मुख्यपृष्ठनए समाचारमानसिक रोग हो गया ठीक फिर भी अस्पताल में दोबारा लौटे मरीज

मानसिक रोग हो गया ठीक फिर भी अस्पताल में दोबारा लौटे मरीज

सामना संवाददाता / मुंबई

सरकारी विभाग में कामकाज पर हाई कोर्ट का हंटर

मानसिक बीमारी से जूझ रहे तीन मरीजों के ठीक होने के बावजूद परिजनों ने उन्हें अपनाने से इनकार कर दिया। ऐसी स्थिति में स्वस्थ हुए तीनों मरीजों को वापस अस्पताल लेकर लौटना पड़ा। इसके बाद इस मामले में मुंबई हाई कोर्ट ने राज्य सरकार के दो विभागों में शुरू कामकाज पर जोरदार हंटर चलाया। कोर्ट ने कहा कि दो विभागों के बीच समन्वय का अभाव होने से तीनों मरीजों को मिलनेवाली सुविधाओं से वंचित रहना पड़ा है।

उल्लेखनीय है कि ठाणे के मेंटल अस्पताल में मानसिक बीमारियों से जूझ रहे तीनों रोगियों का इलाज शुरू था। लंबे समय तक चले इलाज के बाद तीनों मरीज पूरी तरह से ठीक हो गए। ऐसे में उन्हें मेंटल अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। हालांकि, इन तीनों मरीजों को जब उनके परिजनों के पास ले जाया गया, तब परिवार वालों ने उन्हें स्वीकार करने से साफ मना कर दिया। इस स्थिति में तीनों को ठाणे मेंटल अस्पताल में वापस लाना पड़ा। इस मामले में मनोविकार विशेषज्ञ डॉ. हरीश शेट्टी ने मुंबई हाई कोर्ट की शरण में जाकर जनहित याचिका दायर कर दी। इस याचिका पर न्यायाधीश नितीन जामदार और न्यायाधीश मंजूषा देशपांडे की खंडपीठ के सामने सुनवाई हुई। डॉ. शेट्टी ने दलीलें दी कि मानसिक उपचार कानून २०१७ की धारा १९ (१)(ब) के तहत जिस व्यक्ति को मानसिक इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया जाता है, उसका इलाज पूरा होने के बाद यदि परिजनों ने उन्हें अपनाने से इनकार किया तो उसे फिर से अस्पताल में नहीं रखा जा सकता है। वह उनके मूलभूत अधिकारों का उल्लंघन है।

मानसिक स्वास्थ्य विभाग ने रखा अपना पक्ष

राज्य के मानसिक स्वास्थ्य प्राधिकरण की ओर से एड. विश्वजीत सावंत ने पक्ष रखा कि राज्य के दिव्यांग कल्याण विभाग से इन मरीजों के लिए व्यवस्था करने के लिए पूछा गया, लेकिन उनकी तरफ से कोई प्रतिसाद नहीं मिला, वहीं दिव्यांग कल्याण विभाग के एड. मनीष पाबले की तरफ से दलीलें दी गई कि विभाग को इसे लेकर कुछ शंकाएं हैं और उसे प्राधिकरण से पूछा गया, लेकिन इसका कोई भी जवाब नहीं दिया गया। ये दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने सरकार के इन दोनों विभागों के कामकाज पर हंटर चलाया। कोर्ट ने कहा कि दोनों विभागों में समन्वय के अभाव के कारण इन तीनों मरीजों को मिलनेवाली सुविधाओं से वंचित होना पड़ा है।

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