मुख्यपृष्ठसमाचारगोल्डन आवर में मदद मिलती तो बच जाते मेटे

गोल्डन आवर में मदद मिलती तो बच जाते मेटे

  • मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर हुई दुर्घटना में चली गई जान

सामना संवाददाता / नई मुंबई
कल अल सुबह मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर हुई भीषण सड़क दुर्घटना में मराठा नेता और पूर्व विधायक विनायक मेटे की जान चली गई, जबकि उनका ड्राइवर और बॉडीगार्ड गंभीर रूप से घायल हो गए। दुर्घटना के बाद काफी समय तक मेटे वहीं पड़े रहे। अगर गोल्डन आवर में उन्हें मदद मिल गई होती तो उनकी जान बच जाती। उनके ड्राइवर और बॉडीगार्ड को उपचार के लिए कामोठे एमजीएम अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
विनायक मेटे के ड्राइवर एकनाथ कदम ने बताया कि सुबह बीड से मुंबई आ रहे थे। तभी एक्सप्रेसवे पर रसायनी के पास एक ट्रक की चपेट में आ गए। इस हादसे के एक घंटे बाद भी उन्हें मदद नहीं मिली। कदम ने १०० नंबर पर कॉल किया लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया। कदम ने बताया कि सभी से मदद की गुहार लगा रहा था लेकिन किसी ने गाड़ी नहीं रोकी। मदद के लिए सड़क पर लेट गया इसके बावजूद कोई मदद नहीं मिली। कुछ देर बाद वहां से गुजर रहे टेम्पो ड्राइवर ने मदद की। उसके एक घंटे बाद एंबुलेंस आई और उन्हें कलंबोली एमजीएम अस्पताल में भर्ती कराया गया। तब तक देरी हो चुकी थी। कदम ने यह भी कहा कि सुबह ५.०५ बजे दुर्घटना हुई और ६ बजे के करीब पुलिस और एंबुलेंस पहुंची। उसके बाद अस्पताल पहुंचाया गया। एक घंटे तक कोई मदद के लिए नहीं आया। उन्होंने कहा कि सिस्टम ने भी मदद नहीं की। इस एक घंटे में अस्पताल पहुंचे होते तो शायद मेटे की जान बच जाती थी। मेटे को सिर में चोट लगने से मौत होने की जानकारी डॉक्टरों ने दी है। इस संदर्भ में पलस्पेâ महामार्ग पुलिस के प्रभारी अधिकारी ने बताया कि ५.५८ पर दुर्घटना के संदर्भ में सूचना मिलते ही तुरंत रवाना हुए। ६.१० पर पहुंच गए थे। उसके बाद तुरंत उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया।

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