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मायावती का केंद्र सरकार पर तंज मोदी बना रहे हैं गरीबों को मोहताज!

सामना संवाददाता / लखनऊ

८१ करोड़ जनतासरकारी अनाज पर निर्भर

कोरोना काल में लॉकडाउन से प्रभावित गरीबों की मदद के लिए केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना को शुरू किया था। जब पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव नजदीक आए तो जनता को लुभाने के लिए इस योजना को मोदी सरकार ने पांच साल के लिए बढ़ा दिया। इस योजना को लेकर बसपा सुप्रीमो मायावती ने केंद्र सरकार पर जोरदार तंज कसा है। उन्होंने कहा है कि देश के ८१ करोड़ से अधिक गरीब लोगों को पेट पालने के लिए सरकारी अन्न के लिए मोहताज बना देने जैसी दुर्दशा न यह आजादी का सपना था और न ही उनके लिए कल्याणकारी संविधान बनाते समय बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर ने सोचा था, यह स्थिति अति-दुखद है।

उन्होंने कहा कि चुनाव के समय माहौल अलग होता है, लेकिन चुनाव परिणाम उससे बिल्कुल अलग आते हैं। ऐसा क्यों और वैâसे? यह भी एक नया मुद्दा है, जिस पर जनचिंतन जरूरी है। वास्तविक चिंता यह है कि सरकार की गलत नीतियों और कार्यक्रमों के कारण गरीब, मजदूर, अशिक्षित लोगों को और पीछे धकेला जा रहा है। क्या सरकारी दावों के मुताबिक, इन लोगों के बल पर ही भारत को विकसित देश बनने का सपना देखा जा सकता है?

बता दें कि मायावती ने आंबेडकर के ६७वें ‘परिनिर्वाण दिवस’ पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा, ‘लगभग १४० करोड़ की विशाल आबादी वाले भारत के गरीबों, मजदूरों, दलितों, आदिवासियों, अतिपिछड़ों सहित उपेक्षित बहुजनों के मसीहा व देश के मानवतावादी समतामूलक संविधान के निर्माता भारतरत्न परमपूज्य बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर को आज उनके ‘परिनिर्वाण दिवस’ पर अपार श्रद्धा-सुमन अर्पित।’ मायावती ने बाद में एक बयान जारी कर कहा कि विभिन्न चुनाव परिणाम से लगता है कि सरकारी अनाज के ‘मोहताज’ बनाए गए लोग अपनी बदहाली से खुश नहीं हैं लेकिन क्या अब वे लोग इतना साहस भी नहीं दिखा पा रहे हैं कि चुनाव में अपना विरोध दर्ज कराकर ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ की नीतियों पर चलने वाली सरकार चुनने का सार्थक प्रयास कर सकें? उन्होंने कहा, ‘देश में रोटी-रोजी के अभाव एवं महंगाई की मार के कारण आमदनी अठन्नी भी नहीं पर खर्चा रुपया होने के कारण गरीब, मजदूर, छोटे व्यापारी, किसान, मध्यम वर्ग सहित सभी मेहनतकश समाज की हालत त्रस्त व चिंतनीय है, जबकि संविधान को सही से लागू करके उनकी हालत अब तक काफी संवर जानी चाहिए थी।’

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