कन्यादान योजना में विवाह ग्राम पंचायत स्तर पर धार्मिक, सामाजिक कार्यक्रम में वैवाहिक जोड़ों को योजना का लाभ ५१ हजार रुपए देने का प्रावधान था, लेकिन अब वैâबिनेट ने पैâसला लिया है कि इस तरह के आयोजन नगर निगम, जिला पंचायत, जिला पंचायत स्तर पर ही आयोजित होंगे।

अब कर्ज लेकर होगी बेटी की शादी
भरिया भटोरिया के रहने वाले पेशे से मजदूर अजब ने बताया कि बेटी की शादी बोहना खेरी में तय हुई थी। जब इस सम्मेलन का पता चला तो इसमें शामिल होने के लिए घर की रंगाई-पुताई, कपड़े, जेवर सब तैयारी कर ली थी, लेकिन अचानक कार्यक्रम रद्द होने से तैयारियों पर पानी फिर गया। अब कर्ज लेकर शादी करनी पड़ेगी।

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