मुख्यपृष्ठसंपादकीयमोदी ठीक हो जाएं!

मोदी ठीक हो जाएं!

नीतिश कुमार की तरह ही नरेंद्र मोदी भी बीमार हैं और भारतीय जनता पार्टी को उन्हें ज्यादा परेशान नहीं होने देना चाहिए। देश के लिए न सही, पर भाजपा के लिए मोदी जरूरी हैं। दूसरा यह कि, कांग्रेस पार्टी में मणिशंकर अय्यर, सैम पित्रोदा आदि लोग जो कहते हैं, उससे भाजपा को फायदा होता है। बीमारी के कारण मोदी उसी पंक्ति में जाकर बैठ गए हैं। मोदी के भाषण और बयान ऐसे में भाजपा के लिए ही दुविधा पैदा करते नजर आ रहे हैं। ये इस बात का संकेत है कि मोदी की सेहत ठीक नहीं है। मोदी नंदुरबार में भाजपा उम्मीदवार के लिए प्रचार करने आए थे। वहां उन्होंने कहा कि उद्धव ठाकरे और शरद पवार को हमारे साथ आना चाहिए। उनका यह बयान हास्यास्पद है। पिछले कुछ दिनों से मोदी महाराष्ट्र में बैठे हुए हैं। उन्हें महाराष्ट्र से डर लग रहा है। उन्हें एहसास हो गया है कि महाराष्ट्र में माहौल उनके खिलाफ है। मोदी ने हर भाषण में ‘ठाकरे-पवार’ पर जहरीली आलोचना की। ये दोनों नेता और उनकी पार्टियां नकली हैं, उद्धव ठाकरे तो नकली संतान होने का जहर भी उन्होंने उगला। तो फिर ४ जून के बाद मोदी इन फर्जी लोगों को अपने साथ क्यों चाहते हैं? ये भाजपा की ही मंडली के मन में उपजा प्रश्न है। ‘एक अकेला सब पर भारी’ ऐसा मोदी खुद अपने बारे में कहते हैं। मोदी पहले ही भविष्यवाणी कर चुके हैं कि वे अपने दम पर लोकसभा में चार सौ सीटें जीतेंगे। एकनाथ शिंदे, अजीत पवार, अशोक चव्हाण जैसे खोखले बांसों को उन्होंने भाजपा के ‘टेकू’ के रूप में लगाया। शिंदे, अजीत पवार आदि लोग महाबली हैं, ऐसा उन्होंने एलान किया। फिर वे उद्धव ठाकरे, शरद पवार को क्यों चाहते हैं? इसका जवाब एक वाक्य में दिया जाए तो मोदी लोकसभा चुनाव में हार रहे हैं। उन्हें बहुमत नहीं मिलेगा। इसलिए बहुमत के आंकड़े तक पहुंचने के लिए उन्हें उद्धव ठाकरे और शरद पवार की मदद की जरूरत होगी। इसलिए अभी से मोदी ने फुसलानेवाली चाल चलना शुरू कर दिया है। मनुष्य पहले मन से हारता है और फिर युद्धभूमि में हारता है। साफ है कि मोदी मन से हार चुके हैं। महाराष्ट्र की ४८ लोकसभा सीटों में से शिवसेना-राष्ट्रवादी कांग्रेस और कांग्रेस का गठबंधन कम से कम ३५ सीटें जीत रहा है और महाराष्ट्र के मतदाता मोदी को सबक सिखाने के मूड़ में हैं। ‘मोदी मैजिक’, ‘मोदी का जादू’, ‘मोदी है तो मुमकिन है’ जैसे प्रयोग इस समय ध्वस्त हो गए हैं। मोदी ने महाराष्ट्र में जो ऊटपटांग चालें चली, वे अब उन पर ही उल्टी पड़ गई हैं। मोदी-शाह की जोड़ी भय से ग्रस्त है और शायद उसी से उन्हें कुछ नए विकार हो गए हों। मोदी बेताल होकर बोल रहे हैं। मोदी का राजनीतिक आकलन और अनुभव अलग है। इसलिए कांग्रेस और अन्य दलों के विलय के संबंध में