मुख्यपृष्ठनए समाचारमुख्यमंत्री के गढ़ में `मरघट' बना मनपा अस्पताल! १२ घंटे में १८...

मुख्यमंत्री के गढ़ में `मरघट’ बना मनपा अस्पताल! १२ घंटे में १८ मरीजों की हुई मौत, परिजनों का आरोप इलाज के अभाव में निकला दम

सामना संवाददाता / ठाणे  
प्रदेश के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के शहर ठाणे में झकझोरने वाले कई मामले सामने आ रहे हैं। अब मनपा द्वारा संचालित कलवा स्थित छत्रपति शिवाजी महाराज अस्पताल में १२ घंटे में भर्ती हुए करीब १८ मरीजों की मौत होने से अस्पताल मरघट में तब्दील हो चुका है। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल में भर्ती हुए सभी मरीजों की मौत इलाज के अभाव में हुई है। बता दें कि तीन दिन पहले भी आईसीयू में भर्ती छह मरीजों की मौत हुई थी। इससे अस्पताल प्रशासन एक बार फिर आलोचनाएं झेल रहा है। इस बीच प्रशासन ने दावा किया है कि मरने वाले कुछ मरीज बुजुर्ग थे, जबकि कुछ मरीजों को अंतिम क्षणों में निजी अस्पतालों से रेफर किया गया था, जिन्हें गंभीर हालत में यहां भर्ती कराया गया था। ज्ञात हो कि ठाणे मनपा के कलवा स्थित छत्रपति शिवाजी महाराज अस्पताल में गुरुवार को छह मरीजों की मौत हुई थी। इसके बाद इलाज के अभाव में मरीजों की मौत का आरोप लगाते हुए परिजनों ने अस्पताल के बाहर हंगामा किया था। इस घटना को गुजरे दो दिन भी नहीं बीते थे कि इसी अस्पताल में इलाज के दौरान महज १२ घंटे में करीब १८ मरीजों की मौत होने की जानकारी सामने आई है।
इन वार्डों में शुरू था इलाज
अस्पताल में भर्ती मरीजों की मौत शनिवार रात १०.३० बजे से रविवार सुबह ८.३० बजे के बीच हुई। इनमें १३ मरीजों का इलाज अस्पताल की गहन चिकित्सा इकाई में और ५ मरीजों का इलाज सामान्य वार्ड में शुरू था। दूसरी तरफ मनपा प्रशासन की तरफ से दावा किया जा रहा है कि जिन मरीजों की मौत हुई है, उनकी स्थिति बहुत गंभीर थी। उन्हें निजी अस्पतालों ने तब रेफर किया था, जब वे अंतिम सांस गिन रहे थे। उन्होंने कहा कि इनमें से ३-४ मरीज ८० साल से अधिक उम्र के थे।
१-१२ अगस्त के बीच भर्ती हुए थे मरीज
कलवा अस्पताल में जिन मरीजों की मौत हुई है, उन्हें १ अगस्त से १२ अगस्त के बीच अस्पताल में भर्ती कराया गया था। यह जानकारी अस्पताल प्रशासन ने दी। इसमें ठाणे-६, कल्याण-४, भिवंडी-३ और उल्हासनगर, साकीनाका, गोवंडी के एक-एक मरीज शामिल हैं।
किसे था कौन-सा रोग?
