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पांच माह के निचले स्तर पर पहुंचा विनिर्माण … महंगाई की मार उत्पादन में मंदी!

• पर्चेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स में भी गिरावट हुई दर्ज
• स्टैंडर्ड एंड पूअर के तथ्यात्मक सर्वेक्षण का सच

क्या देश का विनिर्माण क्षेत्र मंदी के दौर से गुजर रहा है। ऐसा इसलिए पूछा जा रहा है क्योंकि गत महीने देश के उत्पादन क्षेत्र में गिरावट दर्ज की गई है। जानकारों का मानना है कि उत्पादन क्षेत्र में मंदी की आहट अर्थव्यवस्था के लिए ठीक नहीं है। रेटिंग एजेंसी एसएंडपी (स्टैंडर्ड एंड पूअर) ग्लोबल की एक सर्वेक्षण रिपोर्ट आई है, जो देश के लिए चिंता की बात है। इस रिपोर्ट के अनुसार, विनिर्माण क्षेत्र का पर्चेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (पीएमआई) सितंबर में गिरकर ५७.५ पर आ गया। अगस्त में यह ५८.६ पर था। लेकिन अगर यह ५० अंक के नीचे जाता है तो यह काफी चिंताजनक माना जाएगा। रिपोर्ट में कहा गया है, ‘हिंदुस्थान के विनिर्माण उद्योग ने सितंबर में नरमी के हल्के संकेत दिए, जिसका मुख्य कारण नए ऑर्डरों में कमजोर वृद्धि है, जिससे उत्पादन वृद्धि प्रभावित हुई है।
इस सर्वेक्षण रिपोर्ट पर नजर डालने से एक बात साफ है कि उत्पादन क्षेत्र में गिरावट का कनेक्शन महंगाई से है। रिपोर्ट में कहा गया है कि अधिक श्रम लागत, कारोबारी विश्वास में तेजी और बढ़ती मांग ने उत्पादन शुल्क में तेज वृद्धि की है। हालांकि, मजबूत मांग उत्पादन वृद्धि के लिए सहायक थी, लेकिन इसने सितंबर में कीमतों के दबाव को बढ़ा दिया। एसएंडपी ग्लोबल मार्किट इंटेलिजेंस की सहायक निदेशक पॉलियाना डीलीमा कहती हैं, ‘पीएमआई आंकड़ों से संकेत मिलता है कि उत्पादन शुल्क में ठोस वृद्धि, जो लागत दबाव में उल्लेखनीय कमी के बावजूद हुई है, आने वाले महीनों में बिक्री को सीमित कर सकती है। डीलीमा कहती हैं, ‘पीएमआई के आंकड़ों से संकेत मिलते हैं कि उत्पादन लागत में ठोस वृद्धि हुई है।’ उत्पादन लागत में वृद्धि का सीधा सा मतलब तो यही है कि महंगाई के कारण विनिर्माण प्रभावित हो रहा है। डीलीमा कहती हैं, ‘इससे आने वाले महीनों में बिक्री प्रभावित हो सकती है।’ सर्वे में कहा गया है कि सितंबर के आंकड़ों से पता चलता है कि हिंदुस्थान के वस्तुओं के उत्पादकों को हाल में लागत में हुई बढ़ोतरी से जूझना पड़ा है। सर्वे में कहा गया है, ‘अगस्त में एक साल के उच्च स्तर पर पहुंचने के बाद महंगाई दर ३ साल के निचले स्तर पर पहुंच गई थी। पैनलिस्टों ने संकेत दिए कि तांबे, इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट, फूडस्टफ, लोहा और स्टील के लिए ज्यादा भुगतान करना पड़ा, वहीं तेल और एल्युमीनियम की कीमत कम रही।’ श्रम की लागत ज्यादा होने और मांग मजबूत होने के कारण हिंदुस्थान के विनिर्माताओं द्वारा लिए जाने वाले औसत दामों में मजबूत और तेज दर से बढ़ोतरी हुई और यह दीर्घावधि औसत से ऊपर निकल गया।

कल मौद्रिक नीति की घोषणा
आरबीआई गवर्नर की अध्यक्षता वाली छह सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की कल ४ अक्टूबर से तीन दिवसीय बैठक शुरू हो गई है। आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास शुक्रवार ६ अक्टूबर को पैâसले की घोषणा करेंगे। इसमें मौद्रिक नीति में क्या घोषणा होती है, इसका विनिर्माण क्षेत्र पर प्रभाव पड़ सकता है।

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