" /> `सुशासन बाबू’ के शासन में हो रहा है मौत में हेराफेरी!

`सुशासन बाबू’ के शासन में हो रहा है मौत में हेराफेरी!

 प्रशासन का दावा, जिले में अब तक २,१९७ लोगों की मौत
 स्वास्थ्य विभाग बता रहा है १,१६८ लोगों की गई है जान
बिहार में कम होती कोरोना की रफ्तार के बाद अब `सुशासन बाबू’ के शासन में मौत के आंकड़ों में खेल होने लगा है। पटना जिला प्रशासन ने अपनी रिपोर्ट में अब तक जिले में कोरोना से २,१९७ लोगों की मौत की बात कही है। वहीं राज्य स्वास्थ्य विभाग पटना में सिर्पâ १,१६८ लोगों की ही मौत होने की बात स्वीकार रहा है। दोनों के आंकड़ों में करीब ८८ फीसदी का भारी अंतर है। पटना जिला प्रशासन का कहना है कि शेष १,०२९ लोगों का डाटा निजी अस्पताल, शवदाह गृह, जिला नियंत्रण कक्ष से लिए गए हैं। वहीं सवाल पूछने पर कि स्वास्थ्य विभाग का रोना है कि उसके पास निजी अस्पतालों और अन्य स्रोतों से जानकारी सही समय पर नहीं आती है, इस कारण अंतर हो गया होगा।
मुआवजे की राशि हड़पने की योजना
पटना प्रशासन का कहना है कि कोविड-१९ से मरने वालों के आश्रितों को मुख्यमंत्री राहत कोष से ४ लाख रुपए देने के लिए कार्रवाई की जा रही है। इसके लिए जिला अंतर्गत कोविड-१९ मृतकों की सूची तैयार की गई है। सूची के मिलान एवं सत्यापन के बाद कुल संख्या २,१९७ है। इसमें से राज्य स्वास्थ्य समिति के पोर्टल से जिला की सत्यापित संख्या १,१६८ है तथा अन्य स्रोत से सत्यापित संख्या १,०२९ है।
जांच हुई तो सभी जिलों में आएगा अंतर
कोरोना से मरनेवालों की सूची में स्वास्थ्य विभाग के पोर्टल और अन्य स्रोत का यह अंतर बिहार के ३८ जिलों में होगा, क्योंकि निजी अस्पताल और अन्य स्रोतों की जानकारी स्वास्थ्य विभाग को समय से नहीं मिल पाती है। राज्य स्वास्थ्य समिति के आंकड़ों की बात करें तो बिहार में ४ जून तक कुल ५,३१९ लोगों की मौत हो चुकी है लेकिन पटना में जिस तरह से आंकड़ों में सर्वे के बाद ८८ प्रतिशत अंतर आया है उस हिसाब से तो प्रदेश में मौत का आंकड़ा लगभग १० हजार होना चाहिए। हालांकि यह स्थिति पटना छोड़ अन्य जिलों के सत्यापन से ही साफ हो पाएगी।