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नसबंदी का नाम सुनकर घबराते हैं पुरुष! …महज तीन फीसदी है दर महिलाओं पर डाला जाता है परिवार नियोजन का भार

सामना संवाददाता / नई दिल्ली
हिंदुस्थान में आज भी अधिकांश परिवारों में परिवार नियोजन का भार मुख्यत: महिलाओं पर ही डाला जाता है, वहीं जहां पुरुष नसबंदी की बात आती है तो वे इसका नाम सुनकर ही घबरा जाते हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य व परिवार कल्याण मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, साल २००८ से २०१९ के बीच ५.१६ करोड़ लोगों की नसबंदी की गई। इसमें पुरुष नसबंदी की दर महज तीन फीसदी रही।
विशेषज्ञों का कहना है कि नसबंदी एक शल्य प्रक्रिया है, जिसमें पुरुष के अंडकोष को काटते हुए शुक्राणु ले जानेवाली नली को हटा दिया जाता है। यह सर्जरी सामान्य एनेस्थीसिया के तहत की जाती है, जिसका मतलब है कि नसबंदी करनेवाला व्यक्ति सचेत है और उसे कोई दर्द महसूस नहीं होता है। साथ ही ये सर्जरी महज २० मिनट में पूरी हो जाती है। केंद्र सरकार के स्वास्थ्य व परिवार कल्याण मंत्रालय की एक रिपोर्ट के अनुसार, पुरुष नसबंदी की यह विधि अन्य गर्भनिरोधक विधियों की तुलना में ९९ प्रतिशत अधिक प्रभावी है। लेकिन पुरुष नसबंदी को लेकर कई भ्रांतियां और मिथक हैं। पुरुष नसबंदी से पुरुषत्व खत्म हो जाता हैं, जो बहुत ही आम गलतफहमी है। इसमें कोई सच्चाई नहीं है।
नसबंदी से नहीं बढ़ता है मोटापा
रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि पुरुषों के नसबंदी से न तो मोटापा बढ़ता है और न ही शरीर कमजोर होता है। वे पहले की तरह शारीरिक श्रम कर सकते हैं। इसलिए इसमें संदेह करने का कोई कारण नहीं है। स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के यूरोलॉजी विभाग के शोधकर्ताओं के अनुसार, १९७३ में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा गर्भपात के अधिकार पर प्रतिबंध लगाने के बाद पुरुष नसबंदी के मामलों में वृद्धि हुई। दुनियाभर के अन्य देशों में भी यही प्रवृत्ति देखी गई।

सरकारी अस्पतालों में नि:शुल्क होती है सर्जरी
मुंबई के हिंदुजा अस्पताल में यूरोलॉजिस्ट डॉ. सोनी मेहता के अनुसार, यह सर्जरी सरकारी अस्पतालों में की जा सकती है। सरकारी अस्पताल इस सर्जरी के लिए कोई शुल्क नहीं लेते हैं। हालांकि, अगर आप प्राइवेट अस्पताल में सर्जरी कराना चाहते हैं तो आपको वहां की सुविधाओं के हिसाब से भुगतान करना होगा। सर्जरी से पहले और बाद में बरती जानेवाली सावधानियों के बारे में जानकारी देते हुए उन्होंने कहा है कि इसमें कोई विशेष सावधानी बरतने की जरूरत नहीं है। इतना जरूर है कि मधुमेह के मरीज का सर्जरी से पहले शुगर का स्तर सामान्य होना चाहिए।

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