शरद पवार ने वास्तव में जो कहा, वो मोदी के दिमाग में रत्तीभर नहीं आई। श्री पवार ने कहा कि लोकसभा चुनाव के बाद कुछ क्षेत्रीय दल जो मूल रूप से कांग्रेस विचारधारा के हैं, उनका कांग्रेस पार्टी में विलय हो सकता है। इसका मतलब यह नहीं है कि शिवसेना, राष्ट्रवादी कांग्रेस जैसी बड़ी पार्टियां कांग्रेस पार्टी में विलय कर लेंगी। शिवसेना का तो सवाल ही नहीं उठता, लेकिन अगर लोकसभा के बाद कांग्रेस बड़ी पार्टी बनकर उभरी तो देश की कुछ छोटी पार्टियां भी कांग्रेस की राह पर चलेंगी। आज ‘रालोआ’ यानी भाजपा के साथ रहनेवाली छतरी का भी इसमें समावेश हो सकता है। कई लोग मोदी की तानाशाही की जंजीरों को उतार फेंकना चाहते हैं और इसके लिए कांग्रेस पार्टी को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत करना जरूरी है। मोदी ने कई कांग्रेसियों को अपनी पार्टी में शामिल किया। ४ जून के बाद इनमें से कई लोग अपनी मूल कांग्रेस पार्टी में वापस चले जाएंगे। ओडिशा, असम, जम्मू-कश्मीर, तमिलनाडु राज्यों में क्षेत्रीय दल काम करते हैं। वे मूल रूप से कांग्रेस विचारधारा के हैं। महाराष्ट्र में कुछ पार्टियां जिला स्तर पर काम करती हैं और उनके एकाध विधायक निर्वाचित होते हैं। ऐसी पार्टियों की भी कांग्रेस पार्टी में विलय होने की संभावना है, ये मोदी को समझना चाहिए। अजीत पवार और घाती गुट को लेकर भाजपा पूरी तरह से उम्मीद खो चुकी है। अगर कल को भाजपा ने उन्हें बाहर कर दिया तो मिंधे-अजीत पवार गुट को भी कांग्रेस की ही राह स्वीकारनी पड़ेगी। आखिर राजनीति एक बुलबुले की तरह है। हर कोई निजी स्वार्थ और अस्तित्व की ही लड़ाई लड़ रहा है। भाजपा की नीति क्षेत्रीय पार्टियों के सहारे खुद को आगे बढ़ाने और जरूरत खत्म होते ही उन क्षेत्रीय पार्टियों को खत्म करने की है। गोवा, हरियाणा में ऐसे क्षेत्रीय दल भविष्य में कांग्रेस पार्टी में विलय कर सकते हैं। ऐसे में कांग्रेस मजबूत हो जाएगी, यही भय मोदी को लगता होगा। मोदी भारतीय राजनीति का एक खोखला स्तंभ हैं, ये गलती से सबकी समझ में आ गया है। हार के डर से उनका हाथ-पैर मारना शुरू है। मोदी कहते हैं शरद पवार, उद्धव ठाकरे हमारे साथ आएं, उनके सपने सच होंगे। मोदी का यह बयान गुमराह करने वाला है। मोदी की तानाशाही और भ्रष्टाचार को संरक्षण देने के कदम के खिलाफ शरद पवार और उद्धव ठाकरे ये दो नेता खड़े हो गए हैं। मोदी की तानाशाही को खत्म करना ही इन दोनों का सपना है। देश के सपनों को कुचलने वाले मोदी के साथ महाराष्ट्र की क्षेत्रीय पार्टियां कभी नहीं जाएंगी। मोदी इसी तरह बेताल बोलते रहें। यह महाराष्ट्र के लिए अच्छा है। फिर भी हम भगवान से प्रार्थना करते हैं कि मोदी की सेहत में सुधार हो।

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