मृत मरीजों में से पांच को सांस लेने में दिक्कत थी। एक मरीज की प्लेटलेट्स कम हो गई थीं। अस्पताल पहुंचने के एक मिनट के भीतर ही उसकी मृत्यु हो गई थी। एक मरीज की आंत का अल्सर फट गया था। उसका दिल काम नहीं कर रहा था। उसे वेंटिलेटर पर रखा गया था। दो मरीजों का लीवर फेल हो गया था। इनमें से एक की किडनी ने काम करना बंद कर दिया था। दो मरीज मधुमेह और उच्च रक्तचाप के भी थे। बताया गया है कि १८ मरीजों में से ८ पुरुष और १० महिलाओं का समावेश है। इनमें इनमें एक चार साल का बच्चा भी शामिल है, जिसने केरोसिन पी लिया था और इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
मरीजों का बढ़ा बोझ
ठाणे जिला सरकारी अस्पताल के स्थान पर सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल का निर्माण कार्य प्रगति पर है। इससे कलवा अस्पताल पर मरीजों का बोझ बढ़ गया है। यहां ठाणे, रायगड और पालघर जिले से मरीज आ रहे हैं। मरीजों के आने की तुलना में मनपा अस्पताल में डॉक्टरों और चिकित्सा व्यवस्था कम पड़ने लगी है, जिसका सीधा असर मरीजों के इलाज और उनकी देखभाल पर पड़ रहा है।
…तो इसी तरह अस्पतालों में होगा इलाज
गौरतलब है कि ठाणे शहर मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे का गृहनगर है। अस्पताल ठाणे मनपा प्रशासन के तहत संचालित है, वहीं ईडी सरकार ने हाल ही में १५ अगस्त से सभी राज्य संचालित स्वास्थ्य संस्थानों में लोगों को मुफ्त चिकित्सा सेवाएं और उपचार प्रदान करने का निर्णय लिया है। स्वास्थ्य अधिकारियों के मुताबिक, राज्य में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, ग्रामीण अस्पताल, महिला अस्पताल, जिला अस्पताल और सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल मरीजों का मुफ्त इलाज करेंगे। हालांकि, कलवा स्थित मनपा अस्पताल में जिस तरह से बीते कुछ दिनों से मरीजों की मौतें हो रही हैं, उससे गरीब मरीजों में भय का माहौल देखा जा रहा है। साथ ही वे सरकारी अस्पतालों में इलाज कराने से बचते हुए दिखाई दे रहे हैं। वे सवाल कर रहे हैं कि क्या सरकारी अस्पतालों में उनका इसी तरह से इलाज होगा।
अस्पताल को लगाओ ताला
राकांपा नेता व विधायक जितेंद्र आव्हाड की पत्नी ऋता आव्हाड रविवार को अपने समर्थकों के साथ कलवा स्थित मनपा अस्पताल पहुंची और स्थिति का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा कि वास्तव में प्रशासन है क्या? इस पर सवालिया निशान है। प्रशासन को प्रशासनिक दिक्कत या अस्पताल को कुछ समस्या होती है तो यह उनका पॉलिसी मैटर है। उन्होंने कहा कि मनपा अथवा सरकारी अस्पताल में ऐसे मरीज आते हैं, जो निजी अस्पतालों में होनेवाले खर्च को वहन नहीं कर सकते हैं। हर बार मरीजों से कहा जाता है कि डॉक्टरों और स्टाफ की कमी है। बेड नहीं है तो ऐसे में हम क्या कर सकते हैं। यदि अस्पताल की ये स्थिति है तो इसमें ताला लगा दो। किसी को किसी के जीवन से खिलवाड़ करने का कोई अधिकार नहीं है।
अमोल कोल्हे का ट्वीट
…और कितने निर्दोष मारे जाएंगे?
