मनुष्य और चांद

चंदा मामा तुम अच्छे थे दूर ही
रहता था सबको तेरा सुरूर भी
चांद सी महबूबा होती बातों में
चांद तारे उतरते सब बारातों में
कितने हसीन थे तुम्हारे जलवे
अब तो बस होंगे हमेशा शिकवे
राखी पर होंगे मन मुटाव के ढ़ेर
करवाचौथ पर हुई अगर ज़रा देर
अब जो पड़ गए हैं मानव के कदम
देखना तुम,रखेंगे कड़ा पहरा हरदम
हां, तुम पर भी बनाई जाएंगी सरहदें
गाड़े जाऐंगे झंडे और खिचेंगी लकीरें
काटेंगे,खोदेंगे,फोडेंगे,मारेंगे यहाँ वहाँ
लूटेंगे खानिज्य, ज़ख़्म देंगे जहां तहाँ
लालची इंसान से ख़ुद को बचाए रखना
इस राखी माँ ने की है यही प्रार्थना।।।

नूरुस्सबा शायान
कोपरखैरने

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