ठाणे मनपा के कलवा स्थित छत्रपति शिवाजी महाराज अस्पताल का मामला सामने आने के बाद विपक्षी दलों के नेता सीधे अस्पताल पहुंचे और प्रशासन से जवाब मांग रहे हैं। राकांपा के सांसद अमोल कोल्हे ने भी ट्वीट कर सरकार की आलोचना करते हुए सवाल किया कि `और कितने निर्दोष मारे जाएंगे?’ उन्होंने कहा है कि संसद में अक्सर सार्वजनिक स्वास्थ्य पर सरकार का ध्यान आकर्षित किया है। वास्तव में सरकार की प्राथमिकता सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली पर अधिकतम खर्च करके प्रत्येक नागरिक को बेहतर स्वास्थ्य सेवा प्रदान करनी चाहिए! लेकिन हम स्वास्थ्य सेवा पर देश की जीडीपी का केवल १.५ प्रतिशत ही खर्च कर रहे हैं, जो दुर्भाग्यपूर्ण है। हम पहले ही कोविड के समय में सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली का बोझ देख चुके हैं। इसीलिए मैं पिछले ३ वर्षों से इंद्रायणी मेडिसिटी परियोजना पर काम कर रहा हूं। उन्होंने आगे कहा कि प्रत्येक जिले में अत्याधुनिक सार्वजनिक अस्पताल होने की आवश्यकता है। सरकारी अस्पतालों के निर्माण में भौगोलिक क्षेत्रफल एवं जनसंख्या घनत्व का ध्यान रखा जाना चाहिए।
दो दिन में आएगी रिपोर्ट, फिर होगी कार्रवाई -स्वास्थ्य मंत्री
मनपा अस्पताल में मरीजों की हुई मौत के मामले पर स्वास्थ्य मंत्री तानाजी सावंत ने कहा है कि हम घटना की आयुक्त और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से जानकारी ले रहे हैं। इसके साथ ही उन मरीजों के बारे में भी जानकारी लिया जा रहा है, जिनकी पहले मौत हुई है। हालांकि, अस्पताल चिकित्सा शिक्षा विभाग के अधिकार क्षेत्र में आता है, लेकिन मौत तो आखिर मौत है। इन मरीजों की मौत किस कारण से हुई, इसकी रिपोर्ट दो दिन में आएगी और इसके बाद कार्रवाई की जाएगी।
जांच कर दोषियों पर होनी चाहिए कार्रवाई -अदिति तटकरे
राज्य सरकार में मंत्री अदिति तटकरे ने कल कलवा स्थित छत्रपति शिवाजी अस्पताल में पहुंचकर परिस्थिति का मुआयना किया। इस दौरान उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा कि अस्पताल में जो घटना घटी है, वो बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है। इसकी जांच के लिए स्वतंत्र समिति नियुक्त कर तत्काल सविस्तार रिपोर्ट मंगाई जाए। साथ ही जांच में दोषी पाए जाने पर संबंधित के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। इसके अलावा इस तरह की दुर्भाग्यपूर्ण घटनाएं भविष्य में न हो, इस पर सरकार की ओर से तत्काल प्रभावी उपाय किए जाने चाहिए। इस आशय का निर्देश सीएम की तरफ से भी दिया गया है। उन्होंने कहा कि सिविल अस्पताल का निर्माण शुरू है। ऐसे में ठाणे में स्वास्थ्य व्यवस्थाएं न डगमगाए इस दृष्टिकोण से जरूरी उपाय किए जाने चाहिए। इस तरह का आग्रह हमने शासन से किया है।
गठित हुई जांच समिति
इस मामले को गंभीरता से लिया गया है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर जांच समिति गठित की गई है। मृतकों के मरीजों के परिजनों द्वारा की गई शिकायतों को समिति के सामने प्रस्तुत किया जाएगा। इसमें समिति सभी पक्षों की जांच करेगी। इससे निष्कर्ष पर पहुंचने में आसानी होगी। इस मामले की जांच के लिए राज्य के स्वास्थ्य विभाग के आयुक्त की अध्यक्षता में एक समिति नियुक्त की गई है। इसमें स्वास्थ्य निदेशक, मनपा आयुक्त, ठाणे जिलाधिकारी, जेजे अस्पताल की गहन चिकित्सा इकाई के विशेषज्ञ डॉक्टर शामिल हैं। आवश्यकतानुसार समिति में ठाणे जिला शल्य चिकित्सक को भी शामिल किया जाएगा।
-अभिजीत बांगर,
आयुक्त, ठाणे महानगरपालिका

अन्य समाचार